पलाश असाधारण पेड़ के लाभ और उपयोग।

पलाश असाधारण पेड़ के लाभ और उपयोग।

पलाश असाधारण पेड़ के लाभ और उपयोग।

हमारा यह सौभाग्य है की हम भारत देश में रहते है। भारत में बहोत सारे पेड़, पौधे और वनस्पतियां ऐसी है जो बहुत ही  प्रभावशाली  है। अन्य देशों में ऐसी  प्रभावशाली औषधियां उपलब्ध नहीं है। उनमें से एक है पलाश का पेड़। इसलिए हमें भारत की वनस्पतियों की रक्षा और रोपण करना चाहिए। 

इससे हमारी आने वाली नयी पढ़ी को पलाश जैसे असाधारण पेड़  भविष्य के लिए उपलब्ध हो सकें। और पलाश पेड़ से मिलने वाले लाभ और इसका उपयोग कर सकें। मगर ज्यादा तर लोग इस असाधारण पेड़ की जानकारी के आभाव के कारण इसके लाभ और उपयोग से अनजान है। 

तो मेने सोचा क्यों न आपको  पलाश पेड़ की जानकारी और इसके औषधीय उपयोग के बारें में विस्तार से जानकारी दूँ। इसीलिए इस लेख में मैनें  बताया है, की पलाश का उपयोग  किस तरह से हमारे स्वस्थ को बेहतर रखने में  किया जाता  है। और किन स्वास्थ सम्बन्धी समस्यां होने पर  किस  तरह से किया जाता है । तो चलिए हमारा आज का विषय पलाश असाधारण पेड़ के लाभ और उपयोग शुरू करते है। 

पलाश की जानकारी :

पलाश का वानस्पतिक नाम ( Butea monosperma ) है। पलाश को टेसू के नाम से भी जाना जाता है। यह संपूर्ण भारत में पाया जाता है। यह आपको कहीं भी देखने को मिलेगा  सड़कों के किनारे, किसी खाली पड़ी जमीन पर, किसी बगीचे में आदि। यह  पेड़ बहुत ही आसानी से मिल जाता है। बसंत रितु यानी कि गर्मी के मौसम में इस पर फूल खिलते हैं। तभी इस पूरे पेड़ पर फूल ही फूल हो जाते हैं और पूरे पत्ते झड़ जाते हैं। 

पलाश की कई प्रजातियां पाई जाती हैं। उनमें  कई अंतर होते हैं। पलाश तीन प्रकार के होते हैं। जो फूलों के रंग के आधार पर पहचाने जाते हैं। जैसे की.... 

१) सफेद पलाश इसमें सफेद रंग के फूल लगते हैं। 

२) पीला पलाश जिसमें पीले रंग के फूल लगते हैं। 

३) और लाल पलाश  जिसमें सिंदूरी रंग के फूल खिलते हैं। 

४) बैल पलाश भी होता है। बैल पलाश झाड़ी नुमा किसी बैल की तरह होता है। इसके पत्ते छोटे छोटे होते हैं लेकिन पलाश के पत्ते जैसे लगते हैं। इस पलाश के पेड़ का बहुत ही महत्वपूर्ण और प्राचीन काल से ही किसी न किसी रूप में इस पलाश का प्रयोग किया जाता रहा है। प्राचीन समय से ही हमारे आयुर्वेद में  इसकी काफी सारी प्रशंसा की गई है। इस लेख में आपको इसके काफी सारे औषधीय भी प्रयोग के बारे में भी जानने को मिलेंगे। 

पलाश का महत्व :

पलाश का महत्व और उपयोग प्राचीन समय से ही होता आया है। सालों पहले तक इस पलाश के पेड़ के पत्तों के द्वारा कटोरी और थाली बनायीं जाती थी। कहीं-कहीं पर आज भी इसके पत्तों से कटोरी और थाली बनाने में उपयोग किया जाता है। 

पलाश के पेड़ की लकड़ी का प्रयोग यज्ञ, हवन आदि में भी किया जाता है। यज्ञ में चंदन की लकड़ी, आम की लकड़ी, पलाश की लकड़ी इस प्रकार की काफी सारी लकड़ियां होती है  जिनका प्रयोग किया जाता है। उनमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण  पलाश की लकड़ी होती है। 

पलाश की लकड़ी को जलाने पर हमारे वायुमंडल में होने वाले हानिकारक जीवाणु, वायरस खत्म हो जाते हैं। इससे वायुमंडल शुद्ध  होता है। इसलिए यज्ञ करते समय में पलाश लकड़ी का उपयोग किया जाता है। 

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पलाश की पहचान :

पलाश की पहचान इसके पत्ते से हो जाती है। इसके के पत्ते तीन - तीन के जोड़े में  थोड़े दूर दूर होते हैं। लेकिन ये  तीन - तीन के जोड़े में ही रहते हैं। यह पत्ते कहीं पर छोटे होते हैं और कहीं पर बड़े हो जाते हैं। सभी प्रकार के पलाश के पत्ते इसी प्रकार से तीन - तीन के जोड़े में ही लगते  हैं। 

पलाश के फूल की पहचान यह है के इसके फूल देखने में बहुत ही सुंदर होते है और यह  दूर से ही दिख जाते हैं। यह फूल बहुत ही चमकीले  होते हैं। देखने पर वह फूल टेड़े दिक्ते है। यानी के फूल बिल्कुल सीधे नहीं होते हैं शुरू से ही टेड़े होते हैं। पलाश के फूलों की एक विशेषता यह भी है कि इन फूलों के अंदर किसी प्रकार की गंध या खुशबू नहीं आती। पलाश के फूलों को टेसू के फूल भी कहा जाता है अलग-अलग क्षेत्रों में इस पलाश को विभिन्न नामों से जाना पहचाना जाता है। जैसे की.... 

पलाश के अन्य भाषाओँ में नाम :

English - Bastard teak,  Bengal kino,  Butea gum

संस्कृत – पलाश, किंशुक, पर्ण, रक्तपुष्पक, क्षारश्रेष्ठ, वाततोय, ब्रह्मवृक्ष;

हिंदी - ढाक, पलाश, परास, टेसु;   

गुजरती - खाखड़ा 

मराठी - पलस 

बंगाली - पलाश गाछ

नेपाली - पलासी

ओड़िया - पोलासो 

उर्दू - पलाश पापरा 

मलयालम – किमशुकम, पलासी

कन्नड़ – मोदुगु, मुथुगा 

तमिल - पलासु

तेलुगु – मोडूगा 


पलाश के फूल :


पलाश के फल (फलियां) :



पलाश का उपयोग :

होली के त्यौहार पर पलाश के फूलों का काफी ज्यादा महत्व होता है। प्राचीन काल में पलाश के फूलों से  प्राकृतिक रंग बनाये जाते थे और इनसे होली खेली जाती थी। इसके फूलों को पानी में उबालकर रंग तैयार किया जाता था।  इस रंग से होली खेलने पर त्वचा को किसी प्रकार का नुकसान नहीं होता था। हमारे शरीर को  बल्कि  इस रंग से होली खेलने पर सभी प्रकार के त्वचा रोगों में लाभ होता था। आज भी कुछ क्षेत्रों में इस पलाश के फूलों से होली खेली जाती है। 

पलाश के फूलों के बाद में इस में फलियां लगने लगती है। यह फलियां बहुत लंबी लंबी होती है। फलियां लगने पर इसके  फूल झड़ने लगते हैं, इसके बाद बाद इस पर पत्ते भी आने लगते हैं।  फलियों के चपटे और गोल बीज निकलते हैं।इन बीजों का भी आयुर्वेद में बहुत महत्व है। मानाजाता है कि इन बीजों की उचित मात्रा में सेवन किया जाए तो यह शरीर का कायाकल्प कर देते हैं। पलाश के बीजों के उचित सेवन से  शरीर में  जितनी भी अशुद्धियां भरी होती है, वह सभी बहार निकल जाती हैं। 


पलाश की कोमल लकड़ी और पलाश से निकलने वाला गोंद भी  भी बहुत ही औषधीय गुण रखता है। जिन्हें जानकर आप को बड़ा आश्चर्य होगा कि यह साधारण दिखने वाला पलाश का पेड़ असाध्य रोगों को भी दूर कर सकता है। तो जानते है पलाश के औषधीय गुण। 

पलाश के औषधीय उपयोग :

आँखों के लिए पलाश का उपयोग :

आंखों के सभी प्रकार के रोग यहां तक कि मोतियाबिंद, रतौंधी जिसमें शाम के वक्त कम दिखाई देता है और आंखों का इन्फेक्शन (Infection) आदि समस्याओं को दूर करने के लिए। पलाश की  हरी और कोमल टहनियों को लेकर उसका अर्क  निकाल कर आंखों में दो-दो बूंद टपकने से आंखों की समस्याएं बहोत ही जल्दी दूर हो जाती हैं। 

नकसीर में पलाश का उपयोग :

नकसीर की परेशानी में नाक से खून आने लगता है। इस समस्यां को दूर करने के लिए  पलाश के ५  से  ७   फूलों को रात में पानी में गला कर फि र उनको मसलकर छानकर पीने से नकसीररोग ठीक हो जाता है।इस प्रयोग को करने से पहले ही दिन से आराम मिलने लगता है। 

पेट में पलाश का उपयोग :

पलाश शरीर से  सभी प्रकार के टोक्सिन (टोक्सिन) को बाहर निकालता है। यह जीवाणुओं को भी नष्ट करता है। पेट में कीड़े होने पर पलाश के बीजों का चूर्ण १  से २  ग्राम की मात्रा  दिन में दो बार खाने से पेट के कीड़े नष्ट हो जाते हैं। 

इसके सेवन से पेट दर्द की समस्या भी दूर होती है। भूख ना लगने की समस्या में भी पलाश की टहनिओं का रस पान के रस के साथ सेवन करें तो भूख बढ़ जाती है। 

पलाश की महत्वपूर्ण बात यह  हैं कि पलाश का पेड़ जहरीला नहीं होता। इसलिए इसकी उचित मात्रा में सेवन करने से अच्छे लाभ मिलते हैं। 

अतिसार रोग को दूर करने के लिए पलाश के बीजों के चूर्ण में एक चम्मच बकरी का दूध मिलाकर खाने से अतिसार रोग ठीक होता है। यह प्रयोग दिन में  २ से ३  बार करना चाहिए। 

बवासीर में पलाश का उपयोग :

खूनी बाबासीर को दूर करने के लिए पलाश का पंचांग बना लें। पंचांग बनाने के लिए इसके फूल, पत्ते, जड़ और तना इन सभी को लेकर भस्म बना लें। भस्म बनाने  के लिए इन सभी को  मिट्टी के बर्तन में डालकर उसको आग लगाए तो बन जाएगी। इस भस्म को  १ से २  ग्राम की मात्रा में  गाय के घी के साथ सेवन करने से खूनी बवासीर ठीक हो जाता है  तथा मस्से भी सूख जाते हैं। 

मूत्र सम्बन्धी परेशानी में पलाश का उपयोग :

मूत्र संबंधी विकारों को दूर करने के लिए पलाश रामबाण दवा है। पलाश के फूलों की पोटली बनाकर उसको पानी में उबालकर गुनगुना पेंडू पर बांधने से सूजन दूर होती है। १० से २०  ग्राम पलाश के फूलों को रात में पानी में मिलाकर रख दें और सुबह उनको मसलकर मिश्री मिलाकर पीने से भी  मूत्र संबंधी सभी विकार दूर होते हैं। यह पथरी को दूर करता है गुर्दे में दर्द , मूत्र त्याग करते समय रक्त का आना आदि समस्याएं दूर करता है। 

महिलों की परेशानी में पलाश का उपयोग :

प्रमेह रोगों को दूर करने के लिए इसके फूलों का चूर्ण बनाकर सेवन करना चाहिए। महिलाओं में प्रदर रोग को दूर करने के लिए भी यह रामबाण दवा है। लिकोरिया, सफेद पानी की शिकायत इसके सेवन से एक-दो दिन में ही  ठीक हो जाती है। 

इसके फूलों को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर और इनमें  मिश्री  मिलाकर एक दो चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम लेना चाहिए। या फिर इसके फूलों को रात में पानी में गला कर  सुबह में  मसलकर मिश्री मिलाकर पीने से बहुत ही अच्छे लाभ मिलते हैं। पलाश की कोमल डंडियों को पीसकर रस निकालकर एक-एक चम्मच की मात्रा में पीने से भी लाभ होता है। 

कुष्ठ रोगों में पलाश का उपयोग :

कुष्ठ रोग, चर्म रोगों को दूर करने के लिए पलाश केबीज, शुद्ध गंधक और चित्रक इन सभी को लेकर बारीक चूर्ण बनाकर १ से २ ग्राम की मात्रा में सुबह-शाम पानी के साथ कम से कम १ महीने तक सेवन करने से आश्चर्यजनक लाभ मिलते हैं। 

दाद, खाज, खुजली में पलाश का उपयोग :

सभोई प्रकार की दाद को दूर करने के लिए पलाश के बीजों को नींबू के रस में मिलाकर लगाने से दाद, खाज, खुजली ठीक होती है। 

मिर्गी में पलाश का उपयोग :

मिर्गी आने की समस्यां होने पर पलाश के पेड़ की  छोटी सी जड़ लेकर उसको  पीसकर रस निकलकर  एक से दो बूंद नाक में टपकने से मिर्गी के दौरे आना बंद हो जाते हैं। 

पलाश मनुष्य की आयु को बढ़ाता है इसका सेवन शरीर के लिए शक्तिशाली है।  यह शरीर में से विषैले तत्वों को बाहर निकालता है। इसके लिए पलाश की पंचांग का एक चम्मच चूर्ण,२  चम्मच शहद और १  चम्मच घी सुबह-शाम सेवन करने से शरीर निरोगी रहता है। 

इसके सेवन से मनुष्य की  की आयु बढ़ती है और शरीर से सभी प्रकार के रोग भाग जाते हो। इसकी मात्रा आप अपने हिसाब से ज्यादा हुए कम कर सकते हैं। 

पलाश के फूलों को सुखाकर बारीक चूर्ण बनाकर उसमें  मिश्री मिलाकर थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सेवन करने से पलाश के काफी सारे औरऔषधीय लाभ प्राप्त होते हैं। 

जानने लायक विषय :


बिच्छू के काटने पर पलाश का उपयोग :

इसके बीजों को पीसकर बिच्छू के काटे हुए स्थान पर लगाने से बिच्छू का जहर उतर जाता है। 

पलाश के और भी काफी सारे अनगिनत लाभ और उपयोग है। मेरे इस लेख में मैनें पलाश के बारें में विस्तार से जानकारी दी है। इसमें मैनें आपके सभी सवालों का जवाब दिया है। यदि मुझसे कोई सवाल छूट गया हो या फिर आपको मुझसे कुछ पूछना हो तो निचे कमैंट्स में पूछ सकते हो। में अवश्य ही आपके सवाल का जवाब देने की कोशिश करूँगा। 

मुझे आशा और उम्मीद हैं कि आज की पलाश असाधारण पेड़ के लाभ और उपयोग के विषय में जानकारी आपके लिए बहुत ही लाभकारी रही होगी। ऐसी ही रोचक और उपयोगी जानकारी पाने के लिए मेरी इस HindiPlant वेबसाइट से जुड़े रहिये। यदि ये पोस्ट में दी गयी जानकरी आपको अच्छी और उपयोगी लगी हो तो इसे सोशल मीडिया Facebook और Whatsapp पर हरे करिये।