अमलतास क्या है? जानेंगे इसके फायदे और नुकसान।

अमलतास क्या है? जानेंगे इसके फायदे और नुकसान। 

अमलतास का पेड़ देखने में  मनमोहक लगता है। इस पेड़ को ख़ास कर में आकर्षण के लिए लगाया जाता है। इसके होने से घर आँगन, बाग़, बगीचे सुन्दर दीखते है। शायद आप इसके बारें में आप इतना ही जानते होंगे। 

मगर आप में से कई ऐसे हे जो जानना चाहते है, के अमलतास क्या है? और क्या हे इसके फायदे और नुकसान। तो इस लेख में आपको अमलतास के विषय में खूब सारी ऐसी उपयोगी जानकारी प्राप्त होगी, जो की अब तक आपको नहीं थी।

इस लेख में आप अमलतास के औषधीय गुण और इसके उपयोग के बारें में जानोगे। साथ ही आप अमलतास के फायदे और नुकसान (Benefits of amaltas) के विषय में भी जानकारी प्राप्त करोगे। यह अमलतास की जानकारी जीवन में आपको कभी न कभी उपयोगी होगी। तो फिर चलिए शुरू करते हे हमारा आज का विषय जो की आधारित है अमलतास के बारें में। 

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अमलतास क्या है?

अमलतास एक पिले फूल वाला पेड़ है और ये सामान्य पेड़ों में से ही एक है। मगर दूसरी वनस्पतियों की तरह इसके भी  कुछ ख़ास औषधि गुण और फायदें है। अमलतास के उपयोग से हम कई रोगों से छुटकारा पा सकतें है। मगर इसके लिए अमलतास की जानकारी होना आवश्यक है। 

भारत के सभी प्रदेशों में आप को अमलतास के पेड़ मिल जायेंगे। यह एक मद्धम आकर का पेड़ है। अमलतास वृक्ष की ऊंचाई २५ से ३० फिट तक होती है। अमलतास के पत्ते आकार में एक फुट लंबे होते है। जो कि जो की ८ से १६  जोड़ें  में लगे होते है। 

यह पत्ते मार्च और अप्रैल में झड़ जाते है। अमलतास के फूल की बात करें तो यह पीले रंग के होते है, और गुच्छों में  लगते है।  गर्मी के मौसम में देखने पर इस पुरे पेड़ पर पिले रंग के खूबसूरत फूल ही फूल दीखतें हैं। उस समय यह पूरा पेड़ ही पीला नज़र आता है। ये द्रश्य  बहोत ही मनमोहक और  सुन्दर दीखता है। इसलिए इसका नाम (Golden shower ) गोल्डन शावर रखा गया होगा। 

यदि अमलतास के पेड़ पर फूल नहीं आ रहे हैं। तो आपकी जानकारी के लिए बतादूँ इन पर गर्मियों में फूल खिलते है। ज़रासी हवा चलने पर यह फूल झड़ने लगते है। इन फूलों में कोई गंध नहीं होती। 

अमलतास की फली आकार में १ से ३ फीट लंबी होती है। इसका रंग कच्ची अवस्ता में हरा और पकने पर काला हो जाता है।  दिखने में ये बेलन के आकार की लंबी  होती है। इन फली में २५  से १०० तक की संख्या में चपटे व हल्के पीले रंग के बीज होते हैं। साथ ही इस फली के बीच में काला गुदा होता है जो की स्वाद में मीठा होता है। जो अमलतास की दवा बनाने के काम आता है। 

अमलतास पेड़ की  छाल कुछ - कुछ लाल रंग की और मखमली  होती है। अमलतास का वैज्ञानिक नाम Cassia fistula है। अमलतास को अन्य भाषाओँ में अलग -अलग  नामों से जाना जाता है। जैसे की  ....

अमलतास के अन्य  भाषाओँ में नाम :

हिंदी – अमलतास, सोनहाली, सियरलाठी

English – Golden shower 

संस्कृत – आरग्वध, स्वर्णफल,राजवृक्ष, द्रुमोत्पल, शम्पाक, आरेवत, व्याधिघात, कृतमाल, सुवर्णक, कर्णिकार

गुजरती – गर्मालो 

मराठी – बाहवा

नेपाली – अमलतास

बंगाली – सोनाली, सोनूलु (, बन्दरलाठी, अमुलतास

पंजाबी – अमलतास, करङ्गल, कनियार

उर्दू – अमलतास

तेलुगु – आरग्वधामु, सम्पकमु

तमिल – कोन्डरो, कावानी, सरकोन्नै, कोरैकाय

ओरिआ – सुनारी 

असामी – सोनारू

कन्नड़ – कक्केमरा

मलयालम – कणिकोन्ना

फारसी – ख्यार-शन्बर

अरबी – खियार-शन्बर

अमलतास की फली : Amaltas Fali


अमलतास क्या है? जानेंगे इसके फायदे और नुकसान।

अमलतास के फायदे :

आयुर्वेद के अनुसार अमलतास की तासीर शीतल होती है। यह  स्वादिष्ट कब्ज का नाश करने वाला, पेट को साफ करने वाला है।  साथ ही यह ज्वर, हृदय रोग, रक्त, पित्त, वात व्याधि, गैस एवं मूत्र कष्ट नाशक है। 

अमलतास के उपाय और फायदें। 

गले में उपयोगी है अमलतास :

गले में सूजन की समस्यां होने पर अमलतास की जड़ की छाल को १०  ग्राम की मात्रा में लेकर पानी में उबालें। यह पानी जब एक चौथाई रह जाए  तब इसे एक चम्मच मात्रा में दिन में तीन बार सेवन करने से गले की सूजन से आराम मिलता है। 

श्वास रोग में फल्देमन्द है अमलतास की फली :

श्वास रोग और अस्थमा के रोगी के फेफड़ों से  कफ निकालने के लिए अमलतास के फलों का ३ से ४  ग्राम गूदे को पानी में मिलाकर गुनगुना सेवन करने से लाभ मिलता है। 

चर्म रोग को ठीक करें अमलतास के उपयोग। 

चर्म रोग में अमलतास जड़ी बूटी के रूप में उपयोग किया जाता है। चर्म रोग में इस के पत्तों को पीसकर त्वचा सम्बन्धी परेशानी वाली जगह  पर लेप करने से चर्म रोग ठीक हो जाते हैं। 

दाद खाज खुजली में अमलतास के पत्तों का रस लगाने से  विशेष लाभ होता है। त्वचा रोगों में इसका गूदा ५ ग्राम इमली और ३ ग्राम पानी में घोलकर नियमित प्रयोग से लाभ होता है। 

चर्म रोगों के इलाज हेतु अमलतास के पत्तों को सिरके में पीसकर  चर्म रोगों यानि दाद खाज खुजली फोड़े फुंसी पर लगाने से चर्म रोग दूर होता है। यह प्रयोग कम से कम ३ से ४ हफ्ते तक करना जरुरी है। तभी इस प्रयोग से लाभ मिलता है। 

बुखार में लाभ करते है अमलतास की फली का उपयोग।  

बुखार होने पर अमलतास की फली का गूदा ३  ग्राम की मात्रा में सुबह - शाम नियमित ५ दिन तक लेने से बुखार में लाभ मिलता है। साथ ही बुखार के साथ होने वाली अन्य परेशानियां जैसे कमजोरी और बदन दर्द को भी दूर करता है। 

कब्ज में भी संभव है अमलतास से इलाज। 

कब्ज को दूर करने के लिए अमलतास के गूदे की लगभग ५० ग्राम की मात्रा को पानी में भिगोकर रख लें। इस मिश्रण को रात में सोते समय सेवन करने से कब्ज की परेशानी से आपको बहुत जल्दी छुटकारा मिलता है। 

कब्ज दूर करने के लिए एक चम्मच फल के गूदे को एक कप पानी में भिगोकर मसलकर छान कर पिने से भी से कब्ज दूर हो जाता है। 

बिच्छू के डंख में फायदा करते है अमलतास के बीज के फायदे :

बिच्छू के काटने पर अमलतास के बीजों को पानी में घिसकर बिच्छू के डंख वाले स्थान पर लगाने से दर्द दूर होता है। 

बच्चों के पेट दर्द में करें अमलतास से उपचार :

बच्चों में पेट दर्द की समस्यां होने पर अमलतास के बीज का उपयोग विशेष लाभ देता है। इस प्रयोग को करने के लिए अमलतास के बीज को घिसकर नाभि पर लगाने से विशेष लाभ और आराम  मिलता है। 

कान  के रोग ठीक करें अमलतास का काढ़ा :

कान के रोग में अमलतास के काढ़े को कान में डालने से कान का बहना बंद हो जाता है। 

मधुमेह में प्रभावशाली है अमलतास के लाभ :

मधुमेह (डायबिटीज ) में अमलतास के बीज का उपाय विशेष लाभ करता है। इस प्रयोग को करने के लिए इसके गूदे को गर्म करके छोटे काली मिर्च के आकार की गोलियां बनाकर, इन गोलियों को सुबह २ गोली और शाम को २ गोली का सेवन करने से मधुमेह में लाभ मिलता है। 

खांसी में लाभकारी है अमलतास की चटनी :

खांसी की समस्यां होने पर अमलतास की चटनी को खाना खाने के साथ सेवन करने से खांसी की परेशानी दूर होती है।  

सूखी खांसी ठीक करने के लिए आप इसके फूलों का अवलेह बनाकर सेवन करने से सूखी खांसी दूर होती है। 

गले की खराश दूर करें अमलतास वनस्पति :

गले की खराश दूर करने के लिए इसकी जड़ की छाल का काढ़ा बनाकर इस गुनगुने काढ़े से गरारे करने से फायदा मिलता है। 

एसिडिटी से बचाये अमलतास फली के गुण :

एसिडिटी की समस्यां को  ठीक करने के लिए अमलतास फल के गूदे को पानी में घोलकर हल्का गुनगुना करके नाभि के चारो और १० से १५  मिनट तक नियमित  मालिश करने से एसिडिटी से हमेशा के लिए लाभ मिलता है। 

गर्भवती महिलाओं को उपयोगी है अमलतास की छाल के फायदे :

अमलतास की छाल को उबालकर और उसमें शक्कर मिलाकर पिलाने से गर्भवती महिलाओं को सहजता से प्रसव हो जाता है 

अमलतास के नुक्सान :

अमलतास बहुत ही गुणकारी औषधि है, मगर कभी-कभी इस से अधिक सेवन से आपको नुकसान भी हो सकता है।  इसका अधिक उपयोग करने से पेट में दर्द और मरोड़  हो सकता है। इसलिए इसका प्रयोग सावधानी से करें। या फिर इसके उपयोग करने से पहले अपने डॉक्टर या वैध की सलाह जरूर लें। 

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आपने इसलेख में जाना साधारण देखनेवाले अमलतास ट्री के फायदे हमारे लिए कितने उपयोगी और फायदेमंद है। इसी के साथ आपने अमलतास खाने के फायदे के बारें में भी जाना। आशा करता हूँ आपको अमलतास के औषधीय गुण और इसके फायदे  के साथ साथ अमलतास का उपयोग और लाभ के बारें में लिखा यह लेख अच्छा लगा होगा। 

यदि आपका अमलतास से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हो तो  निचे कमैंट्स में हमें जरूर बताएं। यदि आपको यह लेख अमलतास क्या है? जानेंगे इसके फायदे और नुकसान अच्छा और उपयोगी लगा हो तो इसे दूसरों के साथ सोशल मीडिया Facebook और Whatsapp पर जरूर शेयर करें। हमारी धरती की ऐसी ही रोचक वनस्पति के बारें में जानने के लिए पर यहॉ Hindi Plant  पर क्लिक करें।