खैर पेड़ (खदिर ) की जानकारी, लाभ और औषधीय उपयोग।

खैर पेड़ (खदिर ) की जानकारी, लाभ और औषधीय उपयोग।


खैर पेड़ की जानकारी, लाभ और औषधीय उपयोग। 


आप सभी ने पान तो कभी न कभी खाया ही है और कईओं तो को पान खाने की आदत ही होती है। परंतु पान बनाने में लगने वाली वस्तुएं की जानकारी सभी को नहीं होती। 

वैसे ही पान बनाने में ख़ास कर कत्था का उपयोग किया जाता है। परतु कत्था क्या है और इसकी जानकारी आपको न हो।तो  क्या आप जानते है कत्था हमें खैर के पेड़ से प्राप्त होता है। 

खैर के औषधीय गुणों का उपयोग कर कई प्रकार के रोगों को भी दूर किया जा सकता है। खैर का पेड़ प्रचिलित न होने के कारण इसके लाभों से सभी अनजान है। इसकी लकड़ी का प्रयोग यज्ञ तथा हवन सामग्री में उपयोग लायी जानेवाली कुछ लकड़ियों में से एक है। 

इसलिए आज के इस लेख में हमें कत्था प्रदान करने वाले खैर पेड़ (खदिर ) की जानकारी के विषय में विस्तार से जानेंगे। साथ ही खैर के पेड़ के लाभ और इसके औषधीय उपयोग के बारें में भी जानेंगे। तो चलिए आज का लेख बिना किसी देरी के शुरू करते है। 

और जानिए >>

खैर पेड़ की पहचान और जानकारी। 

खैर का वैज्ञानिक नाम Acacia catechu है। इसे खदिर  के नाम से भी जाना जाता है। यख सम्पूर्ण भारत में पाया जाने वाला पेड़ है। ख़ास कर यह  भारत, पाकिस्तान, नेपाल, चीन, श्री लंका, भूटान, म्यांमार आदि देशों में पाया जाता है। 

खैर एक जंगली प्रजाति का पेड़ है। कुछ कुछ इसे बबूल की प्रजाति के पेड़ कह सकते है। खैर का पेड़ की ऊंचाई लगभग १५ से २० फिट तक होती है।  इसे पूर्ण व्यस्क होने के लिए ३५ से ४० वर्ष का समय लगता है। इसकी लकड़ी मजबूत किस्म की होती है। 

खैर के पेड़ को अधिक पानी की  के कारण  ज़मींन पर पाया जाता है। इसके व्यस्क पेड़ में से लगभग  १५ क्विन्टल तक लकड़ी प्राप्त  होती है। इस लकड़ी की कीमत की बात करें तो यह ५ से ६ हजार रूपये क्विन्टल  के भाव बिकती है। 

इसकी पत्तियां हरे रंग की दिखने में इमली की पत्तियों की तरह परंतु आकार में छोटी होती है। खैर के फूल वर्षा ऋतू में लगते है दिखने इसके फूल हलके परले व सफ़ेद रंग के २ से ३ इंच तक के होते है। 

खैर के  फलियों की बात करें तो यह २ से ५ इंच लम्बे आकार की पतली होती है। इसका आकार आगे से गोल होता है। इन फलियों में ५ से ८ तक बीज होते है। यह फलियों का उपयोग कई रोगों के इलाज हेतु उत्तम औषधि  के रूप में किया जाता है। 

खैर की लकड़ी भूरे रंग की आधा इंच मोटी और बहोत उपयोगी होती है। इसकी लकड़ी से कत्था और कई तरह के लकड़ी के खेती के औज़ार बनाये जाते है। 

कुछ अन्य पेड़ों की तरह खैर क्र पेड़ से भी हमें गोंद प्राप्त होता है जो बहोत ही उपयोगी होता है। अधिकतर गाओं में खैर की छाल और गोंद का उपयोग औषधि बनाने में तथा घरेलु उपचार में भी किया जाता है। 

कत्था कैसे बनता है। 

खैर के पेड़ की लकड़ी तथा शाखाओं को पानी में उबालकर कत्था पप्राप्त होता है। 

खैर के लाभ और औषधीय उपयोग :

खैर की तासीर ठंडी होती है इस कारण यह भूख लगने तथा खाना पचाने में बहोत फायदेमंद है। इससे दांत  मजबूत होते ही है साथ ही यह शारीरिक बल की बढ़ोतरी करने में भी बहोत लाभकारी है। पेट दर्द में भी इसका सेवन बहोत फ़ायदेमंद होता है। 

तो आईये जानते है किन किन बीमारियों में किस तरह  खैर का उपयोग किया जा सकता है। 

फोड़े फुंसियों में खैर का उपयोग :

फोड़े तथा फुंसी की समस्यां होने पर इसकी छाल को प्रभावित स्थान पर लगाने से  समस्यां में  लाभ होता है। 

दांतों में लाभ कारी खैर का उपयोग :

दांत खाराब होने पर या मसूड़ों से खून आने पर इसकी  पत्तियों से दांतो नियमित सफाई करने पर  फायदा होता है।

कुष्ठ रोग में दूर करें खैर का प्रयोग :

कुष्ठ रोग में इसके कत्थे  पानी में  डालकर नहाने से लाभ होता है। 

अतिसार दूर करें कत्था का सेवन :

अतिसार की  परेशानी होने पर इसके कत्थे का चूर्ण बनाकर ३ से ४ दिन सेवन करने से इस समस्यां में आराम  मिलता है। 

कान समबन्धित परेशानी दूर करें कत्था का यह प्रयोग :

यदि कान से सम्बंधित  समस्यां हुवी हो तो इसके कत्थे को  उबालकर  ठंडा  करके कान में डालने से इस के सम्बंधित  परेशानी दूर होती है। 

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खैर एक उपयोगी तथा औषधीय पेड़ है। हम सभी हमारी रोजिंदा ज़िंदगी में इसका उपयोग करते है। मगर इसके फायदों और इसकी पहचान से अंजान है। 

इस लेख में मैनें आपको आसान शब्दों में खैर की जानकारी के साथ इसके लाभ और औषधीय गुणों की जानकारी देने की कोशिश की है। 

मुझे उम्मीद है आज का यह लेख खैर पेड़ (खदिर) की जानकारी, लाभ और औषधीय उपयोग से आपको बहोत कुछ जानने मिला होगा। 

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