शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । Shisham Tree Hindi

शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । shisham Tree Hindi

शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । Shisham Tree Hindi 


शीशम का पेड़ दुनिआ के कई देशों में पाया जाने वाला बहोत ही खूबसूरत पेड़ है।  यह मैदान में उगनेवाला पेड़ है। जो की लगभग १५०० मिटेर की ऊंचाई तक पाया जाता है। इसकी ऊंचाई ३० मीटर और मोटाई १ मीटर तक होती है।

शीशम बहोत उपयोगी पेड़ है। इसकी लकड़ी, पत्ते और जड़ें सभी का उपयोग किया जाता है। शीशम की लकड़ी का उपयोग मुख्यतः मकान बनाने और फर्नीचर बनाने में किया जाता है। इसकी लकड़ी बहोत ही मूलयवान होती है। इसकी लकड़ी से बना हुवा सामान बहोत टिकाऊ और मज़बूत होता है। इसके आलावा भी शीशम के बहोत सारे ऐसे गुण भी हे जिनके बारें में हम पूरी तरह से परिचित नहीं, तो मेने सोचा क्यों न में आज आपको शीशम के पेड़ के बारें में विस्तार से  जानकारी दूँ जो आपको कभी न कभी उपयोगी होगा और साथ - साथ आपका ज्ञान भी बढ़ेगा, तो चलिए हमारा आज का विषय शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । Shisham Tree Hindi   के बारें में शुरू करते है। 

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शीशम का परिचय और पहचान : 


शीशम के पेड़ की पहचान करना आसान है। शीशम दूसरे पेड़ों की तरह एक विशाल और मज़बूत पेड़ है। शीशम की पत्ती दोनों तरफ से नुकीली होती है। शीशम के पत्ते पुराने होने पर पीपल के पत्तों की तरह नुकीले हो जाते है। मगर नए पत्ते पुराने पत्तों के मुकाबले कम नुकीले होते है। आकार की बात की जाये तो पीपल के पेड़ के पत्तों के मुकाबले ये छोटे होते है।  रंग की बात करें तो शीशम के पत्ते  पीपल के पत्तों के मुकाबले  चिकने, गहरे और चमकीले रंग के होते है। 

शीशम के पेड़ पर नवंबर और दिसम्बर में अधिक मात्रा में छोटी छोटी १  से २ दानों की फलिया लगती है। शीशम के पेड़ का तना खुरदरा होता है और शाखाएं चिकनी होती है।  इसका रंग भूरा होता है। शीशम के फूल पिले रंग के होते है और गुच्छों में लगते है। शीशम की पत्तियां पशु और पक्षिओं के लिए उत्तम और प्रोटीनयुक्त चारा होती  है। इसकी जड़ें जमींन के लिए उपयोगी होती है। शीशम की लकड़ियों और बीजों से जो तेल मिलता है उस तेल का  उपयोग औषधियां बनाने में किया जाता है। 

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शीशम के पेड़ का वैज्ञानिक नाम : Dalbergia  Sissoo  है। शीशम के पेड़ को अन्य भाषाओँ में अलग अलग नाम से जाना जाता है जैसे की। .. 

अन्य भाषाओँ में शीशम के नाम : Sheesham names in other languages:

हिंदी : शीशम, सीसम, शीसो, शिसव 
ENGLISH : South India, Rose wood ( साउथ इंडियन रोज वुड )
संस्कृत : शशांप, पिप्पला 
उर्दू : शीशम
ओरिया : पादिमि, सीसु 
आसाम : सिसु 
कन्नड़ : बिरडी 
गुजरती : सीसोम, सीस 
तेलुगु : सिंसुपा 
तमिल : गेटे, मुक्कोगेटे 
बंगाली : शिसु 
नेपाली : बांदरे, शिरिण 
पंजाबी : नेलकर 
मलयालम : इरूविल 
मराठी : शीशम 
अरेबिक : सासम, सासीम 

शीशम के फूल : Rosewood :

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शीशम के पत्ते : Rosewood leaves:

शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । Shisham Tree Hindi


शीशम की फलियां : Rosewood beans:

शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । Shisham Tree Hindi



शीशम की २ किस्म होती है। 

१) देसी शीशम : देसी शीशम के पेड़ को पूरी तरह से व्यस्क होने में २५ से ३० साल का समय लगता है। 

२) हायब्रिड शीशम: हाइब्रिड शीशम को लैब में तैयार किया जाता है और इसे तैयार होने में १० से १२ साल का समय लगता है। 


शीशम के पेड़ को कहीं पर भी उगाया जा सकता है। घर आँगन में रास्ते के दोनों और स्कूल के परिसर में जहाँ भी चाहो इसे लगा सकते है। ख़ास कर यह हमें रास्तें के दोनों और दिखायी पड़ते है। 

शीशम के पेड़ लगाने हो तो  इसे पानी वाली जगह कम ही लगाना चाहिए। जहाँ पानी ठहरता हो और नदी और तालाब के किनारे भी इसे लगाने से परहेज करना चाहिए। क्यों की ज्यादा पानी से इसकी जड़ें  सड़  जाती है और फफूंद की बीमारी होने की संभावनाएं  भी ज्यादा होती है। 

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शीशम के औषधीय गुण : Benefits of Rosewood In Hindi 


भारत में ऐसा कोई पेड़ नहीं है जिसके औषधीय फायदे न हो।  वैसे ही आयुर्वेद में भी शीशम के पेड़ के बहोत महत्त्व  पूर्ण फायदे बताये हे  जिनकी जानकारी  हमें ठीक से पता  नहीं होती।  तो शीशम की औषधीय  गुण क्या हे जिसका हम घरेलु उपचार में उपयोग कर सकते है।  इस बारें में हम आगे जानेंगेके शीशम का उपयोग किन किन बिमारियों को ठीक करने में कर सकते है। 

  • शीशम रक्तविकार,  टीबी, सभीप्रकार के चर्म रोग, मासिक सम्बन्धी विकार, मूत्र सम्बन्धी विकार, सफ़ेद पानी की समस्या, मधुमेह जैसे बिमारियों को ठीक करने में शीशम के पेड़ का उपयोग कर सकते है। 
  • सभी प्रकार के चर्म रोगों में शीशम का उपयोग किया जाता है। शीशम के तेल को दाद, खाज, खुजली और फोड़ों  पर लगाने से बहोत ही अच्छे लाभ मिलते है। 
  • शीशम की छाल का सुबह शाम नियमित काढ़ा बनाकर पिने से कुष्ट रोग ठीक हो जाता है। 
  • शीशम के पत्तों को पीसकर चटनी बनाकर उसमें तिल्ली के तेल मिलाकर चर्म रोगों पर लेप करने से चर्म रोग ठीक हो जाते है। 
  • शीशम के पत्तों का काढ़ा बनाकर नियमित पीया जाए तो चर्म रोगों और कोढ़ के रोगों  में फायदा होता है। 
  • शीशम के पत्तों को नियमित चबा ने से रक्त शुद्ध होता है। शीशम के पत्तों को छाया में सुखाकर चूर्ण बनाकर रोज़ ५ ग्राम की मात्रा पानी के साथ सेवन करने से रक्त विकार की समस्या दूर होती है। यदि चूर्ण न बनाकर इसे ४ से ५ पत्तों को चबाने से भी लाभ मिलता है। 
  • शीशम के पत्ते महिलाओं की ल्यूकोरिया की समस्या, नियमित मासिक धर्म, रक्तप्रदर पुरुषों में  मूत्र विकार जैसे समस्याओं में बहोत लाभकारी होता है। इसका उपयोंग शीशम के पत्तों के चूर्ण में मिश्री मिलाकर कर सकते है। 
  • शीशम की छाल का काढ़ा बनाकर रोजाना सुबह शाम पिने से सायटिका रोग में बहोत ही अच्छा लाभ होता है। 
  • महिलांओं के स्तनों पर सूजन होने पर इसके पत्तों का काढ़ा बनाकर स्तन  धोने से सूजन उतर जाती है। या फिर इसके पत्तों को पीसकर स्तनों के ऊपर  लेप करने से भी सूजन उतर जाती है। 
  • शीशम महिलाओं की काफी सारि  समस्याओं को ठीक करने में मदद करता है। 
  • मासिक धर्म में शीशम के पत्तों के चूर्ण का सेवन करने से मासिक धर्म की रूकावट दूर होकर मासिक धर्म नियमित होता है। 
  • शीशम के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिने से मासिक धर्म में होने वाले दर्द  में आराम मिलता है। मासिक धर्म की समस्याओं को दूर करने के लिए आप इसके पत्तों को पीसकर रस निकालकर पिने से भी फायदा होता है। 
  • अनियमित मासिक धर्म की समस्याओं में भी ८ से १० पत्तों को पीसकर मिश्री मिलाकर काढ़े का सेवन करने से भी मासिक धर्म नियमित होता है। 
  • पुरुषों की मूत्र त्याग से होने वाली जलन से मुक्ति पाने  के लिए इसके ७ से ८ पत्ते चबाने से आराम मिलता है और जलन दूर होती है। और पेड़ में बढे हुवे पित्त को ख़त्म करता है। 
  • जिन महिला, बच्चो और  पुरुषों को खून की कमी होने पर इसके पत्तों को पीसकर  निकले  हुवे रस की १० ग्राम मात्रा को नियमित पिने से रक्त की कमी दूर होती है। 
  • शीशम के पत्तों का काढ़ा बनाकर पिने से बुखार ठीक होता है। 

शीशम का तेल कैसे बनाये : How to make Rosewood oil:


 शीशम का तेल बनाने के लिए शीशम का पेड़ जितना पुराना हो उतना अच्छा रहता है मगर इस पेड़ की लकड़ियां ताज़ी होनी चाहिए सुखी हुवी न हो उसका ख्याल रखें। 

शीशम का तेल बनाने के लिए शीशम की  १ किलोग्राम ताज़ा  लकड़ी  ले लीजिये, अब ४ लीटर पानी में इसकी ताज़ा लकड़ी को तब तक उबालें जब तक यह पानी १ लीटर हो जाये।  इसके बाद इस उबले हुवे पानी को छान लीजिये और उस पानी में २५० ग्राम सरसों का तेल डालकर फिरसे पकाना है।  

जब तक की यह पानी पूरी तरह से जल जाये और सिर्फ तेल रह जाये। थोड़ी देर उबलने के बाद आप देखेंगे की इसमें  सिर्फ तेल बचा होगा और सब पानी भाफ बनकर उड़ गया होगा।  अब जो प्राप्त होगा व शीशम का तेल होगा इसे अपने  हिसाब से बोतल में भर दें। और इस तेल का उपयोग करें। इस तरह से आप घर पर ही शीशम का तेल बना सकते हे।

शीशम के फायदे : शीशम तेल के फायदे : Advantages of rosewood In Hindi


शीशम के तेल के असाधारण फायदे है। शीशम का तेल दर्द नाशक, वात रोधी, सदन रोकने वाले, कामोत्तेजक, कीटनाशक और स्फूर्तिदायक के रूप में उपयोग में लिया जाता है। 

शीशम तेल का उपयोग अवसाथ को ठीक करने में किया जाता है। इसके तेल का सेवन करने से अवसाथ ग्रस्त रोगियों को राहत मिलती है। इसके सेवन से सकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव बढ़ता है। 

  • दांतों में सर दर्द में और घुटनों के दर्द को ठीक करने में यह बहोत प्रभावकारी तेल है। दांतो के दर्द के लिए रुई में शीशम के तेल को लगाकर दातों में रखने से दर्द कम होता है।  सर में दर्द के लिए इस तेल की मालिश सर के दर्द में आराम पहुंचता है।  जोड़ों में दर्द होने पर इस तेल को गरम करके दर्द वाली जगह पर लगाएं  दर्द  गायब हो जाता है। इस तरह शीशम के तेल का उपयोग करके अपने शरीर में होने वाली परेशानी से छुटकारा पा सकते हो। 
  • ह्रदय रोगों में भी यह रामबाण औषधि के रूप में काम करता है।  कोलेस्ट्रॉल बढ़ गया हो या ह्रदय रोग से पीड़ित होने पर इस तेल का सेवन करने से रक्त प्रवाह सही रहता है इसलिए इसका का उपयोग ज़रूर करना चाहिए। 
  • शीशम का तेल का उपयोग खाना बनाने में करने से पाचन शक्ति मजबूत होती है। 
  • मितली में भी इसका कारगर उपचार है। जब मितली आती है तो कुछ भी अच्छा नहीं लगता और शरीर बेचैन रहता है ऐसे में शीशम के तेल का सेवन बहोत फायदेमंद होता है। 
  • कफ, सर्दी, उलटी, तनाव, मुहांसे और त्वचा रोगों में भी शीशम का तेल बहोत फायदेमंद होता है। 
  • आँखों के लिए भी शीशम का तेल बहोत फायदेमंद है। कई बार आँखों में जलन या कुछ आँखों में चले जाने पर आंखे लाल हो जाती है।  उस समय शीशम के नरम पत्तों को अच्छे से पीसकर उसका लेप बनाकर कपड़े की मदद से आँखों पर बाँध लें इस से आँखों की लालिमा और दर्द दोनों ही गायब हो जाते है। 
  • शरीर पर हुवे घावों को भी यह भरने में बहोत सहायक है। शरीर  पर जहाँ घाव या चोट लगी हो उस हिस्से पर शीशम के तेल को हल्दी मिलकर लगा लें घाव बहोत जल्दी ठीक हो जायेगा। 
इस तरह घरेलु उपचार से सभी शीशम के तेल के फायदे और लाभ ले सकतें है। 

शीशम का उपयोग :


हमारे आज के समय में कैंसर बहोत बढ़ता जा रहा है।  हमारे देश की बहोत बड़ी आबादी कैंसर जैसे रोगों से पीड़ित है और उसमें में भी ख़ास कर महिलाओं को होने वाली  स्तन कैंसर की बीमारी बढ़ रही है।  स्तन में अगर दर्द है या गाँठ हो तो शीशम का उपयोग कर सकते है। 

शीशम का स्तन कैंसर में उपयोग :


शीशम की पत्तियों को पीसकर लेप बनाकर स्तनों  पर  लगाएं।  यह प्रयोग नियमित करने पर स्तनों में कैंसर की गाँठ पिघलना शुरू कर देगी। यदि स्तनों में दर्द हो तब शीशम के पत्तों को गर्म करके तेल या घी में लगाकर स्तनों के कर बांध लें इससे दर्द और सूजन दोनों गायब हो जायेगा। याग बहोत लाभ करि उपयोग है। यदि कोई  ऐसी  समस्यां से  पीड़ित हे तो यह प्रयोग अवश्य करें इसके कोई नुकसान भी नहीं हे। 

कैंसर की  परेशानी में यह एक चमत्कारी पेड़ है। पशुओं की स्तन से जुडी समस्यां में भी इसका प्रयोग किया जाता है। इस उपयोग से स्तनों में दूध की भी बृद्धि होती है। साथ साथ इससे स्तनों की सुंदरता भी बढ़ती है। इस प्रयोग से स्तन गोल और सुडोल होते है। 

गर्मी में शीशम का उपयोग :


शरीर में यदि  गर्मी  बहोत बढ़ गयी हो बहोत पसीना होता हो। पसीने के कारण शरीर से बदबू आती हो तो शीशम के ५ से ७ पत्तों को पीसकर इसमें पानी और मिश्री मिलाकर शरबत की तरह नियमित  सेवन करने से शरीर से गर्मी दूर होगी और पसीने की बदबू भी ख़त्म हो जाएगी। 

विष में शीशम का उपयोग :


शीशम एक विष विरोधी औषधि है। विष को ख़त्म करने वाली औषधि के रुप  में  इसका  प्रयोग किया जाता है। अगर किसी ज़ाहेरिले कीड़े या मकोड़े ने या किसी ज़हरीले जानवर ने काट लिया हो तब शीशम के पत्तों के अंदर थोड़े नीम के पत्ते और नमक मिलाकर उस पानी को उबालें और उस पानी को उस जगह पर सिकाई करे जहाँ ज़हरीले जानवर ने काटा हो।  आप देखेंगे  इस प्रयोग से उस भाग की लालिमा भी चली जाएगी और सूजन भी ख़त्म होगी। यह बहोत लाभदायक प्रयोग हे जिसे करने से किसी तरह का  नुकसान नहीं होता। 


त्वचा के रोगों में शीशम का उपयोग :

 
खाज, खुजली और एक्जिमा जैसे रोग होने पर शीशम के तेल को उस त्वचा जहाँ पर  परेशानी हो वहां पर लगाए, आप की त्वचा सम्बन्धी परेशानी ख़त्म हो जाएगी। यह किसी भी त्वचा सम्बन्धी परेशानी में उपयोग करें यह बहोत दिव्य औषधि हे।  यह प्रयोग बहोत लाभकारी है। 

मधुमेह में शीशम का उपयोग :


मधुमेह रोग  में शीशम का उपयोग करने के लिए  सदाबहार की पत्तियां, नीम की पत्तियां और  शीशम की पत्तियों को चबाकर या शरबत बनाकर सेवन करने से मधु मेह के रोग के साथ धातु की बीमारी में लाभ मिलता है।  साथ ही मधुमेह से आयी हुवी कमजोरी भी दूर होगी।  शरीर में ताकत का संचार होगा यह भी शीशम का  एक कारगर प्रयोग है। 
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स्त्रीप्रदर में शीशम का उपयोग :


स्त्रियों के पीरियड के समय आधीक स्क्त्स्राव होने पर भी शीशम के पत्तों का सेवन करने से चमत्कारिक लाभ देखने को मिलेंगे।  स्त्रियों को होने वाली बिमारियों में यह उत्तम औषधि रूप  मानी जाती है। 

मेरे इस लेख से जो की शीशम पेड़ के उपयोग फायदे औषधीय गुण । Shisham Tree Hindi के विषय में था। आपको जानने मिला होगा के हमारे आसपास मिलने वाले शीशम के पेड़ के बहोत सारे लाभ और गुणों के बारें में। इस पेड़ के उपयोग से हम हमारी ज़िंदगी में कई सारे लाभ आसानी से उठा सकते है। प्रकृति ने हमें जो भी दिया हम पर महेरबान हो कर दिया।  हमें हमारी प्रकृति से मिलने वाली हर एक वस्तिओं का लाभ कैसे उठा सकते है ये जानना ज़रूरी है। 

मुझे उम्मीद हे मेरे इस शीशम के पेड़ का लेख पढ़ने के बाद काफी कुछ जानने और सिखने मिला होगा। मेरा यही प्रयास होता हे के मेरे किसी भी लेख में आपको पूरी तरह से जानकारी दे सकूँ ताकि आपको कही और से जाने की ज़रूरत न पड़े। अगर आपके मन में कुछ सवाल या सुझाव हो तो निचे कमैंट्स कर सकते हे। 

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