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बेलपत्र का आयुर्वेदिक उपाय, फायदे और उपयोग।

बेलपत्र अपने विशिष्ठ औषधीय गुणों के कारण,  वैज्ञानिकों के लिए अनुसंधान का विषय बना हुवा  है। लेकिन हमारे ऋषि – मुनियों को एक हजार वर्षों से इस के लाभों से हमें अवगत किया है।

बेलपत्र का उपयोग शिवलिंग की पूजा – पाठ आदि में होता है। भारत में कई सारे पेड़ – पौधे  हमारे धर्म से जुड़े हुए हैं। तथा धार्मिक महत्व के साथ यह कई औषधीय गुणों से भरपूर है।

बेलपत्र का उपयोग कई प्रकार की औषधि बनाने में किया जाता है। बेलपत्र भी उन्हीं में  से एक है। बेलपत्र की आयुर्वेदिक दवाइयां आपके कई रोगों के इलाज में फायदेमंद है।

इसीलिए इस लेख में, बेल पत्र की सभी विशेषताओं पर चर्चा करेंगे। तो आइए आज का हमारा विषय बेलपत्र का आयुर्वेदिक उपाय, फायदे और उपयोग शुरू करें।

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बेलपत्र क्या है? :

बेल का वानस्पतिक नाम एगल मार्मेलोस  (Aegle Marmelos) है।  अंग्रेजी में यह बेल ट्री के नाम से जाना जाता है। मात्र बेलपत्र के पेड़ अपने फल को फिर से हरा सकते हैं। आयुर्वेद के अनुसार इसका कच्चा फल अधिक लाभकारी होता है। जबकि बाकी पेड़ों के फल पकने के बाद लाभ देते है।

मगर बेल के साथ ऐसा नहीं होता यह फल पकने से पहले ज्यादा लाभ देता है। इसके बाद आधा कच्चा फल और इसके बाद पक्का फल फायदेमंद होता है। आयुर्वेद कच्चा, अधकच्चा और पका हुवा इन तीनों प्रकार के फलों का प्रयोग किया जाता है।

बेलपत्र के फायदे :

बेल का पेड़ पौष्टिक, अतिसार, रक्त अतिसार, मधुमेह, श्वेतप्रदर आदि रोगों को दूर करने में मदद करता है। बेल का फल पाचन सम्बन्धी समस्याओं, आँतों की समस्याएं  और कब्ज, बावासीर आदि समस्याओं में ती लाभकारी है।

जिन लोगों की याददाश्त कमजोर होती है, या मानसिक बीमारी में यह बहोत लाभ करता है। जोड़ों का दर्द, कमर का दर्द या फिर नर्वस सिस्टम की किसी भी प्रकार की समस्यां को दूर करने में यह अति उत्तम लाभ प्रदान करता है।

बेलपत्र की तासीर :

आयुर्वेद के अनुसार बेलपत्र के पौधा की तासीर गर्म होती है। लेकिन बेलपत्र का उपयोग कई प्रकार की शारीरक समस्यां जैसे अतिसार, पतले दस्त, पेचिस की समस्यां, मरोड़, संग्रहणी, प्रवाहिका आदि में अमृत समान बहोत गुणकारी लाभ प्रदान करता है।

बेलपत्र के घरेलू उपाय स्त्री, पुरुष, बच्चे, बूढ़े सभी प्रकार के लोग कर सकते है। और यह सभी को समान रुप से लाभ पहुंचाता है। आईये जानते है इसके बहोत ही लाभकारी प्रयोग।

बेलपत्र का आयुर्वेदिक उपाय और उपयोग  :

१) शारीरिक कमजोरी में बेलपत्र और दूध के फायदे :

बेल का फल बहोत ही पौष्टिक होता है। इसके फलों को सुखाकर  चूर्ण बनाकर रख लें। इस चूर्ण को मिश्री मिलाकर दूध के साथ रोजाना सुबह – शाम सेवन करने से खून की कमी, कमजोरी, वीर्य की कमजोरी, थकान, मानसिक थकावट आदि समस्याएं दूर होती है।

२) धातु विकार में बेलपत्र और शहद के फायदे :

बेलपत्र के पत्ते धातु विकार को दूर कर धातु को पुष्ट करते है। बेल के पत्तों का चूर्ण २ से ३ ग्राम मात्रा में शहद के साथ मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से धातु से जुड़े रोगों में बहोत लाभ करते है।

३) शारीरिक शक्ति बढ़ाने में बेलपत्र के रस के फायदे :

बेलपत्र के पत्तों का रस २० ऍम अल ५ ग्राम जीरा, २० ग्राम मिश्री और १०० ऍम अल दूध सभी को मिलाकर छानकर रोज सुबह खाली पेट सेवन करने से सभी प्रकार की कमजोरी दूर होती है और शरीर में शक्ति का संचार होता है।

४) शारीरक शक्ति बढ़ाए बेलपत्र चूर्ण के फायदे :

बेल का चूर्ण, अश्वगंधा और मिश्री तीनों को मिलाकर दूध के साथ २ से ५ ग्राम सेवन करने से दुबला पतला शरीर मज़बूत होता है। यह प्रयोग कमजोर शरीर को मजबूत बनाने में अत्यंत लाभकारी है। इस सम्बन्धी दूसरे प्रयोग के लिए  बेलगिरी के चूर्ण को ऐसे भी दूध में मिलाकर सेवन किया जाता है।

५) पेट सम्बन्धी रोगों में बेल का उपयोग :

बेल पेट संबंधी रोगों में रामबाण औषधि का काम करता है। भूख न लगने पर, मरोड़ पर और पेट संबंधी किसी भी प्रकार की समस्यां में छोटी पीपल, वंश लोशन, बेलगिरी चूर्ण सभी को समान मात्रा में मिलाकर अदरक मिलाकर गुनगुना करके चटनी की तरह दिन में २ से ३ बार सेवन करने से पेट सम्बन्धी सभी समस्याओं से मुक्ति मिला जाती है।

६) संग्रहणी रोग में बेल का उपयोग :

संग्रहणी  रोग पेट के रोगों में सबसे कष्टदायक  माना जाता है। यह रोग होने पे पीड़ित रोगी की  स्थिति बहोत ही कमजोर हो जाती है। इस रोग में पेट में कुछ भी टिकता नहीं। इससे पाचन शक्ति बहोत ही कमजोर हो जाती है। इस रोग में खाया, पिया कुछ भी शरीर को नहीं लगता। इससे हजम करने की शक्ति नष्ट हो जाती है और शरीर धीरे धीरे कमजोर होने लगता है।

इस प्रयोग को करने के लिए बेलपत्र चूर्ण, पुराना गुड़, सौंठ चूर्ण तीनों को सामान मात्रा में मिलाकर अच्छी तरह  घोंट कर छाछ के साथ २ से ४ ग्राम की मात्रा में दिन में २ से ३ बार सेवन करने से संग्रहणी रोग ठीक होता है।

इस प्रयोग को करने से पेट सम्बन्धी अन्य रोगों में भी फायदा होता है। कच्चे बेलपत्र को आग में सेक कर सेवन करने से भी संग्रहणी रोग ठीक होता है।

७) अतिसार में बेल का उपयोग :

पेचिस, दस्त, डायरिया में बेलपत्र, धनिआ और मिश्री मिलाकर बनाया हुवा शरबत का सेवन करना अतिसार की समस्यां में अत्यंत फायदेमंद होता है।

बेल का शरबत बवासीर, कब्ज, आँतों  की सूजन में भी बहुत फायदेमंद और पौष्टिक होता है।

८) बेलपत्र से शुगर का इलाज :

बेलपत्र मधुमेह के रोगिओं के लिए भी बहुत फायदेमंद औषधि  है। इसका सही तरीके से प्रयोग करने से शुगर के इलाज में बहोत लाभ होता है। इस प्रयोग को करने से लिए १० से २० ग्राम की मात्रा में बेलपत्र के पत्तों को लेकर उसमें ५ से ६ काली मिर्च मिलाकर पीसकर सुबह शाम सेवन करने से मधुमेह में बहोत लाभ होता है।

इसके अलावा बेलपत्र का जूस निकाल कर  सुबह खाली पेट १० ग्राम की मात्रा  सेवन करने से भी फायदा होता है।

९) शरीर की दुर्गन्ध दूर करें बेलपत्र का रस :

शरीर में दुर्गन्ध आने पर बेलपत्र के पत्तों का प्रयोग किया जाता है। इस प्रयोग के लिए बेलपत्र के रस पानी में मिलाकर स्नान करने से शरीर से आनेवाली पसीने की दुर्गन्ध कम होती है।

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बेल हमारे देश का सबसे उपयोगी औषधीय पेड़ है। इसके और भी कई सारे लाभ और उपयोग हमारे आयुर्वेद में बताये है। मुझे उम्मीद है आपको बेलपत्र के विषय में अच्छी और उपयोगी जानकारी मिली होगी।

आपको इस लेख के बारें में कोई जानकरी या फिर कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमैंट्स में हमें जरूर बताएं। आशा करता हूँ बेलपत्र का आयुर्वेदिक उपाय, फायदे और उपयोग लेख आपको अच्छा लगा होगा। तो कृपया इसे अपने दोस्तों तथा रिश्तेदारों के साथ अन्य शोशियल मीडिया FacebookInstagram और Whatsapp पर शेयर करें।

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