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बच्चों की त्वचा और बालों की देखभाल कैसे करें | How to Take Care of Baby’s Skin and Hair In Hindi

हम अक्सर वयस्कों के लिए त्वचा और बालों की देखभाल के बारे में बात करते है। जिस तरह वयस्कों को इस तरह की समस्यां का सामना करना पड़ता है। उसी तरह बच्चों में भी इन समस्यां का होना आम बात है।

इसी लिए आज का यह article इस पर ही आधारित है। आज के इस लेख में हम बच्चों की त्वचा और बालों की देखभाल के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी लेंगे।

मेडिकल रिसर्च में यह साबित हो चुका है यह समस्यां अक्सर शिशुओं की त्वचा और बालों के स्वास्थ्य को नजर अंदाज करने के कारण होता है।

तो चलिए आगे बढ़ते हुवे विस्तार से जानते है बच्चों की त्वचा और बालों की देखभाल कैसे करें। 

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How to Take Care of Baby’s Skin In Hindi :

बच्चे की त्वचा बहुत ही मुलायम और नाजुक होती है। इसलिए बच्चे के जन्म के तुरंत बाद सबसे पहला काम बच्चे को साफ करना चाहिए।

क्योंकि इसके शरीर और बालों पर खून के अलावा amniotic fluid होता है। इनके साथ एक सफेद तैलीय कोटिंग होती है जिसे vernix caseosa के नाम से जाना जाता है। इसलिए आमतौर पर शिशु के जन्म के 6 घंटे के भीतर उन्हें गुनगुने पानी से ही नहलाना चाहिए।

अन्यथा, WHO द्वारा निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार शिशु को जन्म के 24 घंटे बाद तक नहलाने की कोई जरूरत नहीं है।

बल्कि, गुनगुने पानी में भिगोया हुआ एक मुलायम गीले कपडे से बच्चे के पूरे शरीर, चेहरे और सिर को साफ करना चाहिए।

अब आप सोचेंगे की, क्या बच्चे को रोजाना नहलाना चाहिए?

इसका जवाब है जी नहीं, बच्चे को रोजाना नहलाने की जरूरत नहीं है।

बल्कि, हर एक दिन छोड़के बच्चे को गर्म पानी से नहलाना काफी है।

नहलाने के लिए आपको शिशु के पूरे शरीर पर साबुन नहीं लगाना चाहिए।  लेकिन आप baby soap का इस्तेमाल सिर्फ उसके  गर्दन, और कानों के पीछे, private part और  underarms पर कर सकते है।

बच्चे के चेहरे और  शरीर के बाकी हिस्सों को साफ करने के लिए गुनगुना पानी का ही उपयोग करें।

बच्चे के निजी अंग, बगल, गर्दन और चेहरा रोजाना गुनगुने पानी में भिगोए हुए साफ कपड़े से धीरे और अच्छी तरह से साफ करना चाहिए।

बच्चे की त्वचा बहुत कोमल और संवेदनशील होती है और यह रोजाना साबुन लगाने medical research के अनुसार से आसानी से सूख सकती है।

अगर बच्चे की त्वचा को रोजाना साबुन से साफ किया जाए, तो ये बच्चे के बड़े होने पर atopic dermatitis eczema और त्वचा की एलर्जी की समस्याएँ विकसित कर सकती हैं।

नहाने के बाद बच्चे की पूरी त्वचा को अच्छी तरह से मॉइस्चराइज़ करना चाहिए।

इस  के लिए वर्जिन नारियल का तेल या जैतून का तेल सबसे अच्छा और सबसे उपयुक्त Moisturizer है।

शिशु को नहलाने के बाद उसका पूरा शरीर नारियल तेल से मालिश करना चाहिए।

इससे बच्चे को आराम मिलता है, साथ ही बच्चे को अच्छी नींद में मदद करता है।

इसके अलावा, उनकी त्वचा स्वस्थ होती है, सूखती नहीं है और eczema और fungal infection से बची रहती है।

बच्चे की त्वचा या बालों पर किसी भी प्रकार का सुगंधित लोशन, Moisturizer या तेल कभी भी नहीं लगाना चाहिए।

बच्चे को नहलाने के बाद पाउडर भी नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि पाउडर न केवल त्वचा को सुखाता है, लेकिन यह फेफड़ों में भी जा सकता है और बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है।

आजकल बहुत से लोग शिशुओं के लिए disposable diaper और नैपकिन का उपयोग करने लगे हैं।

इसलिए, कई बार, इन diapers के बहुत टाइट होने या अच्छी गुणवत्ता के नहीं होने के कारण या बार-बार न बदले जाने के कारण भी शिशुओं में डायपर रैश विकसित हो जाते हैं। इससे त्वचा लाल हो जाती है, और त्वचा पर सूजन और जलन होती है।

इसलिए disposable diaper को हर 6 घंटे में कम से कम एक बार बदलना चाहिए। और डायपर का उपयोग दिन के उजाले के दौरान कम से कम समय के लिए किया जाना चाहिए। ऐसा इसलिए, क्यों की इससे त्वचा अच्छी तरह हवादार हो और rashes से मुक्त रहे।

अगर बच्चे को diaper rash  पहले ही हो चुका है। तो प्रभावित त्वचा पर Anti Diaper Rash Cream लगाने या उस पर Caladryl Lotion लगाने से आमतौर पर इन समस्या का समाधान हो जाता है।

यदि लंबे समय तक डायपर नहीं बदले जाते हैं, तो बच्चों को नैपी क्षेत्र में समस्या हो जाती है। जो मूल रूप से एक yeast infection है।

Yeast infection के कारण होने वाला रैश गीला दिखता है और उसके ऊपर सफेद रंग की परत होती है।

इसका इलाज antifungal cream के माध्यम से किया जाता है, जैसे कि miconazole gel या Ketoconazole Cream.

इनके अलावा, शिशुओं को भी एक्जिमा होने का खतरा होता है। जिसमें त्वचा लाल और शुष्क हो जाती है और खुजली होने लगती है।

यह अक्सर शिशुओं के गालों और उनके माथे पर होता है। लेकिन eczema त्वचा के किसी भी हिस्से पर हो सकता है। अगर बच्चे को एक्जिमा है तो त्वचा पर साबुन का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं करना चाहिए।

इसके लिए दिन में 3-4 बार Cetaphil Moisturizing Cream या Aveeno Eczema Therapy Cream लगाकर चकत्तों का उपचार करना चाहिए।

बच्चों को हमेशा मुलायम सूती कपड़े पहनाएं। सिंथेटिक कपड़े बच्चों और शिशुओं की त्वचा पर खुजली और rashes पैदा कर सकते हैं।

अगर किसी बच्चे की त्वचा में खुजली होती है जिसमें उनकी उंगलियों पर जाले के बीच छोटे-छोटे दाने होते हैं। या शरीर पर कहीं और बुखार के साथ फुंसी और फोड़े निकल आए हैं। तो आपको बच्चे को तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए और इलाज करना चाहिए।

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How to Take Care of Baby’s Hair In Hindi :

अब बात करते हैं बच्चों के बालों की देखभाल के बारे में,  तो शिशु के बालों को सप्ताह में अधिकतम बेबी शैम्पू का उपयोग करके एक या दो बार साफ करना चाहिए।

कई नवजात शिशु अपने सिर पर तैलीय या शुष्क त्वचा की एक मोटी परत के साथ पैदा होते हैं।

इसे “cradle cap” के रूप में जाना जाता है। यह कोई बीमारी या विकार नहीं है। और ना ही इस cradle cap से बच्चे को किसी तरह का कोई खतरा है।

हालाँकि, कभी-कभी यह थोड़ा स्थूल दिखता है, इसलिए माताएं स्वाभाविक रूप से इससे छुटकारा पाना चाहती हैं।

इसलिए, इसे दूर करने के लिए रात में नारियल का तेल ठीक से लगा लें ताकि वह नरम हो जाए।

अगले दिन हल्का गर्म या गुनगुना पानी लें, और थोड़े से बेबी शैम्पू के साथ इस क्षेत्र को ठीक से धो लें।

सिर धोने के बाद एक मुलायम हेयर ब्रश लें और धीरे से अपने बालों में कंघी करने के लिए इसका इस्तेमाल करें।

इससे आप देखेंगे कि cradle cap की यह परत धीरे-धीरे निकल कर त्वचा ठीक होने लगती है।

जब तक सिर पूरी तरह से साफ न हो जाए तब तक आपको इस उपचार को सप्ताह में 2-3 बार दोहराना चाहिए।

तो ये थी जानकारी बच्चों की त्वचा और बालों की देखभाल कैसे करें, आशा करता हूँ, हमारे द्वारा दी गयी या जानकारी आपको अपने बच्चे  को किसी भी प्रकार की इन समस्यां को इसे जानने और पहचानने में फायदेमंद साबित होगी।

ताकि आपके बच्चे को त्वचा और बालों संबंधी समस्यां का सामना न करना पड़े।  यदि इसा लेख से संबंधी आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमैंट्स में हमें जरूर बताएं।

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Disclaimer :

इस लेख में दी गयी जानकारी सिर्फ लोगो को अवगत करने के लिए है। इसे मेडिकल सलाह के रु में न लिए जाए। इस जानकारी को अपने आप अपना इलाज करने के काम में ना लें।आपको अपनी हर बीमारी की सलाह और इलाज अपने रजिस्टर मेडिकल डॉक्टर से लेना चाहिए।

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