महुआ की जानकारी और फायदे।

महुआ नाम आप सभी ने सुना होगा। आप यह भी जानते होंगें की महुआ का उपयोग मादक द्रव्य बनाने में किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में महुवा की लकड़ी का उपयोग ईंधन के रुप में होता है। यह भारत के कई प्रांतों में पाया जाता है।

महुआ गुजरात में अधिक मात्रा में होता है। महुआ के पेड़ का फल, फूल, जड़, तना सभी औषधीय गुणों से भरपूर है। इनका उपयोग कई तरह की बिमारियों के उपचार में किया जाता है।

महुआ के आयुर्वेदिक गुणों का घरेलु नुस्खों में उपयोग करके इनसे शारीरिक लाभ उठाये जा सकते हैं। इस लेख में हम इन्हीं के बारें में विस्तार से जानकारी प्राप्त करेंगे। तो चलिए शुरू करते है हमारा आज का विषय महुआ की जानकारी और फायदे

और जानिए :

Table of Contents

महुवा की जानकारी।

महुआ का वानस्पतिक नाम  Madhuca longifolia  (मधुका लोंगिफोलिया है। महुआ का वृक्ष सारे देश में पाया जाता है। यह अधिकांश जंगलों और गांव में अपने आप उग जाते हैं। महुआ का पेड़ खेत के किनारे बगीचों और सडकों के किनारे छाया के लिए विशेष तौर पर लगाया जाता है। इसकी ऊंचाई ४०  से ५० फुट होती है। इस पेड़ का कई भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व है।

महुआ के पत्ते की लंबाई ५ से ७ इंच और चौड़ाई ३ से ४ इंच होती हैं। यह  पत्ते  समूह में लगते हैं। महुआ के पत्ते बादाम के पत्तों की तरह होते हैं। यह पत्ते आकर  में छोटे होने के कारण इनसे पत्तर ( थाली ) बनाई जाती है। महुआ की लकड़ी बहुत ही मजबूत होती है। इस कारण इसकी लकड़ी का उपयोग मकान, इमारत और फर्नीचर बनाने में किया जाता है।

महुआ के फल सफेद रंग के होते हैं।  इन फलों का आकार बादाम से थोड़ा सा छोटा होता है। इसके फूलों और फलों को खाने के काम में लाया जाता है। महुआ के  फूलों और फलों में मादक खुशबू होती है। महुवा को विभिन्न क्षेत्र में अगल -अलग नामों से जाना जाता है। जैसे की…

महुआ के अन्य भाषाओँ में नाम :

हिंदी : महुवा

English – Mahua Tree

संस्कृत – मधूक, गुडपुष्प, मधुद्रुम,मध्वग, मधुपुष्प, मधुस्रव, वानप्रस्थ, मधुवृक्ष, मधुष्ठीक, रोध्रपुष्प, माधव

 हिन्दी – महुआ, मोल, मोवा, महुया, महुवा

गुजराती – महुडो

मराठी – मोहड, मौहे

उर्दू – महुवा

बंगाली – मौल, मउल

नेपाली – महुवा

 उड़िया – मोहका

कन्नड़ – इष्पेमरा, हलिप्पे

तैलुगु – इप्पा, पिन्ना

तमिल – कटइल्लुपि, इलपाई

मलयालम – पोनम, पूवूना

फारसी – गुलचकां, गुलिचाकेन

महुआ के औषधीय गुण :

महुआ के फूल मधुर, शीतल, भारी, बल, वीर्य, वात, पित्त नाशक होते हैं। इसके फल भी मधुर शीतल पुष्टिकारक वात पित्त और क्षय नाशक होते हैं। आईये जानते है महुआ के आयुर्वेदिक उपयोग कैसे करें।

गठिया की परेशानी  में महुआ का उपयोग :

गठिया के समस्यां  होने पर महुआ के  फूल को बकरी के दूध में पकाकर खाने से बहुत लाभ होता है।

धातु पुष्टता में महुआ के उपयोग :

धातु सम्बन्धी परेशानी में धातु पुष्टता के लिए महुवा की छाल का उपयोग गाय के घी और शक्कर के साथ मिलाकर दिन में तीन बार सेवन करने से धातु  पुष्ट होती है।

सांप के काटने पर महुआ का उपयोग :

सांप के काटने पर महुवा के बीज को पीसकर काटे हुए स्थान पर और आंखों के दोनों को ऊपर लगाने से जहर का असर कम हो जाता है।

सूजन में महुआ का उपयोग :

महुआ वात नाशक और पौष्टिक तत्व वाला होता है इसके उपयोग से सूजन कम होती है। यदि जोड़ों में दर्द रहता हो तो दर्द वाली जगह पर इसका लेप किया जाए तो सूजन कम होती है और दर्द खत्म होता है।

महुवा के फूल कई औषधीय गुण समेटे है। महुवा के फल को मुइया कहते हैं इसके बीज सुखाकर उसमें से तेल निकाला जाता है। जिसका उपयोग खाने में लाभदायक होता है।

महुवा के तेल का उपयोग करने वालों का कहना है कि महुआ का फूल एक कारगर औषधि है इसका सेवन करने से साइटिका जैसे भयंकर रोग से पूर्ण रुप से छुटकारा मिल जाता है

महुवा के उपयोग से पेट की बीमारियों से मुक्ति मिलती है।

सर्दी (ठंडी ) में महुवा का उपयोग :

सर्दी की शिकायत में महुआ के फूलों का काढ़ा बनाकर सुबह-शाम सेवन करना चाहिए। या फिर इन फूलों के दूध में उबालकर पीना चाहिए।  इन फुले हुए फूलों को अच्छी तरह खाना चाहिए इससे सर्दी दूर हो जाती है।

ज़ुकाम और गले  में महुवा का उपयोग :

गले में खराश होने पर महुआ के ताजे या सूखे फूल लौंग, काली मिर्च, अदरक या सौंठ इन सब को साथ  मिलाकर पीस लें और इस मिश्रण का काढ़ा बनाकर सेवन करेने से  जुखाम सर्दी में बड़ी राहत मिलती है इस प्रयोग से  सर्दी से होने वाला बुखार भी उतर जाता है।

छोटी पीपल काली मिर्च और महुवा में पइसे हुए सेंधा नमक को पानी में मिलाकर नाक से लेने से मिर्गी, पागलपन वात पित्त, और कफ आदि रोगों में लाभ मिलता है।

सहरीर के दर्द  में महुवा का उपयोग :

शरीर के किसी भी भाग में दर्द हो, जोड़ों का दर्द हो, मांसपेशियों में दर्द हो, या फिर पसलियों में दर्द हो, तो प्रभावित अंग अथवा स्थान पर महुआ के तेल की मालिश कुछ दिनों तक करनी चाहिए। इससे दर्द में बहुत लाभ मिलता है।एक बात का खास ख्याल रखें किसी भी तेल की मालिश करने के बाद ठंडे स्थान पर नहीं बैठना चाहिए।

महिलाओं के दूध बढ़ाने में  में महुवा का उपयोग :

स्तनपान कराने वाली महिलाओं और स्त्रियों को पर्याप्त मात्रा में दूध न उतरता हो। तो महुआ के ताजा फूलों का सेवन नियमित रूप से करना चाहिए, ताजा कुल उपलब्ध ना रहने पर सूखे हुए फूल किशमिश की तरह चबाकर खाने चाहिए।

खांसी  में महुवा का उपयोग :

पुरानी खांसी की परेशानी में महुआ के फूल को १५  से २० दिन एक गिलास दूध में उबालकर रात को सोने से पहले सेवन करना चाहिए। इन फूलों के बीज से जीरे जैसे दानों को निकाल देना चाहिए २ सप्ताह के लगातार सेवन से पुरानी खांसी ठीक हो जाती है।

छोटे बच्चों को अगर सर्दी की शिकायत रहती है उनकी नाक बहने लगती है तथा पसलियां भी चढ़ने लगती है इसके लिए प्रभावित स्थानीय पूरे शरीर की महुआ के तेल से मालिश करनी चाहिए।

सांप काटने  में महुवा का उपयोग :

सांप या विषैले कीड़े के काटने पर दंश स्थान पर महुआ के फूलों को बारीक पीसकर लेप कर देना चाहिए। इससे जहर का असर दूर हो जाता है।

आँखों  में महुवा का उपयोग :

महुआ के फूलों का शहद आंखों में लगाने से आंखों की सफाई हो जाती है। इस से आंखों की रोशनी बढ़ती है और आंखों की खुजली तथा उन से पानी आना बंद हो जाता है। महुवा का शहद बहुत गुणकारी होता है। जिन बच्चों के दांत निकल रहे हो उन्हें यह रोजाना चढ़ाना चाहिए इससे आनेवाले दांत आसानी से निकल जाते हैं।

घुटनों के दर्द  में महुवा का उपयोग :

बकरी के दूध में महुआ के फूलों को पकाकर पीने से घुटनों का दर्द दूर होता है।

दस्त  में महुवा का उपयोग :

महुवा के फूलों को पानी में भिगोकर उसे अच्छी तरह उबाल कर छान लें इस पानी को दिन में तीन से चार बार सेवन करने से दस्त लगने बंद हो जाते हैं।

कमजोरी में महुवा का उपयोग :

५० से ६० ग्राम  महुवा के फूलों को एक गिलास दूध में उबालकर रोजाना  सेवन करने से  शारीरिक कमजोरी दूर हो जाती है। इससे शरीर में ताकत का संचार होता है।

दांतों में महुवा का उपयोग :

महुआ की टहनी से दातुन करने से दांत का हिलना बंद हो जाता है। इससे मसूड़ों से खून आना भी बंद होता है।

बवासीर की समस्यां में महुवा का उपयोग :

बवासीर के रोगियों महुवा के  फूलों को देसी घी में भूनकर कुछ दिन तक खाना चाहिए। इसमें दर्द कम करने वाले गुण होने के कारण यह मरीज की पीड़ा को कम कर देते हैं और बवासीर से भी आराम देते हैं।

चहेरे की संदरता में महुवा का उपयोग :

४० से ५० मिलीलीटर पानी में महुआ की छाल को उबालकर  काढ़ा बनाकर सुबह – शाम सेवन करने से  चेहरे के दाग धब्बे दूर होते हैं।

जानने लायक विषय :

HindiPlant वेबसाइट में आपके लिए आयुर्वेदिक और घरेलू उपाय लेकर आते हैं। यह जो भी जानकारियां और नुस्खे हम आपको बताते हैं। यह पूरी रिसर्च और एक्सपर्ट्स की राय से होते हैं ताकि आप हमेशा स्वस्थ और खुशहाल रहें।

आशा करता हूँ यह लेख जो महुआ की जानकारी और फायदे जानकारी आपको उपयोगी लगी हो तो इसे सोशल मीडिया Facebook और Whatsapp पर Share करें। और भी ऐसी रोचक जानकारी के लिए Main Page पर जाएँ।

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