सेमल (शाल्मली) वृक्ष के चमत्कारी फायदे और उपयोग।

सेमल (शाल्मली) वृक्ष के चमत्कारी फायदे और उपयोग।

सेमल (शाल्मली) वृक्ष के चमत्कारी फायदे और उपयोग। 

आयुर्वेदिक ग्रंथों में सेमल वृक्ष (शाल्मली) की अधिक प्रशंसा की गई है। सेमल को शाल्मली नाम से भी जाना जाता है। आयुर्वेद में  इसके अनेक औषधीय गुण बताए  हैं।  

इसके औषधीय गुणों को देखते हुवे इसे साइलेंट डॉक्टर भी कहा जाता है। सेमल के उपचार से होने वाले लाभ जानकर आप भी हैरान रह जायेंगे। 

आप में से कई लोग ऐसे हे जिन्होनें सेमल का नाम शायद ही सुना होगा। इसलिए सेमल के पेड़ की पहचान तो दूर, इस पेड़ के सामने होने पर भी आपको सेमल के पेड़ की पहचान और इसके अनगिनत फायदों के बारें में जानकारी नहीं होगी। 

इसलिए मेंने सोचा क्यों न सेमल वृक्ष के बारें में आपको विस्तार से जानकारी दूँ। इस चमत्कारी वृक्ष के उपयोग और इससे होने वाले फायदों के बारें में जानकर आप ज़रूर चौंक जायेंगे। 

तो चलिए बिना देरी किये आज का हमारा विषय सेमल (शाल्मली) वृक्ष के चमत्कारी फायदे और उपयोग शुरू करते है। 

सेमल (शाल्मली) की जानकारी :

सेमल (शाल्मली) का वैज्ञानिक नाम बॉम्बेकेसी  (Bombax Ceiba) है। यह एक औषधीय पेड़ है। सेमल की खेती भारत, मलेशिया, श्रीलंका, ऑस्ट्रेलिया, और अफ्रीका में की जाती है। 

यह औषधिय वृक्ष होने से इस पेड़ का विभिन्न प्रकार की बीमारियों के इलाज में उपयोग किया जाता है। 

सेमल का पेड़  भारत में लगभग सभी स्थानों पर देखा जा सकता है। सेमल का पेड़ विशाल होता है। सेमल के वृक्ष की जैसे जैसे आयु बढ़ती है यह बड़ा होता जाता है। 

इस वृक्ष के तने पर मोटे और गोल कांटे होते हैं। इन कांटों को यदि खाया जाए तो इन काँटों का स्वाद पान में डालने वाली सुपारी की तरह लगता हैं। 

बसंत ऋतु में इस पर फूल खिलते हैं। तब इस पूरे वृक्ष पर फूल ही फूल दीखते हैं। तभी  इसके सभी  पत्ते झड़ कर गिर जाते हैं। उस समय यह देखने में बहोत सुंदर लगते है। सेमल के फूल आकार में  काफी बड़े और मोटे होते है। 

सेमल के ज्यादातर  फूल जमीन पर गिर जाते हैं और कुछ ही फूल इस पेड़ पर रह जाते हैं।  इन फूल के अंदर फलियां बन जाती हैं। 

यह फलियां आक के पौधों की फलियों की तरह दिखती हैं। जिसके अंदर काफी सारी रुई होती है। इन फलियों को सेमल मूसली कहते हैं। यह सेमल रुई अनेक प्रकार के औषधीय गुण रखती है।

सेमल के वृक्ष से  एक प्रकार का गोंद निकलता है।  इस गोंद को मोचरस कहते हैं। यह गोंद बहुत ही गुणकारी होता है। 

इस गोंद का औषधीय प्रयोग में उपयोग  किया जाता है। सेमल के पेड़ को अन्य क्षेत्रों में विभिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे की। .. 

सेमल के अन्य भाषाओँ में नाम :

हिन्दी - सेमर, सेमल  

English - Bombex,  Red Silk Cotton Tree

संस्कृत - शाल्मलि, मोचा, पिच्छिला, पूरणी, रक्तपुष्पा, स्थिरायु, तूलिनी

गुजराती - शीमलो , सीमुलो 

मराठी - कांटे सांवर, लाल सांवर, शेमल, सरमलो 

कोंकणी - सेनवॉर, सॉवोर

बंगाली - पगून, शिमुल गाछ, रोक्तो सिमुल 

नेपाली - सीमल 

मलयालम - ईलावू, मोचा

उड़िया - बूरो , सालमली

कन्नड़ - पूला, अपूररनी, बुरागा, अपूरनी

तमिल - ईलावू , फलाई

तेलुगु - बूरागा , बूरूगा चेट्टु

सेमल फूल :

सेमल (शाल्मली) वृक्ष के चमत्कारी फायदे और उपयोग।

सेमल का तना :

सेमल (शाल्मली) वृक्ष के चमत्कारी फायदे और उपयोग।


सेमल के फायदे और उपयोग :

मासिक विकार ठीक करें सेमल के फायदे :

मानसिक विकार की समस्यां होने पर सेमल के रुई का तकिया बना कर इस्तमाल करने से  माइग्रेन, सिरदर्द, अनिंद्रा जैसे रोग आसानी से ठीक हो जाते हैं।  इस प्रयोग को करने पर आपको किसी प्रकार की दवाई खाने की आवश्यकता नहीं पड़ती। 

और जानिए :

बवासीर रोग में सेमल फूल के फायदे :

बवासीर रोग में सेमल के ५  ग्राम फूलों को लगभग २०० ml दूध में उबालकर  शक्कर डालकर पीने से बवासीर रोग  धीरे धीरे ठीक होने लगता है। यह बहोत ही सरल और रामबाण प्रयोग है। 

पीलिया और लिवर में सेमल फूल का उपयोग :

पीलिया एवं लिवर रोगों को दूर करने के लिए रात में ७   से ८  ग्राम सेमल के फूलों को पानी के भांप (steam) में उबालकर इन  फूलों में १ ग्राम राई मिलाकर सेवन करने से पीलिया रोग और लीवर सम्बन्धी लगभग सभी परेशानी दूर होती है। 

महिला रोगों में सेमल फूल के लाभ :

महिलाओं के प्रदर रोगों में सेमल फूल की सब्जी बनाकर  खाने से बहुत ही अच्छे लाभ देखने को मिलते है। सेमल का फूल खाने के यह फायदे बहोत सरल और लाभकारी है। 

पौरुष विकारों में सेमल की छाल का उपयोग :

सेमल की छाल के साथ शंखपुष्पी  के चूर्ण को बराबर मात्रा में मिलाकर २ से ४  ग्राम की मात्रा में दूध के साथ सेवन करने से सभी प्रकार के वीर्य विकार नष्ट हो जाते हैं। इस प्रयोग से  शारीरिक कमजोरी भी दूर होती है। 

इसको आप शक्तिवर्धक और वीर्य वर्धक  के रूप में भी उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए गुडुजी, शतावरी, शुद्ध कौंच के बीज, वाला, सेमल और मूसली का चूर्ण बराबर मात्रा में लेकर २ से ४ ग्राम की मात्रा में सुबह - शाम दूध के साथ सेवन करने से सभी प्रकार के वीर्य विकार, धातु रोग, स्वप्न दोष आदि दूर होते हैं।  इससे प्रयोग से शरीर में शक्ति का संचार होता है।  साथ ही शारीरिक एवं मानसिक शक्ति बढ़ती है। 

चहेरे की सुंदरता में सेमल के उपयोग :

चहेरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए सेमल वृक्ष के तने पर जो कांटे लगते हैं उनको तोड़ कर उन कांटों को पत्थर पर दूध या पानी की सहायता से चंदन की तरह घिसकर चेहरे पर लगाने से चेहरे के कील मुहांसे और झाइयां जैसी समस्याएं दूर होती हैं। इस प्रयोग से चेहरे की सुंदरता बढ़ती है। 

रक्त पित्त रोग में सेमल के उपयोग :

सेमल के फूलों को सुखाकर चूर्ण बना कर  शहद में  मिलाकर चाटने से रक्त पित्त रोग ठीक हो जाता है। 

सूजन में सेमल के पत्तों का उपयोग :

शरीर के किसी भी अंग पर सूजन होने पर सेमल के पत्तों को पीसकर लेप करने से सूजन जल्दी उतर जाती  है। 

पथरी की समस्यां में सेमल की छाल का उपयोग :

सेमल की छाल का प्रयोग पथरी की समस्यां में बहोत ही लाभकारी है। इस प्रयोग को करने के लिए सेमल की छाल को पीसकर दूध के साथ सेवन करने से बहोत जल्दी पथरी निकल जाती है। 

बच्चों के दस्त में सेमल का उपयोग :

सेमल की गोंद थोड़ी सी मात्रा में बच्चों को खिलाने से दस्त में बहोत लाभ होता है। 

स्वप्न दोष में सेमल जड़ का उपयोग :

सेमल की जड़ का पाउडर, विधारी की जड़ का पाउडर, शतावर और मिश्री को अच्छी तरह से मिलाकर  दिन में दो बार दूध के साथ इस मिश्रण का सेवन करने से लाभ मिलता है।  

खून की सफाई में सेमल का उपयोग :

खून की  सफाई के लिए  सेमल की जड़ी- बूटी का  पर्याप्त मात्रा में सेवन किया जाए तो यह जड़ी-बूटी खून को  साफ करने में लाभकारी है। 

ल्यूकोरिया में सेमल की जड़ का उपयोग :

 ल्यूकोरिया की समस्यां होने पर सेमल की जड़ को अच्छे से धो कर अच्छे से सुखाने के बाद पाउडर तैयार कर लें। इस पाउडर को दिन में दो बार पानी या दूध के साथ सेवन कर सकते हैं। 

महिलाओं की समस्यां में सेमल की जड़ का उपयोग :

सेमल की जड़ के पाउडर मुलेठी पाउडर और स्वरगेरु के साथ मिलाकर दिन में दो बार पानी के साथ इस मिश्रण का सेवन करने से फायदा होगा। 

शरीर पर घाव होने पर सेमल की छाल का उपयोग :

शरीर पर किसी प्रकार के घाव  होने पर सेमल की छाल को अच्छे से साफ करके पेष्ट बनाकर घाव पर लगाएं। यह प्रयोग  दिन में  चार से पांच बार करने से घाव जल्दी ठीक होते है। 

शारीरिक कमजोरी में सेमल के फूल का उपयोग :

सेमल के फूल के हरे भाग को अच्छे से साफ करने के बाद छाया में सुखाकर पाउडर तैयार कर लें।  इस पाउडर को दूध के साथ शहद और देसी घी मिलाकर दिन में एक बार इसका सेवन करें। इससे शरीर में ताकत का संचार होता है। 

मूत्र विकारों में सेमल का उपयोग :

किसी भी प्रकार की मूत्र सम्बन्धी समस्याओं में सेमल की छाल का उपयोग कर सकते हैं। यह जड़ी-बूटी मूत्र विकारों में बहुत ही लाभकारी है। 

    महिलाओं के दूध बढ़ाने में सेमल का उपयोग :

    सेमल की जड़ी-बूटी स्तन दूध को बढ़ाने में लाभकारी मानी गई है। इसके लिए सेमल की जड़ की छाल को अच्छे से साफ करें। इसके बाद इस जड़ को सुखाकर पाउडर बना लें।  इस पाउडर का दिन में २  बार सेवन करें इससे दूध बढ़ने में बहोत मदद मिलेगी। 

    जानने लायक विषय :

    हमारी धरती के कई सारे पेड, पौधे और वनस्पति हमारे लिए अमूल्य वरदान है। इसी में से एक सेमल (शाल्मली) वृक्ष भी है। 

    आशा करता हु इस लेख से आपको सेमक के पेड़ के बारें में काफी कुछ उपयोगी जानकारी प्राप्त हुवी होगी। यदि आपके पास भी इस लेख से सम्बंधित कोई सवाल या सुझाव हे तो निचे कमेंट्स में हमें जरूर बताएं। 

    इसलिए मेने इस लिख में सेमल के चमत्कारी फायदे और उपयोग के बारें में जानकारी दी है। आपको इस लेख से सेमल के बारें में काफी कुछ नयी और उपयोगी जानकारी प्राप्त होगी। 

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