भृंगराज की जानकारी, फायदे और उपयोग।

भृंगराज की जानकारी, फायदे और उपयोग। 

भृंगराज की जानकारी शायद आपको हो। हमारे बालों के लिए  भृंगराज के फायदे क्या है? ये भी आप जानते होंगे। मगर आप यह नहीं जानते होंगे के भृंगराज का उपयोग हमारे बालों को ही नहीं बल्कि हमारे शारीरिक रोगों के इलाज में भी किया जाता है।

भृंगराज एक औषधि है। ऐतिहासिक रूप से यह सबसे अधिक आयुर्वेदिक औषधि के साथ जुड़ा हुआ है। जो की हमारे इलाज के लिए पारंपरिक भारतीय तरीका है। इसके अनगिनत लाभों को पहचानते हुवे लोगों ने विश्वभर में इसे लोकप्रिय बनाया है। 

भृंगराज जैसी अनगिनत फायदें देने वाली औषधि की जानकारी सभी को नहीं है। इसी कारण से आज के इस लेख में हम भृंगराज के बारें में बहोत महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करेंगे। तो चलिए देरी किस बात की शुरू करते है।  आज का हमारा विषय भृंगराज की जानकारी, फायदे और उपयोग। 

भृंगराज की जानकारी : Bhringraj Informaton in Hindi :

भृंगराज का वैज्ञानिक नाम Eclipta prostrata है। आयुर्वेद में इसे रसायन माना जाता है। यह जड़ी-बूटी पुरे भारत में पाई जाती है। अधिकतर यह दलदली स्थानों में पायी जाती है। भृंगराज  की चार मुख्य प्रजाति इसके फूलों के रंग के आधार पर होती  है। इनमें से सबसे अधिक प्रचलित है सफेद भृंगराज। यह  हम में होनेवाली कई बीमारियों को दूर करने के लिए उपयोग में ली जाती है। आयुर्वेदिक औषधि में  इस प्रभाव कारी और शक्तिशाली भृंगराज के पौधे की पत्तियों और फूलों का अर्क अनेक तरीकों से उपयोग किया जाता है। 

भृंगराज में हमारे स्वास्थ को ऊर्जावान बनाने और बढ़ती उम्र के लक्षणों को कम करने के गुण होते हैं। इसके अलावा यह अपने तीखे कड़वे स्वाद सूखे पैन और हलके पन के कारण  कफ दोष और अपने गर्म शक्ति के कारण वात दोष को संतुलित करता है। 

भृंगराज से बालों का झड़ना रोकने, बालों को घना बनाने, ह्रदय,  विश हरण, सूजन को कम करने, पित्त की पीड़ा कम करने, कैंसर को रोकने, प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने, आंखों की सुरक्षा और रक्तचाप में उपयोगी होता है। यह  खासकर  कम रक्तचाप ( low blood pressure )  अधिक कारगर औषधि की तरह काम करता है। 

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भृंगराज के अन्य भाषाओँ में नाम : 

English - Eclipta

हिन्दी-भाङ्गरा, भंगरैया, मोचकन्द

गुजराती - भांगरो

मराठी - माका, भृंगराज 

उर्दू - भांगरा

उड़िया - केसारदा, सुनसुनिया

कन्नड़ - गर्ग 

बंगाली - भीमराज, केसूटी, केशोरी

मलयालम - कान्नुन्नी

तैलुगु - गुंटकल, लगरा

तमिल - करीशल्कन्नी

फारसी-जर्मदर

अरबी - कर्दामुलबिंत, सोवीड

मणिपुरी-उची-सुम्बल

 भृंगराज के फायदे और उपयोग। 

पीलिया रोग में सीधा असर जिगर और उसकी कार्य क्षमता को प्रभावित करता है। भृंगराज लिवर को स्वस्थ बनाए रखने का  सर्वश्रेष्ठ औषधि माना जाता है। भृंगराज पीलिया जैसी बीमारी को ठीक करने में बहुत ही प्रभावशाली है। इससिलिये भृंगराज का उपयोग हजारों सालों से जिगर को संतुलित करने और उसके कार्यों को सामान्य रखने के लिए किया जा रहा है। 

पीलिया में  भृंगराज का उपयोग :

पीलिया में  भृंगराज का उपयोग करने के लिए  इसके  १०  ग्राम  पत्ते तथा २ ग्राम साबुत काली मिर्च को पीस कर  इस पेस्ट को दही की छाछ में मिलाकर दिन में दो बार सेवन करें यह प्रयोग  पीलिया रोग को दूर करने का एक बहुत ही अच्छा उपाय है। 

बवासीर में  भृंगराज का उपयोग :

बवासीर की समस्यां होने पर भृंगराज से अच्छा इलाज नहीं हो सकता। क्यों की  भृंगराज संवेदनशील क्षेत्र में सूजन को कम करता है और दर्द से राहत प्रदान करने वाले उत्तम परिणाम देता है। 

भृंगराज का नियमित सेवन से पाचन शक्ति संयमित बनाये रखता है। भृंगराज हमारी बड़ी आंत में पाए जाने वाले विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर करने में हमारी सहायता करता है। 

कब्ज में भृंगराज का उपयोग :

भृंगराज अपच और कब्ज जैसी किसी भी प्रकार की गड़बड़ी को शांत करने में मदद करता है। कब्ज की समस्यां होने पर  प्रतिदिन सुबह में चार से पांच पत्ते भृंगराज के खाए जाएं तो इससे कब्ज और अपच जैसी समस्यां  ठीक होने लगती है। 

पेशाब की समस्यां में भृंगराज का उपयोग :

भृंगराज  के फायदे  मूत्र संक्रमण परेशानी में भी लाभदायक होते हैं। भृंगराज में जीवाणुरोधी और एंटीसेप्टिक गुण होते हैं। जो मूत्र संक्रमण को रोकने और इसके इलाज में बहोत ही  प्रभावी होते  हैं। भृंगराज मूत्र सम्बन्धी संक्रमण की परेशानी को कम करने और मूत्राशय के सामान्य कार्यों को बनाए रखने के लिए इसमें पाए जानेवाले  बैक्टीरिया को बेअसर करता है। महिलाओं में अधिकतर  पेशाब के संक्रमण की समस्यां पाई जाती है। 

इसके उपचार के लिए  भृंगराज के पत्तों में थोड़ा सा पानी डालकर पीस कर फिर उसे छानकर यह रस दिन में दो बार नियमित रूप से सेवन करने से आपको लाभ होगा। 

बालों में भृंगराज के फायदे और उपयोग :

 बालों के लिए भी भृंगराज के तेल के फायदे बहुत उत्तम होते हैं। कई लोगों को समय से पहले बाल झड़ने या पतले होने के साथ-साथ रूसी जैसी बालों से संबंधित कई अन्य समस्याओं का  सामना करना पड़ता है।  भृंगराज को इन समस्याओं को दूर करने में बहोत ही फायदेमंद माना गया है यह सिर्फ मोश्चोराइस करने और रुसी को रोकने के लिए शैंपू के साथ मिलाया जाता है। 

भृंगराज तेल बालों के लिए  भी बहुत उपयोगी होता है।इसका नियमित उपयोग  बालों की लंबाई बढ़ाने में सहायता करता है। नियमित तौर पर भृंगराज तेल बालों में लगाने से बालों की त्वचा में रक्त प्रवाह बढ़ने लगता है। इससे बालों की जड़ें सक्रिय होने लगती हैं  तथा बाल बढ़ने लगते हैं। भृंगराज तेल में आप तील अथवा नारियल का तेल भी मिला सकते हैं। यह सब मिलकर आपके बालों को मजबूती प्रदान करके उन्हें स्वस्थ और घाना बनाते हैं। आयुर्वेद में भृंगराज को सफेद बाल और सिर दर्द के लिए बकरी के दूध के साथ प्रयोग किया जाता है। 

श्वसन में भृंगराज के फायदे और उपयोग :

भृंगराज का पौधा  श्वसन संक्रमण के लिए लाभदायक होता है। भृंगराज का नियमित सेवन श्वसन तथा फेफड़ों के संक्रमण को दूर करने में बहोत उपयोगी होता है। भृंगराज के पत्तों का रस और तिल के तेल की बराबर मात्रा को उबालकर और छान लें और इसका सेवन लगभग आधे से एक चम्मच दिन में दो बार सुबह और रात में करने से फायदा होता है। 

भृंगराज के अर्क में जीवाणु रोधी गुण होते हैं जो श्वसन तथा फेफड़ों के संक्रमण को साफ करते हैं। आयुर्वेद में भृंगराजस्व एक बहुत ही प्रसिद्ध दवा है जिसका मुख्य घटक भृंगराज है। जो आमतौर पर श्वसन संक्रमण सर्दी खासी इत्यादि में लाभदायक मानी जाती है। 

    आँखों में भृंगराज के फायदे और उपयोग :

    भृंगराज फायदे आंखों के लिए भी बहुत अधिक होते हैं।भृंगराज के पौधे की पत्तियों में बहुत ही उच्च मात्रा में कैरोटीन सामग्री होती है। यह सामग्री आपकी आंखों के स्वास्थ्य के लिए एक महत्वपूर्ण एंटी ऑक्सीडेंट तत्व होती  है। 

    यह  कैरोटीन मुक्त कणों को खत्म कर सकते हैं। जो कि आखों की परेशानी जैसे  मोतियाबिंद के परेशानी के कारण होते हैं। भृंगराज से आँखों  दृष्टि को कई सालों तक ठीक रखने के लिए अपने आहार में भृंगराज का सेवन करना चाहिए। 

    आँखों के उपचार में  भृंगराज के पत्तों को छांव में सुखाकर पीस कर उसमें थोड़ा सा भृंगराज चूर्ण लेकर लगभग ३ ग्राम शहद तथा ३ ग्राम गाय का घी मिलाकर नियमित रूप से रोजाना सोने से पहले रात को ४० दिन तक सेवन  करने से आंखों की कमजोरी दूर होती है। इसके साथ-साथ दृष्टि और आंखों से संबंधित सभी समस्याएं दूर होती है। 

    भृंगराज के नुकसान :

    भृंगराज के नियमित सेवन से वैसे तो कोई नुक्सान नहीं होते हैं। लेकिन कुछ स्वास्थ्य परिस्थितियों में हमेशा संवेदनशील व्यक्तियों में एलर्जी की प्रतिक्रिया हो सकती है। 

    स्तनपान कराने वाली महिलाएं भृंगराज का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन गर्भवती महिलाओं को इस शक्तिशाली जड़ी बूटी का उपयोग करने से पहले अपने वैद्य या डॉक्टर से सलाह जरूर लेने चाहिए। 

    भृंगराज बाल चिकित्सा और स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए दवाओं में प्रयोग किया जाता है। 

    भृंगराज का  अत्यधिक मात्रा में सेवन ना करें। हमेशा ध्यान रखें कि कोई भी औषधि हो परन्तु किसी भी औषधियों का अति सेवन नहीं करना चाहिए। हमें कसी भी औषधि का उपयोग करना हो तो उसका सही मात्रा में ही इस्तेमाल करना चाहिए।

    आज के इस  लेख में भृंगराज की जानकारी आपको कैसी लगी। इस लेख में मैनें भृंगराज के फायदे और उपयोग के बारें में आपके मन की कई सवालों का जवाब देने की कोशिश की है इस लेख में भृंगराज के कुछ नुक्सान के  भी बताया है। यदि आपके मन में भी भृंगराज के विषय में कोई सवाल हो तो निचे कमैंट्स कर सकतें है।  में अवश्य ही आपके सालों का जवाब देने की कोशिश करूँगा। 

    आशा करता हूँ भृंगराज की जानकारी, फायदे और उपयोग विषय आपको अच्छा और उपयोगी लगा हो तो इसे अन्य सोशल मीडिया Facebook और Whatsap पर शेयर जरूर करें। हमारे धरती की ऐसी ही महत्वपूर्ण जानकारी के लिए Main Page पर जाएँ।