पारिजात के असंख्य लाभ और उपयोग।

पारिजात के फूल आपने जरूर देखे होंगे और इस नाम से आप सभी परिचित भी होंगे। पारिजात को आम भाषा में हरसिंगार, रातरानी और नाइट जैसमिन जैसे नामों से भी जाना पहचाना जाता है। ख़ास कर इस पारिजात के फूलों को भगवान के शृंगार में उपयोग किया जाता है। इसलिए इसे हरसिंगार के नाम से जाना जाता है।

हम सभी पारिजात को इतना ही जानते है। मगर आयुर्वेद में पारिजात का विशष महत्व बताया गया है। इसकी वजह इसके असंख्य आयुर्वेद लाभ है। पारिजात के वृक्ष का आयुर्वेदिक उपयोग करके अनेक रोगों से छुटकारा मिल सकता है।

पारिजात से मिलने वाले लाभों और इसके उपयोग के बारें में उपयुक्त जानकारी हमारे पास न होकर हम इनसे मिलने वाले विशेष औषधीय गुण का उपयोग करने में सक्षम नहीं है। इसलिए मैंने सोचा क्यों न पारिजात के विषय में आप सभी को विस्तार से जानकारी दूँ। जो आपके दैनिक दिनचर्या में उपयोगी हो सकें। तो कहलिये बिना देरी किये शुरू करते है हमारा आज का विषय पारिजात के असंख्य लाभ और उपयोग। 

पारिजात की जानकारी :

पारिजात ( हरसिंगार ) का वैज्ञानिक नाम Nyctanthes arbor tristis है। पारिजात का पेड़ (parijat tree) आपको हर कहीं देखने को मिल जायेगा। हार सिंगार का वृक्ष १० से १५ फीट ऊंचा होता है। सड़कों के किनारे, बाग़ बगीचों में, स्कुल के कंपाउंड में, गमले में इसे आसानी से उगाया जा सकता है। पारिजात का वृक्ष काफी छत्ते दार होता है। इसलिए लोग घर आएंगे या बाग बगीचे की खूबसूरती बढ़ाने के लिए इस पौधे को लगाते हैं

पारिजात के फूल सफ़ेद व बिच से नारंगी रंग के बहोत ही सुन्दर, सुगन्धित और मनमोहक होते है। इन फूलों की यह खासियत है की यह रात में खिलते है और सुबह सूरज उगने से पहले झड़ जाते है। इसमें  हरे रंग के बीज लगते जो सूखने पर  काले रंग के हो जाते हैं।सभी फूलों की प्रजाति में सिर्फ पारिजात के निचे गिरे फूलों को ही उपयोग भगवान की पूजा और श्रृंगार में होता है।

पारिजात को आ गमले में आसानी से उगा सकते हैं। इस पौधे में से सितंबर से दिसंबर तक छोटे छोटे बीज निकलते है। इन बीजों की मदद से आसानी से इसे उगाया जा सकता है। पारिजात के पत्ते छोटे आकर के और हरे रंग के होते है। इसे छूने पर यह किसी रेत की तरह  खुरदरे मालूम पड़ते है।  इसके पत्तों का आकर में नोंक निकली होती है और किनारों पर दंतूरी होती है।

पारिजात के फूलों और पत्तिओं आयुर्वेदिक गुणों से भरपूर होने से इनका आयर्वेदिक में औषधि में उपयोग किया जाता है। पारिजात के फूलों की सुगंध इतनी मधुर होती है की इस मधुर खुशबु के कारण तितलियाँ और मधुमक्खियां खींची चली आती है। पारिजात को अन्य भाषाओँ में अलग – अलग नामों से जाना जाता है।  जैसे की …

पारिजात का अन्य भाषाओँ में नाम :

हिंदी – हरसिंगार,  सेओली, पारिजात, कूरी, सिहारु

English – Tree of sadness

गुजरती  – हारशणगार, जयापार्वती

मराठी – पारिजातक, खुरस्ली

संस्कृत – पारिजात, पुष्पक, प्राजक्त, रागपुष्पी, खरपत्रक

उर्दू – गुलेजाफारी, हरसिंगार

कोंकणी – पारिजातक, पारडिक

पंजाबी – हरसिंघार, कूरी, पकुरा

नेपाली – पारिजात

बंगाली – हरसिंघार, सेफालिका, शेउली

उत्तराखंड – कुरी, हरसिंगार

ओरिआ – गोडोकोडीको, गंगा सेयोली

मलयालम – पविलामल्लि, परिजातकम

कन्नड़ – गोली, पारिजात

तमिल – मंझाटपू, पवलमल्लिकै

तेलुगु – सेपाली, पगडमल्ले, कपिलानागदुस्तु

पारिजात के फायदे :

औषधीय रूप में पारिजात के वृक्ष की छाल, पत्तो और फूलों का अधिक उपयोग होता है। यह स्वाभाव से गर्म होता है।

पारिजात (हरसिंगार) के औषधीय गुणों के कारण इसका इस्तेमाल गठिया रोग, रक्त को साफ करने, घाव होने पर, टूटी हुवी हड्डी को ठीक करने, बवासीर, ह्रदय रोग, पुराना बुखार, सुखी खासी, त्वचा विकार, बालों की समस्या, मधुमेह में, पाचन शक्ति बढ़ाने में, स्त्री संबंधित रोग, मलेरिया, तनाव को दू,र करने में कब्ज, उच्च रक्तचाप में, आंतों के रोग टाइफाइड, जोड़ों के दर्द जैसे रोगों में किया जाता है।

पारिजात के औषधीय गुण और  उपयोग :

पारिजात पाचन तंत्र को कंट्रोल करता है। यह दर्द सूजन को दूर करता है। साइटिका में अर्थराइटिस गठिया में फायदेमंद है। इस पौधे का हर एक हिस्सा आयुर्वेदिक औषधि में इस्तेमाल किया जाता है। आईये जानते है पारिजात का उपयोग।

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सूजन और दर्द में पारिजात का उपयोग :

र्द और सूजन के उपचार में हरसिंगार anti-inflammatory गुणों से भरपूर होता है। यह दर्द और सूजन को कम करने में मदद करता है। कई तरह की आयुर्वेदिक औषधियों में हरसिंगार के ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है।  इसके अलावा यह ठंड में जोड़ों के दर्द से राहत दिलाता है।

हरसिंगार पौधे की पत्तियों को पीसकर रात को पानी में उबालकर उस पानी का सेवन पुरानी से पुरानी जोड़ों के दर्द कुछ ही दिनों में दूर हो सकती है।

पारिजात के पेड़ के छाल, फूल और पत्ते तीनो  को सुखाकर चूर्ण बनाकर इस ५ ग्राम पाउडर को २०० ग्राम पानी में डालकर उबाल लें जब इसका १/४  हिस्सा बच जाये तब उसका सेवन करने से  शरीर के अंदर होने वाले दर्द सूजन में आराम मिलता है।

घुटने और कमर दर्द  में पारिजात का उपयोग :

पारिजात के  तीन या चार पत्तों का काढ़ा बना कर सेवन करना दर्द के लिए काफी फायदेमंद है। चाहे घुटने का दर्द हो कमर का दर्द हो या हाथ पैर किसी भी हिस्से का दर्द हो बहुत ही फायदेमंद होता है।  इसके नियमित सेवन से   कुछ महीनों के अंदर आपकी सारी परेशानी दूर हो जाएगी।

पेशाब की समसयान  में पारिजात का उपयोग :

 सम्बन्धी परेशानी में इसके पत्ते, छाल और फूल का काढ़ा बनाकर सेवन करने से पेशाब खुलकर होगा और इससे सम्बंधित सभी परेशानी से छुटकारा मिलेगा।

घाव  में पारिजात का उपयोग :

पारिजात पत्ते, छाल और फूल घाव को सुखाने के लिए भी काफी फायदेमंद है। अगर किसी को फोड़ा, फुंसी है जख्म या घाव होने पर पारिजात के  कोमल कोमल पत्तों को तोड़कर पीसकर पेस्ट बनाकर घाव के स्थान पर लगाने से घाव जल्दी से जल्दी सूख जाता है।

मधुमेह में पारिजात का उपयोग :

मधुमेह की समस्यां में इसके ३ से ४ पत्तों का काढ़ा बनाकर सुबह – शाम १० ml की मात्रा में सेवन करने से मधुमेह की परेशानी में फायदा होता है।

बुखार में पारिजात का उपयोग :

बुखार का रामबाण इलाज है पारिजात का पौधा। बुखार के प्राकृतिक उपचार में हरसिंगार का प्रयोग किया जाता है। इस प्रयोग को करने के लिए इसके पत्ते को पीसकर गर्म पानी में मिलाकर सेवन करने से सामान्य बुखार से लेकर चिकनगुनिया, डेंगू और मलेरिया तक के बुखार भी ठीक हो जाते हैं।

बवासीर में पारिजात का उपयोग :

बवासीर के उपचार में हरसिंगार रामबाण औषधि है। इसका उपयोग करने के लिए पारिजात के एक बीज का सेवन प्रतिदिन करने से बवासीर रोग ठीक हो जाता है।

खांसी में पारिजात का उपयोग :

सूखी खांसी के उपचार में हरसिंगार की पत्तियों को पीसकर शहद के साथ सेवन करने से सूखी खांसी में आराम मिलता है। इसके अलावा इसकी पत्तियों को चाय के साथ उबालकर पिने से भी खांसी में आपको राहत मिलेगी।

गठिया में पारिजात का उपयोग :

पारिजात की पत्तियों से सालों पुरानी यहां तक कि ३५ से ४० साल पुरानी अर्थराइटिस यानी गठिया के रोगों का इलाज भी संभव है। हरसिंगार पत्तियों का पानी पिने से बहुत पुरानी गठिया का रोग यहां तक की हड्डियां टेढ़ी-मेढ़ी भी हो गई है तो उसे ठीक कर सकता है। यह हरसिंगार की पत्तियों को पानी में उबालकर और इन को पीसकर सुबह-सुबह इसका खाली पेट सेवन किया जाए तो १५ से २० दिनों में ही पुरानी से पुरानी गठिया रोग की समस्यां ठीक हो सकती  है।

और जानिए :

पारिजात एक चमत्कारी पौधा है। इनके असंख्य लाभ हमारी प्रकृति ने हमें प्रदान किये है। मेने इस लेख में इन्ही पारिजात के औषधीय गुण के बारें में आपको परिचित लिया है। मेने इस लेख में पारिजात से मिलने वाले लाभ और उपयोग घरेलु उपचार  करके इस तरह हम इसका लाभ उठा सकतें हैं। इस विषय में जानकारी दी है।

आशा करता हूँ पारिजात के असंख्य लाभ और उपयोग  के विषय में बनाया हुवा यह लेख आपको उपयोगी और अच्छा लगा होगा। यदि आपको इस लेख से कुछ उपयोगी जानकारी उपलब्ध हुवी हो तो कृपया अन्य सोशल मीडिया Facebook और Whatsapp शेयर करें। इसी के साथ और भी हमारी धरती की वनस्पति सम्बंधित जानकारी पाने के लिए पर Main Page जाएँ।

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