नागरमोथा जड़ी बूटी  बचाएं हजारों रोगों से

नागरमोथा जड़ी बूटी  बचाएं हजारों रोगों से। 

नागरमोथा जड़ी बूटी कोई आम औषधि नहीं बल्कि यूँ कहे तो हमारे लिए किसी वरदान से कम भी नहीं । आपने शायद ही इस नाम को सुना हो, या फिर इसे देखा हो। परंतु नागरमोथा के औषधीय गुण  हमारे कई  प्रकार की शारीरिक समस्यां को दूर करने  में उपयोगी है। हमारी  धरती की कई प्रकार की औषधियों में से एक यह दिव्य जड़ी बूटी हमारी धरती ने हमें दी है। इस जड़ी बूटी में हजारों बिमारियों को ठीक करने की क्षमता है। 

नागरमोथा आसानी से हमारे आस - पास  ही उपलब्ध होने वाली औषधि है। मगर इस चमत्कारिक औषधि के फायदों  से हर कोई परिचित नहीं है। नागरमोथा एक ऐसी वनस्पति है, जिसके बारे में बहुत ही कम लोग जानते हैं, इसी कारण इस लेख के माध्यम से में आप सभी को नागरमोथा की पहचान के साथ - साथ इस दिव्य औषधि के लाभ और फायदों के बारें में जानकारी दूंगा। यह उपयोगी जानकारी आपको हमेंशा काम आएगी। तो चलिए शुरू करते है हमारा आज का विषय नागरमोथा जड़ी बूटी के बारें में। 

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नागरमोथा की पहचान :

नागरमोथा वैज्ञानिक नाम Cyperus scariosus है। नागरमोथा  एक तरह की मोथा जाति की वनस्पति है। यह कई प्रकार की पाए जाती है। जैसे कि मोथा, नागर मोथा केप्टिव मोथा  जैसी इस मोथा की प्रजातियां होती हैं। 

नागरमोथा ख़ास कर पानी वाली जगह पर, तालाब के किनारे, नदियों के पास और जहाँ पानी बहुत ही अधिक देखने को मिलता है और जहां पानी भरा होता है वहां पायी  जाती है। नागरमोथा को आप साल भर देख सकते हैं। 

नागरमोथा का पौधा कैसा होता है ?

नागरमोथा के पत्ते पतले और बड़े आकर के होते हैं। इस पत्तों  पर  फूल लगते है। नागरमोथा के फूल जुलाई में आते हैं और इस पर फल साल के अंत तक आते हैं। यदि इसके तने बात करें तो यह सीधे आकर का और लंबा होता है। नागरमोथा पौधे की सबसे खास पहचान इसके तने से आसानी से होती है। क्योंकि इसके तने त्रिकोने आकर के और हरे रंग के होते हैं। जिससे आप इस नागरमोथा को पहचान सकते हैं। 

नागरमोथा का पौधा बहते हुए पानी में भी लग जाते हैं। इसकी जड़ में छोटे आकर के कंद  निकलते हैं। नागरमोथा के पौधे गुच्छों में लगते हैं। इसकी जड़ गहरे भूरे रंग की होती है। 

नागरमोथा की जड़ के अंदर काफी सारे छोटे छोटे कंद होते हैं यह कंद इसकी जड़ों से चिपके रहते हैं। यह  कंद  अंदर से सफेद रंग की होते हैं। नागरमोथा के इन ही कंदो का अधिकतर औषधीय प्रयोग किया जाता है। 

इस नेता को भी अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग नाम से जाना जाता है

नागरमोथा के फायदे :

नागरमोथा के फायदें आपको विभिन्न रोगों से दूर रख सकते हैं। इसके उपयोग से सभी प्रकार के मूत्र विकार, कमजोरी, खून की कमी, रक्त की खराबी, चर्म रोग, कुष्ठ रोग, अतिसार, खूनी दस्त, पेट के समस्त प्रकार के रोग, हृदय संबंधी विकार, मिर्गी, मानसिक विकार, डेंगू, मलेरिया, टाइफाइड बुखार, महिलाओं में मासिक संबंधी विकार, जोड़ों का दर्द, गले का दर्द ,खांसी, पीलिया, हैजा जैसी अनेक बीमारियों को इसके द्वारा दूर किया जा सकता है।  

नागरमोथा के उपयोग :

भूख में नागरमोथा का उपयोग :

भूख ना लगने की समस्यां होने पर इस नागरमोथा के काढ़े  का सुबह-शाम सेवन करने से भूख ना लगने की परेशानी दूर होती है और भूख खुलकर लगती है। इसके नियमित उपयोग से पाचन शक्ति बेहतर होती है। 

पेट में कीड़े की परेशानी नागरमोथा का उपयोग :

बच्चों को और बड़ों को पेट में कीड़े की समस्यां होने पर नागर मोथा के चूर्ण को शहद में मिलाकर चाटने भर से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं। यह एक अद्भुत प्रयोग है। 

नागर मोथा पाचन संबंधित सभी प्रकार के विकारों को दूर करने की उत्तम दवा है। नागरमोथा के पंचांग के साथ  सोंठ के चूर्ण को गर्म पानी के साथ लेने से आम दोष का पाचन हो जाता है। 

अतिसार में नागरमोथा का उपयोग :

नागरमोथा का उपयोग अतिसार रोग में भी बहोत लाभकारी होता है। सुबह - शाम नागरमोथा का काढ़ा बनाकर सेवन करने से सभी प्रकार के अतिसार ठीक हो जाते हैं।  पेट में अपच और गैस की समस्या को दूर करने के लिए नागरमोथा को अदरक और शहद के साथ सेवन करने से इन समस्याओं से तुरंत छुटकारा मिलता है। 

पीलिया रोग में नागरमोथा का उपयोग :

पीलिया रोग दूर करने के लिए लगभग ४  से ५  ग्राम नागरमोथा के चूर्ण में १००  मिलीग्राम लोह भस्म में मिलाकर काढ़े के साथ सेवन करने से पीलिया रोग ठीक हो जाता है। 

कमजोरी में नागरमोथा का उपयोग :

नागरमोथा का उपयोग कमजोरी दूर करता है और यह खून को भी साफ करता है। कमजोरी दूर करने के लिए सोंठ, नागरमोथा, गिलोय, हल्दी और धमाका इन सभी का पेस्ट बनाकर १५ से २० ml की मात्रा में पीपल का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से कमजोरी दूर होती है और इस प्रयोग से  सभी प्रकार के बुखार भी  ठीक होते हैं। 

घांव में नागरमोथा का उपयोग :

नागरमोथा के कंदो को पीसकर घी मिलाकर यदि  घांव पर लेप किया जाए तो घाव जल्दी भरने लगते हैं। इससे इससे सूजन और दर्द दोनों में फायदा होता है। 

मासिक संबंधी परेशानी में नागरमोथा का उपयोग :

मासिक संबंधी विकारों को दूर करने के लिए नागरमोथा के आधा ग्राम चूर्ण में गुड़ मिलाकर सुबह-शाम नियमित सेवन करने से मासिक संबंधी विकार ठीक हो जाते हैं। 

नागरमोथा की जड़ का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम पीने से भी मासिक संबंधी विकार जैसे कि लिकोरिया सफेद पानी अत्यधिक रक्त शुरुआत आदि समस्याएं दूर होती है। 

मिर्गी की समस्यां में नागरमोथा का उपयोग :

मिर्गी का दौरा की समस्यां होने पर  नागर मोथा की जड़ का काढ़ा बनाकर सेवन करने से  मिर्गी रोग में लाभ मिलता है। 

बुखार में नागरमोथा का उपयोग :

बुखार दूर करने के लिए नागरमोथा में सोंठ, गिलोय, आमला, तमाशा, छोटी कटेरी, नीम की छाल, तथा भृंगराज को समान मात्रा में लेकर उसका काढ़ा बनाकर १५  से २० एमएम की मात्रा में शहद मिलाकर पिलाने से सभी प्रकार के बुखार टाइफाइड मलेरिया आदि ठीक होते हैं। 

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दस्त में नागरमोथा का उपयोग :

अतिसार और खुनी दस्त उसमें भी नागरमोथा का प्रयोग किया जाता है। नागर मोथा की तासीर ठंडी होती है। इसलिए खूनी बवासीर में यह बहुत ही लाभकारी होता है, इसका सेवन  पाचन शक्ति को बढ़ाता है। 

बवासीर की  समस्यां को दूर करने के लिए नागरमोथा  काढ़ा बनाकर प्रयोग किया जा सकता है और इसका चूर्ण का भी सेवन  किया जा सकता है। 

शारीरिक शक्ति में नागरमोथा का उपयोग :

अत्यधिक दुबले-पतले और कमजोर व्यक्ति   नागरमोथा का प्रयोग करके अपनी शारीरिक शक्ति को बढ़ा सकते हैं। इसका उपयोग खून कमी को दूर करता है और पाचन शक्ति को भी मजबूत करता है। यह हमारी हड्डियों और मांसपेशियों को ताकत देता है। नागरमोथा के चूर्ण में शतावरी का चूर्ण मिलाकर गाय के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करने से आप देखेंगे कि आपको आश्चर्यजनक लाभ होंगे। 

बिच्छू के काटने पर नागरमोथा का उपयोग :

बिच्छू काट लेने पर नागरमोथा के कंद को घिसकर काटे हुए स्थान पर लेप करने से  बिच्छू का काटा ठीक हो जाता है। इससे  दर्द और सूजन में तुरंत आराम मिलता है। 

या फिर बिच्छू काटने पर सरसों का तेल नागर मोथा और देवदार और भांग का चूर्ण इन सभी को मक्खन में मिलाकर पेस्ट बनाकर  लेप करने से भी बिच्छू का जहर उतर जाता है। 

जोड़ों के दर्द में नागरमोथा का उपयोग :

जोड़ों और घुटनों में दर्द होने पर इस नागरमोथा के चूर्ण को १ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम शहद में मिलाकर चाटने से आपको आश्चर्यजनक लाभ मिलेंगे। 

बुखार में नागरमोथा का उपयोग :

बुखार होने पर नागरमोथा  और गिलोय को समान मात्रा में लेकर २  से ३  ग्राम की  मात्रा को  गुनगुने पानी के साथ सेवन करने से सभी तरह के बुखार ठीक हो जाते हैं। 

खून में नागरमोथा का उपयोग :

नागरमोथा में कैल्शियम और आयरन जैसे तत्व पाए जाते हैं, जो खून को तेजी से बढ़ाते हैं। इस कारण इसका सेवन करने से खून की कमी दूर होती है। 

आँखों में नागरमोथा का उपयोग :

आंखों के सभी प्रकार के रोग दूर करने के लिए  नागर मोथा के कंद को बकरी के दूध के साथ घिसकर आंखों में अंजन करने से आंखों के रोग जैसे की आंखों में खुजली, आंखों में लाली आना, आंखों में जलन, जैसी समस्या ठीक हो जाती है। 

खांसी और दमा  में नागरमोथा का उपयोग :

खांसी, दमा तथा स्वास्थ संबंधी रोगों में नागरमोथा उत्तम कार्य करता है। इसको अडूसा, सौंठ, भारंगी, चिरायता तथा नीम की छाल के साथ मिलाकर पेस्ट बनाकर सेवन करना चाहिए। तो आपको आश्चर्यजनक लाभ  मिलेंगे। 

तो देखा आपने इस नागर मोथा के कितने सारे फायदे हैं। मैनें इस लेख में नागरमोथा जड़ी बूटी बे बारें में विस्तार से उपयोगी जानकारी दी हे। मुझे उम्मीद है आपको वह लेख जो नागरमोथा जड़ी बूटी  बचाएं हजारों रोगों से विषय अच्छा लगा होगा। 

यदि आपका कुछ सवाल  या सुझाव नागरमोथा के बारें में हो तो निचे कमैंट्स में पूछ सकते हो। अवश्य ही में आपके सवाल का जवाब देने की कोशिश करूँगा। 

यदि आपको यह लेख से कुछ जानने और सिखने  मिला हो और यह जानकारी अच्छी लगी हो, तो इसे दूसरों के साथ social media जैसे Facebook और Whatsapp पर जरूर share करें। ऐसी ही हमारी धरती की उपयोगी वन्सपति के बारें में और जानने के लिए Main Page पर जाएँ।