गिलोय की पहचान फायदे और उपयोग।

गिलोय की पहचान फायदे और उपयोग। 

हमारे आयुर्वेद में गिलोय को एक दिव्य औषधि माना हे, जो अमृत के सामान है। इसीलिए इसे अमृता के नाम से भी जाना जाता है। गिलोय के आयुर्वेदिक गुणों में लगभग हमारे शरीर के सभी रोगों को ठीक करने की क्षमता है। गिलोय के आप घरेलु उपचार में उपयोग करके कई रोगों से छुटकारा पा सकते हे। 

गिलोय अनगिनत रोग के इलाज में प्रभावकारी होती है। यह कुष्ठ रोग, अस्थमा, मधुमेह, खूनी बवासीर, सर्दी, जुकाम, खून की कमी, डेंगू, स्वाइन फ्लू, एचआईवी, दुर्बलता, हाई ब्लड प्रेशर, नपुंसकता, बांझपन, मासिक चक्र संबंधी परेशानियां, कैंसर, नकसीर फूटना,, यूटीआई, उल्टी, पेट संबंधी रोग. मोटापा, पथरी शारीरिक दुर्बलता, ब्रेन ट्यूमर, माइग्रेन, मलेरिया, गठिया, गुप्त रोग जैसी अनेक बिमारियों के इलाज में गिलोय का उपयोग किया जाता है। 

यदि आप को गिलोय के फायदे के  बारें में जानकारी नहीं हे या फिर बहोत ही कम है। तो इस लेख को पढ़ने के बाद आप गिलोय के बारें में बहोत कुछ जानकारी प्राप्त करलोगे जो आपको आगे चलकर कहीं न कहीं  उपयोगी होगी।

गिलोय के विषय में इस लेख के माध्यम से में आपको  महत्वपूर्ण जानकारी दूंगा। इस लेख में आप गिलोय की पहेचान कैसे करें इसके बारें में जानोगे। इसी के साथ गिलोय के उपयोग से होने वाले फायदे और नुकसान के बारें में भी जानोगे। तो चलिए शुरू करते हे हमारा आज का महत्वपूर्ण विषय गिलोय की पहचान फायदे और उपयोग। 

गिलोय फल :

गिलोय की पहचान फायदे और उपयोग।


गिलोय की पहचान। 

गिलोय ( गडूची ) जिसका वैज्ञानिक नाम Tinospora Cordifolia है। यह एक तरह की बेल होती हे। जो की ज्यादातर पेड़ों पर चढ़ी हुई होती है। यह बेल कई पेड़ों पर देखि जा सकती है। मगर गिलोय की यह बेल यदि किसी नीम के पेड़ पर चढ़ी मिल जाए तो इसे नीम गिलोय कहते हैं। निम के पेड़ पर पायी जानेवाली गिलोय बाकि सबसे थोड़ी अधिक गुणकारी होती है, ऐसा माना जाता है। 

गिलोय के पत्ते पान के पत्तों के समान होते हैं।  गिलोय की बेल पर बेर जैसे लाल रंग के फल लगते हैं। दिखने में यह फल गोल और छोटे होते हैं। इन फलों का भी आयुर्वेद में विशेष महत्व बताया गया है।ब्बत करें इनकी बेल की तो गिलोय की बेल जितनी पुरानी होती जाती है, वैसे-वैसे  यह बेल आकर में थोड़ी मोटी होती जाती है। इनका उपयोग औषधि बनाने में किया जाता है।

आयुर्वेद में अधिकतर इस मोटी पकी हुवी बेल का ही उपयोग किया जाता है। इस मोटी बेल की टहनी से अपने आप पतली परत  निकलने लगती है। यह बेल बहुत लंबी तक हो जाती है। गिलोय की बेल की  एक बहुत खास विशेषता यह है कि काफी महीनों तक रखने के बाद भी यह सूखती नहीं है।  इस बेल को कहीं पर भी काट कर लगा  दिया जाए तो ये ये बेल  फिरसे बढ़ने लगती है। गिलोय को अन्य भाषाओँ में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। जैसे की... 

गिलोयके अन्य भाषाओँ में नाम :

हिंदी – गडुची, गिलोय, अमृता

English – Indian Tinospora 

संस्कृत – वत्सादनी, छिन्नरुहा,भिषक्प्रिया, अमृतवल्ली, गुडूची, तत्रिका, अमृता, मधुपर्णी, अमृतलता, छिन्ना

गुजरती – गुलवेल, गालो

मराठी – गुलवेल, अम्बरवेल

बंगाली – गुंचा, पालो गदंचा, गिलोय 

पंजाबी – गिलोगुलरिच, गरहम, पालो

नेपाली – गुर्जो

गोवा – अमृतबेल

ओरिआ – गुंचा, गुलोची

कन्नड - अमृथावल्ली, अमृतवल्ली, युगानीवल्ली, मधुपर्णी

तमिल – अमृदवल्ली, शिन्दिलकोडि

तेलुगु – तिप्पतीगे, अमृता, गुडूची

मलयालम – अमृतु, पेयामृतम, चित्तामृतु

फ़ारसी – गुलबेल, गिलोय

अरबी – गिलो

गिलोय का पौधा कैसे लगाएं ?

गिलोय का पौधा इसकी बेल से आसानी से अपने घर पर भी लगा सकते हैं। गमलों में यह बहुत ही आसानी से बढ़ जाता है। जिस प्रकार घर पर गमले में मनी प्लांट के पौधे को लगाते हैं। उसी प्रकार से आप गिलोय का पौधा  लगा कर बड़ा कर सकतें है और गिलोय के औषधीय गुणों का लाभ उठा सकते हैं। 

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    गिलोय की बेल को सूखाने का तरीका। 

    गिलोय की बेल  को सुखाने के लिए इस बेल के बड़े-बड़े टुकड़े करके इन टुकड़ो को अच्छी तरह धोकर फिरसे इसके छोटे-छोटे टुकड़े करके इनको छाया में सुखा सकते हैं। इससे यह बेल अच्छी तरह सूख जाती है। सूखने के बाद इसका उपयोग कर सकतें है। 

    गिलोय बेल को काटने पर  चिपचिपा तरल पदार्थ निकलता है और इसमें छोटी -छोटी जाली दिखती है। इस जाली से इसे आसानी से पहचाना जा सकता है कि यह गिलोय की बेल है। 

    गिलोय की बेल का उपयोग कैसे करें ? 

    गिलोय की ताजा  बेल का ही प्रयोग करना उत्तम माना जाता है। मगर किसी कारण से रोज-रोज ताजा बेल का  उपयोग करना असुविधा होने के कारण  आप इस को सुखाकर  भी इसका उपयोग कर गिलोय की लकड़ी के फायदे और इसके औषधीय गुणों का लाभ लें सकते हो। 

    गिलोय के औषधीय गुण :

    आयुर्वेदिक माता अनुसार गिलोय में खून साफ करना, एंटीबैक्टीरियल गुण, एंटीवायरल गुण, बुखार कम करना, एंटी एलर्जी, एंटीऑक्सीडेंट पाचन मजबूत करने वाले गुण, मानसिक तनाव और चिंता दूर करने वाले गुण, भूख बढ़ाने वाले गुण, शुगर कम करने वाले गुण, एंटी इन्फ्लेमेटरी, कूलिंग पेट के कीड़े नष्ट करने वाले गुण, इम्यून सिस्टम अच्छा करने वाले गुण, एंटीएसिड, एंटी ट्यूमर, बुखार दूर करने वाले गुण,  पेट का दर्द और दूसरी पेट संबंधी रोग ठीक करने वाले गुणों के अलावा बहुत से अनेक गुण भी गिलोय में पाए जाते हैं। 

    गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा देती है।  जिसके फलस्वरूप आपको सर्दी जुकाम और दूसरी कई घातक बीमारियों से बचने में मदद मिलती है। यह शरीर को डिटॉक्सिफाई जाने साफ करती है और आपके गुर्दों लीवर और शरीर से हानिकारक तत्वों को दूर करने में मदद करती है। 

    इसके एंटीबैक्टीरियल और एंटीवायरल गुण आपको कई प्रकार की बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन से भी बचता है। मानसिक तनाव चिंता, भय, अवसाद, असंतुलित खान-पान आदि पाचन शक्ति को बुरी तरह से प्रभावित करते हैं। गिलोय में डाइजेस्टिव्स दूर करने वाले गुण होते हैं। जो कि बदहजमी, कब्ज, गैस, मरोड़ आदि समस्याओं को दूर करता है। इसका उपयोग पाचन शक्ति को बेहतर बनता है साथ ही आपकी भूख को जागृत करवाने में भी मदद करता है। 

    गिलोय के फायदे :

    गिलोय पौष्टिक होती है तथा इसका उपयोग बुखार, चर्म रोग, पीलिया, अतिसार, किडनी, मधुमेह, ह्रदय रोग, पुराना बुखार मूत्र संबंधी विकार स्त्री रोग, बवासीर, नेत्र रोग, दमा, खांसी, टीबी, कैंसर जैसी विभिन्न बिमारियों में किया जाता है। गिलोय का उपयोग वैसे तो लगभग सभी बीमारियों में  किया जा सकता है। 

    सफेद पानी जाने ल्यूकोरिया की समस्या हो तो उसे गिलोय का जूस पीकर दूर किया जा सकता है। 

    पित्त दोष के कारण जलन को गिलोय जूस और जीरे का सेवन दूर कर सकता है। 

    त्वचा के रोग  को गिलोय जूस और नीम पाउडर के मिश्रण से ठीक किया जा सकता है। 

    गिलोय के जूस को छाछ में मिलाकर लेने से पाइल्स यानी बवासीर से मुक्ति मिल जाती है। 

    गिलोय और अजवाइन का काढ़ा कब्ज दूर करने में इस्तेमाल किया जाता है। 

    जम्मू के लोग गिलोय को हड्डियों के फ्रैक्चर को ठीक करने के लिए काम लेते हैं। 

    वहीं गुजरात के लोग मानते हैं कि गिलोय की जड़ और छाल के पाउडर को दूध के साथ पीने से कैंसर का रोग भी ठीक हो सकता है। 

    कान का दर्द होने पर गिलोय के पत्तों का दो बूंद रस दर्द वाले कान में डालने से आराम मिलता है। 

    पीरियड में अगर ज्यादा ब्लीडिंग हो रही हो या फिर गर्भपात में खून के अधिकतर रक्तस्त्राव को रोकने के लिए जानकार लोग गिलोय के ३  ml जूस को एक कप पानी के साथ पीने की सलाह देते हैं। 

    गिलोय की १ फीट लंबी शाखा के रस को ७ तुलसी के पत्तों के साथ उबालकर ग्रहण करने से डेंगू का बुखार ठीक हो जाता है। वह नुस्खा आपकी प्लेटलेट की संख्या बहुत तेजी से बढ़ा देता है।  

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    गिलोय और शहद के फायदे :

    गिलोय पहाड़ी इलाकों में पीलिया के घरेलू उपचार के लिए भी प्रयोग किया जाता है। पीलिया की स्थिति में इसके चूर्ण को काली मिर्च, शहद और त्रिफला के चूर्ण के साथ लिया जाता है। इसके बाद एक चम्मच गिलोय के पत्तों के रस को एक गिलास  छाछ में मिलाकर पिया जाता है। 

    गिलोय के चूर्ण को इलायची और शहद के साथ रोजाना लेने से टीबी की बीमारी में भी सुधार होता है। 

    गिलोय के पत्तों का रस रोजाना सुबह पेट पीने से आपका खून साफ होता है। 

    गिलोय का उपयोग :

    गठिया रोग में गिलोय का उपयोग :

    गठिया रोग में ४ से ५ ग्राम गिलोय चूर्ण को दिन में दो बार दूध के साथ सेवन करने से गठिया रोग में बहुत अच्छे लाभ देखने को मिलते है। 

    पीलिया में गिलोय का उपयोग :

    पीलिया रोग के लिए गिलोय का काढ़ा बनाकर २५ से ३० ml की मात्रा में शहद मिलाकर सुबह-शाम पिने से पीलिया रोग कुछ ही दिनों में ठीक हो जाता है। 

    टीबी रोग में गिलोय का उपयोग :

    टीबी रोग की समस्यां होने पर अश्वगंधा, गिलोय, सतावर,  दशमूल, बलामूल, अडूसा, बाहोकर मूल और अतीस को समान मात्रा में लेकर काढ़ा बनाकर  २५ से ३० ml की मात्रा सुबह-शाम सेवन कुछ दिन प्रयोग करने से टीबी रोग में बहुत आराम मिलता है। 

    मलेरिया बुखार में गिलोय का उपयोग :

    गिलोय में एंटीपायरेटिक गुण के कारण इसे बुखार कम करने वाली आयुर्वेदिक दवाइयों में इस्तेमाल किया जाता है। गिलोय डेंगू फीवर से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। बुखार होने पर गिलोय को शहद के साथ लेने से मलेरिया का बुखार भी दूर हो जाता है। 

    पेट की समस्यां में गिलोय का उपयोग :

    आधे ग्राम गिलोय के पाउडर को आंवले के साथ सेवन करने से या फिर गिलोय का जूस का सेवन आईबीएस पेट में दर्द और मरोड़ जी मिचलाना उल्टी एसिडिटी लिवर प्रॉब्लम्स को भी दूर करता है। 

    मधुमेह (डायबिटीज ) शुगर में गिलोय का प्रयोग :

    मधुमेह की परेशानी में गिलोय  किसी वरदान से कम नहीं। इसमें हाइपोग्लाइसेमिक अर्थात शुगर घटाने वाले गुण पाए जाते हैं। गिलोय का नियमित सेवन टाइप टू डायबिटीज वाले रोगियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद होता है।रोजाना गिलोय का जूस का सेवन शुगर लेवल को कम करता है। 

    त्वचा में गिलोय का उपयोग :

    गिलोय में एंटी एजिंग, एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे त्वचा के अनुकूल गुण पाए जाते हैं। यह आपको  समय से पहले  बुढ़ापे से बचता है।  गिलोय का उपयोग त्वचा को लंबे समय तक जवान और सुंदर बनाए रखने में मदद करता है। इससे एक्ने पिंपल्स, रिंकल्स, फाइनलाइन, एग्जिमा आदि परेशानी भी गिलोय दूर कर सकता है। 

    आंखों के लिए भी बहुत फायदेमंद हे गिलोय :

    गिलोय आंखों की सभी समस्याओं को दूर करता है। इसका उपयोग आँखों की रोशनी बढ़ाने में मदद करता है।  गिलोय को पानी में उबालकर आंखों पर लगाने से आंखों के समस्त रोग दूर हो जाते हैं। ऐसा माना जाता है कि गिलोय का उपयोग करके आप अपने चश्में से भी मुक्ति पा सकते हैं। 

    पुरुषों के लिए भी वरदान हे गिलोय :

    गिलोय में पाए जाने वाले एपनो डीसीए गुण पुरुषों की योन शक्ति और स्टेमिना बढ़ाने में मदद करता है। इसके फलस्वरूप वैवाहिक सुख अच्छी तरह से भोग सकतें है।  

    गठिया में गिलोय का फायदा :

    गिलोय में पाए जाने वाले एंटी इन्फ्लेमेटरी और एंटी आर्थराइटिस गुण केवल गठिया को कम ही नहीं करता बल्कि इससे  गठिया के अटैक और उसके लक्षण जैसे दर्द, सूजन, जोड़ों में दर्द आदि से भी बचता है। 

    शारीरिक और मानसिक स्वास्थ में गिलोय का उपयोग :

    गिलोय बहुत अच्छा हेल्थ टॉनिक भी है जो कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ को सुधारने में मदद करता है। यह आपकी यादशक्ति को तेज बनाता है जिससे आपकी कार्यकुशलता बढ़ती है। साथ ही इसमें पाए जाने वाले विशेष  गुण आपको मानसिक तनाव और डिप्रेशन से लड़ने में भी  मदद करते हैं। 

    खून में गिलोय का उपयोग :

    गिलोय  खून को शुद्ध करता है और खून की मात्रा भी बढ़ जाता है। गिलोय में मिलने वाले ख़ास गुण रक्तचाप कम करने वाले और ब्लड सरकुलेशन सुधारने वाले को आपके दिल को सेहतमंद रखने में मदद करते हैं। यह आप को हार्टअटैक और दूसरी दिल संबंधी बीमारियों से बचाए रखने में भी मदद करते हैं। 

    अस्थमा में गिलोय का उपयोग :

    छाती में जकड़न, खांसी, सांस लेने में परेशानी, अस्थमा के लक्षणों को नियमित गिलोय चबानेसे या फिर गिलोय के जूस का सेवन करके दूर किया जा सकता है।  यदि आपको अस्थमा है तो आपको अपने आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के अनुसारगिलोय का उपयोग कर सकते हैं। 

    अस्थमा के रोगी को गिलोय की जड़ की छाल चबाने की सलाह दी जाती हैं।  इसकी जड़ के पाउडर को शहद के साथ मिलाकर भी सेवन किया जा सकता है। 

    फेफड़ों में गिलोय का उपयोग :

    गिलोय रेस्पिरेट्री प्रॉब्लम्स में भी फायदेमंद मानी जाती है। इसका कारण है इसमें पाए जाने वाले एक्सपेक्टऑरंड और एंटी इन्फ्लेमेटरी गुण। यह गुण रेस्पिरेट्री सिस्टम को सेहतमंद बनाती है और आप के फेफड़ों को सेहतमंद रखने के साथ  बल प्रदान करती है। इससे आपको कोई सांस संबंधी रोग नहीं होता। 

    आइए जानते हैं गिलोय के कुछ प्रचलित घरेलू नुस्खे :

    गाउट आर्थराइटिस एक बहुत ही पेनफुल प्रकार का अर्थराइटिस होता है। जो कि वात के असंतुलन के कारण होता है।  जिन में वात के असंतुलन को ठीक करने वाले गुण पाए जाते हैं। 

    यह गुण गाउट के लक्षणों को दूर करते हैं और गाउट अटैक होने से पहले ही रोक देते हैं।  गिलोय को गाउट के लिए इस्तेमाल करने के लिए आपको २५ ग्राम गिलोय पाउडर को १  लीटर पानी के साथ  तब तक उबालना  है जब तक पानी की मात्रा १/४  ना रह जाए इस तरल मिश्रण (लिक्विड ) को छान कर ४०  मिलीलीटर लिक्विड भोजन से पहले पी लेना हे। इससे आपको दर्द और सूजन में काफी राहत मिलेगी। आये जानते है गिलोय के नुकसान क्या है ?

    गिलोय के नुकसान क्या है। 

    गिलोय बहुत ही गुणकारी हर्ब है लेकिन कुछ स्थितियों में इसका सेवन करना नुकसान या फिर साइड इफेक्ट भी कर सकता है। 

    यदि आप डायबिटीज की दवा ले रहे हैं तो बिना डॉक्टर से पूछे गिलोय का सेवन नहीं करना चाहिए। 

    प्रेग्नेंट और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए भी गिलोय का इस्तेमाल वर्जित है। 

    गिलोय को सर्जरी ऑपरेशन के बाद नहीं इस्तेमाल करना चाहिए।

    गिलोय कब और लो ब्लड शुगर की समस्या भी कर सकता है। 

    यदि आपको ऑटोइम्यून डिजीज ड्यू फर्स्ट क्लास है अब आपको इस्तेमाल कभी नहीं करना चाहिए। 

    गिलोय ५ साल से छोटे बच्चों को नहीं देना चाहिए यदि बच्चा ५  साल से बड़ा है तो भी बिना आयुर्वेदिक डॉक्टर की सलाह के दिलों से नहीं देना चाहिए। 

    इसमें कोई दो राय नहीं कि गिलोय एक बहुत ही उपयोगी औषधि है। आयुर्वेद में इसकी अन्य उपयोगी जानकारी भी बताई हुवी है। इनमें से कुछ उपयोगी जानकारी मैनें आपको इस लेख के माधयम से दी है। आशा करता हूँ आपको इस लेख से मिली हुवी जानकारी अच्छी और उपयोगी लगी होगी। 

    यदि आपको गिलोय की पहचान फायदे और उपयोग विषय पसंद आया हो और इस लेख से कुछ जानने मिला हो तो इसे अन्य सोशल मीडिया जैसे Facebook और Whatsapp पर Share जरूर  करें। साथ ही हमारी धरती की ऐसी ही वनस्पति की जानकारी  पाने के लिए Main Page पर जाएँ।