कोसों दूर रहें दूब ( दूर्वा ) घास से बीमारियां।


कोसों दूर रहें दूब ( दूर्वा ) घास से बीमारियां। 

दूब घास को ( दूर्वा ) के नाम से भी जाना जाता है। यह नाम को सुनते ही गणेश जी की मूर्ति ध्यान में आती है। क्यों की सभी जानते है, भगवान  गणेश जी  की पूजा में मुख्य : त दूर्वा ( दूब घास ) का प्रयोग किया जाता है। मगर क्या आप जानते है। यह साधारण दिखने वाली दुब घास के और भी कई फायदें है। 

यह साधारण सी दिखने वाली दूब घास बाजार में मिलने वाली किसी  महेंगी  दवाओं से कम नहीं। यह आप जरूर जानते नहीं होंगे। क्यों की दूर्वा घास के औषधीय गुण से हर कोई अनजान है। दूर्वा घास का उपयोग से हम हमारी कई बिमारियों से छुटकारा पा सकते है। 

मगर रुको-रुको क्या आपको इस दूब घास की जानकारी है। क्या आप जानते है दूब घास का महत्व क्या है। यदि नहीं तो इस लेख को ज़रूर पढ़ें। इस लेख को पढ़ने के बाद इस साधारण दिखने वाली  दूब घास के प्रति आपके मन में उठे कई सवाल शांत हो जायेंगे। 

इसी के साथ आपके मन में इस दूब ( दूर्वा ) घास के प्रति एक आकर्षण पैदा होगा। तो फिर देरी किस बात की चलिए शुरू करते है, हमारा आज का विषय कोसों दूर रहें दूब ( दूर्वा ) घास से बीमारियां। 

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दूब (दूर्वा ) घास की पहचान :

(दूर्वा ) दूब घास का वानस्पतिक नाम Cynodon dactylon है। यह भारतवर्ष में सभी स्थानों पर पायी जाती है। देखा जाये तो हर व्यक्ति इसको जानता और  पहचानता है। इसे आप  पुरे साल भर तक देख सकते हैं। पानी ना मिलने पर यह घास सूख जाती हैं। मगर जैसे ही इसे पानी मिलता है, इसमें फिर से जान आने लगती है और यह बढ़ने और पनपने लगती है। 

वर्षा ऋतू  में तो यह लगभग हर जगह उपलब्ध हो जाती है। दूब घास की भी कई प्रजातियां देखि जाती है। इनमें से कई प्रजाति जमीं पर बढ़ती हुवी देखि जाती है। कुछ प्रजातियां सीधे तने वाली होती है। मगर इन सभी दूर्वा घास के औषधीय गुण एक सामान ही होते है। इसी लिए आप किसी भी (दूब) दूर्वा घास का उपयोग  औषधि के रूप में कर सकतें है। 

इस दूब (दूर्वा ) घास फल छोटे-छोटे दानों के रूप में होते हैं। यह दानें  आसानी  से  दिखाई नहींदेते हैं। इसके फूल भी बहुत ही छोटे छोटे होते हैं यह दूब (दूर्वा ) घास जुलाई से लेकर जनवरी तक फलती और  फूलती है। इसका रंग कहीं  पर नीला पर लिए हुए, कहीं पर हरी और कहीं पर सफेद नजर आती है। विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग -  से जाना जाता है। जैसे की। ... 

दूब (दूर्वा ) घास के अन्य भाषाओँ में नाम :

हिंदी - हरी दूब, नीली दूब, रामघास, दूब, दूर्वा;

English - Devil”s grass,Dub grass, Couch Grass, Florida grass, Indian doob grass

गुजराती -   दरोहि

मराठी - नीलीदूर्वा, हरियाली

बंगाली - नीलदुर्बा, दुर्बा

नेपाली - दुबो

पंजाबी - दूबड़ा

उर्दू - दूब

ओरिआ - फैइतुलनिम, दूबोघास

कन्नड़ - कुडीगरकाई, गरिके

तमिल - अरुवमपिल्लु

तेलुगु - दूलु, गरीकगडडी

दूर्वा घास के पत्ते पतले  होते हैं। इसे उखाड़ने पर सफ़ेद रंग की  जड़ देखि जाती  है। हम्मारी धरती पर यह दूर्वा घास  भरपूर मात्रा में उपलब्ध होने के कारण हर व्यक्ति इस दूर्वा घास के गुण का आसानी से उपयोग कर सकता है और विभिन्न रोगों को दूर कर सकता है। 

दूब (दूर्वा) घास का महत्व :

हिंदू धर्म में दूब (दूर्वा) घास को विशेष महत्त्व दिया गया है, हिन्दू धर्म में इसे  बहोत ही शुभ माना जाता है। इसलिए  इसका अधिकतर प्रयोग विशेष रूप से  पूजा - पाठ में भी  किया जाता है। ख़ास कर हिन्दू देवी देवताओं में और ख़ास कर गणेशजी की पूजा -अर्चना में विशेष रूप से इसका उपयोग किया जाता है। 

दूब (दूर्वा) घास के फायदे :

देखा जाए तो यह  दूब घास साधारण न होकर अति उपयोगी औषधि है। घरेलु उपचार में भी आप दूर्वा घास के उपाय आयुर्वेद में बताये गए है। दूब घास के फायदे हमारे सभी प्रकार के लीवर के रोग, पथरी, घांव, बवासीर, अतिसार, मूत्र संबंधी विकार, रक्त प्रद,र पुरानी खुजली, ल्यूकोरिया, मलेरिया, बुखार, मुंह के छाले, और जलोदर जैसी अनेक बिमारियों  को दूर करने की शक्ति रखता है। 

दूब (दूर्वा) घास के उपयोग :

पथरी की परेशानी में चमत्कारी हे दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

सभी प्रकार की पथरी रोग को दूर करने के लिए  दूर्वा घास चमत्कारी औषधि का काम करती। इस प्रयोग को करने के लिए दूर्वा को धोकर इसे अच्छे से पीसकर उसमें  मिश्री मिलाकर शर्बत की तरह सुबह - शाम पीने से पथरी टूटकर मूत्र मार्ग से बाहर निकल जाती है। 

मूत्र सबंधी परेशानी का रामबाण इलाज हे दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

मूत्र संबंधी विकारों को दूर करने के लिए भी यह बहुत ही लाभकारी है। मूत्र संबंधी विकार में दूब (दूर्वा) घास का काढ़ा बनाकर रोज १० से २०  m l की मात्रा को प्रतिदिन  सुबह - शाम पिलाने से मूत्र संबंधी विकार दूर होते है। 

मूत्र के साथ खून आने पर दूब (दूर्वा) घास का शर्बत बनाकर सेवन करें।  दूब (दूर्वा) घास शीतल प्रकार की होती इइस कारण से  यह इन समस्यांओं को तुरंत ठीक करती है। 

रक्त प्रदर में अति लाभकारी हे दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

रक्त प्रदर की समस्या में दूब (दूर्वा) घास को सफेद चंदन और मिश्री मिलाकर सेवन करने से रक्त प्रदर की समस्या तो  ठीक होती ही है साथ ही  श्वेत प्रदर, ल्यूकोरिया, गर्भपात और योनि संबंधी में इसका प्रयोग करते हैं, तो बहुत ही अच्छे लाभ मिलते हैं।  इससे रक्त का बहना रुक जाता है। इसका उपयोग  गर्भाशय को शक्ति प्रदान करता है और गर्भ को पोषण भी देता है। 

त्वचा में भी उत्तम है दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

दूब (दूर्वा) घास सभी प्रकार के दाद खाज खुजली आदि में भी बहुत ही लाभकारी है। यह  किसी प्रकार का कोई इंफेक्शन या एलर्जी के कारण दाद खाज खुजली हुवी हो उसमें भी यह बहुत ही अच्छा लाभ दिखाती है। 

दाद खाज खुजली और पामा रोग को दूर करने के लिए इसका तेल बना कर आप रख सकते हैं। दूब (दूर्वा) घास को  बराबर पीसकर उसमें  पानी मिलाकर इसका रस निकालकर  इस रस को तेल में सिद्ध करके सखलें। इस तेल को लगाने से चर्म रोग ठीक होते हैं। 

दूब (दूर्वा) और दारू हल्दी दोनों को समान मात्रा में लेकर छाछ के साथ पीसकर चर्म रोगों पर लगाने से भी चर्म रोग ठीक होते हैं। 

पुरानी दाद खाज खुजली को ठीक करने  के लिए हड़ताल, डूबा तथा सेंधा नमक इन तीनों को गोमूत्र में पीसकर लेप करने से पुरानी दाद खाज खुजली ठीक हो जाती है। 

साधारण दाद खुजली में इसको हल्दी के साथ पीसकर लेप करने से बहुत ही जल्दी और अच्छे लाभ देखने को मिलते है। 

त्वचा संबंधी को चर्म रोग जो की अधिकतर एलर्जी के कारण होता है इस परेशानी में  त्वचा पर चकत्ते नुमा दाग  बन जाते हैं इस पर भी दूब (दूर्वा) घास और हल्दी का पेस्ट बनाकर लगाने से दाद खुजली और चकते तथा रिंगवॉर्म जैसी समस्याएं ठीक हो जाती है। 

चोट या घांव में भी लाभ करता है दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

चोट या शरीर का कोई अंग कट जाता है, और वहां से खून बहने लगता है यह खून का बहना  कभी कभी  बंद नहीं होता है। उस स्थिति में दूब (दूर्वा) घास क चटनी की तरह पीसकर कटे हुए या चोट वाले स्थान पर लेप करने से खून का बहना रुक जाता है। दूर्वा घास के गुण में  खून को रोकने का बहुत ही बेहतरीन असर  होता है। 

मुँह के छालों से तुरंत आराम दिलाता है दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

मुंह में छाले की परेशानी होने पर दूब (दूर्वा) घास को मुँह में रख कर खूब चबाने से  मुंह के छाले ठीक हो जाते हैं। 

काम शक्ति क बढ़ने में दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

दूब (दूर्वा) घास में शक्ति वर्धक आयुर्वेदिक गुण होते हैं।  इसलि कारण  यह काम शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है। इसके  प्रयोग के लिए  ३  से ४  ग्राम की मात्रा को नियमित सेवन करने से काम शक्ति में बढ़ोतरी होती है। 

चेहरे को निखार ने में भी फायदेमंद है दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए और चेहरे की झाइयों को दूर करने के लिए भी इस दुर्गा घास का प्रयोग किया जाता है।  इस प्रयोग  के लिए  इस को बारीक पीसकर उसमें  दूध मिलाकर चेहरे पर फेस पैक की तरह उपयोग करने से चेहरे के दाग धब्बे और चेहरे की झाइयां दूर होती हैं 

मिर्गी को दूर करें दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

मिर्गी के दौरे की समस्यां में दूब (दूर्वा) घास के ८  से १०  ml रस को नियमित पिलाते रहने से मिर्गी की समस्या ठीक हो जाती है। 

मलेरिया को भगाये दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

मलेरिया में भी दूब (दूर्वा) घास का उपयोग  बहुत ही अच्छा लाभ देता  है। इस प्रयोग को करने के  लिए अतीस के चूर्ण में दुर्गादास का रस मिलाकर सुबह -दोपहर - शाम चाटने से चार से  पांच दिन में ही मलेरिया पूरी तरह ठीक हो जाता है। 

मासिक धर्म में उपयोगी है दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

महिला में आमतौर में होने वाली समस्याएं जैसे की मासिक धर्म के समय अत्यधिक खून का बहना, खून का  कम या ज्यादा होना,  सफेद पानी, रक्त प्रदर,ल्यूकोरिया जैसे काफी सारी समस्याओं को दूर करने के लिए दुर्वा घास के रस का नियमित सेवन करने से यह सारी समस्याएं ठीक हो जाती है। 

दस्त बंद करने में दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

भयंकर दस्त की समस्यां होने पर दूब (दूर्वा) घास को पीसकर उसका रस निकाल कर पिलाने से दस्तों की समस्या तुरंत बंद हो जाती है। 

अतिसार में यह बहोत लाभकारी है, अतिसार रोग दूर करने के लिए दूब (दूर्वा) घास, सुकंठ और सौंफ इन तीनों को पानी में उबालकर पीने से भी आतीसार रोग ठीक हो जाता है। 

उलटी की समस्यां से चुकारा दिलाये दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

दूब (दूर्वा) घास का रस का सेवन करने से उल्टी की समस्या भी ठीक होती है। यह सभी प्रकार की उल्टियों में यह लाभकारी है। 

नाक से खून बहना बंद करें दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

नाक से खून बहने की परेशानी में दूब (दूर्वा) घास का सेवन करना चाहिए। या फिर इसके दो - दो बूंद नाक में टपकाने से नकसीर की समस्या ठीक हो जाती है। 

सिरदर्द में  गुणकारी है दूब (दूर्वा) घास का उपयोग :

सिरदर्द की समस्या में दूब (दूर्वा) घास का उपयोग लाभकारी होता है।  प्रयोग के लिए दूब (दूर्वा) घास को पीसकर खाने वाला चूना मिलाकर माथे पर लेप करने से सिर दर्द ठीक होता है। 

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तो देखा आपने साधारण से दिखने दूब (दूर्वा) घास कितनी फायदेमंद है। इस लेख में आपने (दूर्वा) दूब घास के फायदे के बारें में जाना। आशा करता हूँ आपको दूर्वा घास के औषधीय गुण और इसके फायदे  के साथ साथ दूर्वा घास का उपयोग के विषय में जानने मिला। 

यदि आपका दूब (दूर्वा) घास से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो निचे कमैंट्स में हमें जरूर बताएं। यदि आपको यह लेख कोसों दूर रहें दूब ( दूर्वा ) घास से बीमारियां अच्छा और उपयोगी लगा हो, तो इसे दूसरों के साथ सोशल मीडिया Facebook और Whatsapp पर जरूर शेयर करें। हमारी धरती की ऐसी ही रोचक वनस्पति के बारें में जानने के लिए पर यहॉ Hindi Plant पर क्लिक करें।