बरगद के आयुर्वेदिक उपयोग।

बरगद  भारत का राष्ट्रीय वृक्ष हे तथा पेड़ों में यह राजा है। भारत में बरगद के पेड़ को  बट, बड़, वड आदि नाम से जाना पहचाना जाता है।
धार्मिक महत्तव के कारण लोग बरगद के पेड़ की  पूजा भी करते है। बरगद की जितनी भी प्रसंशा की जाये कम है। क्योंकि धार्मिक महत्त्व के साथ साथ बरगद के आयुर्वेदिक औषधीय उपयोग हे।
संसार में यह अध्भुत वृक्ष के नाम से भी जाना जाता है। बरगद हमारी धरती पर सबसे ज्यादा ज़िंदा रहने वाला वृक्ष है। हज़ारों वर्षो पुराने बरगद के पेड़ आज भी धरती पर देखे जा सकतें है।
क्या आप जानते है पूजा के अलावा बरगद का उपयोग कई रोगों क दूर करने और कई रोगों के इलाज में भी किया जाता है। यदि आप नहीं जानते तो यह लेख आपको पूरा पढ़ना चाहिए।
आज केबरगद के आयुर्वेदिक उपयोग विषय को पढ़ने के बाद आपको  काफी कुछ ऐसा जांनने को मिलेगा जो आज तक आपको जानने को नहीं मिला।  और यह जानकारी आपके लिए बहोत फायदेमंद हो सकती है। तो चलिए बिना देरी किये बरगद के आयुर्वेदिक उपयोग  विषय शुरू करते है।
बरगद के पत्ते और फल : 
बरगद के आयुर्वेदिक उपयोग
बरगद के फल : Banyan Fruit 
 
बरगद के आयुर्वेदिक उपयोग

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क्या हे बरगद :

 
बरगद एक ऐसा पेड़ है जो अपने आकार और अपने गुणों की तरह विशाल है। बरगद संसार में  एक ही  ऐसा विशाल काय पेड़ है इसकी शाखाओं से जड़ें  निकलती है, और जमीन के अंदर जाकर फिर से एक तने का रुप ले लेती है।
बरगद के पत्तों का रंग हरा और आकर में अंडाकार होता है  तथा यह ऊपर से चमकीला होता  है। इसके  पत्ते टूटने के पहले पूरी तरह से पक कर पिले रंग के हो जाते है।
बरगद के फल छोटे सुपारी जितने और लाल रंग के होते है। इन फलों का भी आयुर्वेदिक औषधि में ख़ास महत्व है।
बरगद के पेड़ की छाल का रंग लाल और अंदर से पीला होता है। बरगद  के पेड़ की सबसे बड़ी खासियत और पहचान यह हे की इसको आप कहीं से भी काटिये इसके अंदर से सफ़ेद रंग का दूध निकलता है।
यह दूध थोड़ी देर रखने के बाद हल्का लाल रंग का तथा चिपचिपा और गाढ़ा हो जाता है। यह दूध भी आयुर्वेदिक औषधियों का खजाना  है, इसलिए सभी वृक्षों में बरगद का वृक्ष खास माना जाता है।
बरगद की जटाएं  :
 
बरगद क्यों हे ख़ास जान लो इसका महत्त्व-फायदे-गुण और उपयोग के बारें में

बरगद के  फायदे और औषधीय गुण :

बरगद के वृक्ष का हर एक हिस्सा कसेला, शीतल, मधुर और आँतों का संकोचन करनेवाला होता है। यह पित्त के साथ साथ कफ तथा व्रणों को भी नष्ट करता है। बरगद योनिदोध ,ज्वर, वमन, मूर्च्छा और विसर्प में भी गुणकारी होता है। बरगद के फूल और पत्ते कफ नाशक होते है। इसकी छाल स्तंभक होती है।
  • दांत ख़राब हो जाने पर बरगद के दूध का फोया रखने से दांत की परेशानी दूर होती है।
  • कमर के दर्द और संधियों के सूजन पर इसके दूध का लेप करने से फायदा होता है।
  • बरगद का दूध चोट और मोच पर लगाने  से फायदा होता है और दर्द जल्दी ठीक होता है।
  • गठिया की सूजन पर बरगद के दूध का लेप  करने से सूजन बहोत ही जल्दी कम होने लगती है।
  • बरगद के पत्तों का पेस्ट बनाकर फोड़ों के ऊपर बाँधने से फोड़े जल्दी पकते है।
  • वीर्य की कमजोरी के लिए इसके पत्तों के रस को गाढ़ा उसमें पौष्टिक औषधियों को मिलाकर खानेसे वीर्य की कमजोरी और मूत्र की समस्या समाप्त होती है।
  • रक्तप्रदर, खुनी बवासीर इत्यादि में रक्त का बहना न रुकने पर बरगद की ५ से ७ बुँदे दिन में ३ से ४ बार लेने से रक्त का बहना बंद हो जाता है और आराम मिलता है।
  • बरगद कमर का दर्द मसूड़ों का रोग, वमन,  आग से  जलना, उपदंश, रक्त पित्त अतिसार जैसे रोगों को ठीक करने में बहोत ही कारगर माना जाता है।
बरगद के और भी कई सारे औषधीय उपयोग है, जिससे आप अपनी शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति को कई गुना तक बढ़ा सकते है।
तो आईये जानते है, बरगद के कुछ आसान घरेलु औषधीय, उपयोग जिसकी मदद से आप स्वस्थ को बेहतर और शक्ति वर्धक बना सकते है।

बरगद के औषधीय उपयोग :benefits of Banyan tree

बरगद के फल, फूल, पत्ते और जटाओं का औषधीय प्रयोग किया जाता है। इसका उपयोग नेत्र रोग, केश विकार, दांतों और  गले के रोग, कान  के रोग हृदय विकार, पाइल्स, डाइबिटीज़, चर्म रोग, कमजोरी जैसे रोगों में  बहोत लाभकारी हे।

शारीरक शक्ति बढ़ाये बरगद के फायदे :

१)   शारीरिक शक्ति बढ़ने के लिए बरगद के पके हुवे लाल फल को इसमें मौजूद बारीक़ बीज के साथ लेकर सूखा कर इसका बारीक़ चूर्ण बना लें।
इस चूर्ण में  सामान मात्रा में पीसी हुवी मिश्री मिलाकर सुबह शाम ३ से ४ ग्राम की मात्रा का दूध के साथ सेवन करने से शरीर की कमजोरी दूर होगी। यह प्रयोग शारीरक और मानसिक शक्ति के साथ आपकी यौन शक्ति को भी बढ़ाता है। यह प्रयोग बहोत शक्ति वर्धक है और यह प्रयोग हर कोई कर सकता है।
२)  शारीरिक शक्ति बढ़ने के लिए आप बरगद और पीपल के फल इन दोनों को समान मात्रा में सूखा कर इसका चूर्ण बना लें और इस चूर्ण को देसी घी में सेक कर सुबह शाम गाय के गुनगुने दूध के साथ सेवन करें। यह प्रयोग भी आपकी  शारीरक दुर्बलता को दूर करता है।
३)  शारीरिक शक्ति बढ़ाने  के लिए यह प्रयोग बहोत ही फायदेमंद हे, इस प्रयोग करने के लिए सुबह उठकर बरगद के पेड़ की २ बुँदे १ बताशे पर लगाकर इसका सेवन करें। बताशे की मात्रा को अपने पाचन प्रणाली के हिसाब से कम या ज्यादा कर सकते हो। इस दूध के अंदर बहोत सारे शक्ति वर्धक रासायनिक गूण पाए जाते है।
यह प्रयोग आपकी शारीरिक, मानसिक और यौन शक्ति को बढ़ाने के साथ साथ आपकी कमजोरी, वीर्य का पतलापन, धातु रोग, वीर्य का नाश होने से आयी कमजोरी दूर करता है।
इसके अलावा बरगद के और भी कई सारे फायदे तथा औषधीय प्रयोग है।  बरगद के पत्ते, छाल, फल, जड़, तना सभी का आयुर्वेदिक औषधि में उपयोग किया जाता है। इसीलिए बरगद के आयुर्वेदिक उपयोग की बात जितनी करें उतनी कम होगी।
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आशा करता हूं बरगद के आयुर्वेदिक उपयोग लेख  से आपको बहुत कुछ जानने मिला होगा अतः यह जानकारी आपको कभी न कभी न कभी उपयोगी होगी
बरगद के पेड़ से संबंधित  आपके आस किसी प्रकार की जानकारी हो तथा इस लेख से संबंधित आपके मन में कोई सवाल या सुझाव हो तो कमैंट्स के माध्यम से हमें जरूर बताएं।
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