अर्जुन पेड़ की जानकारी औषधीय लाभ – नुकसान।

हमारी प्रकृति ने हमें वृक्षों के रूप में  कई सारि औषधियां प्रदान की है। हमारे आसपास उगने वाला हर पेड़ औषधीय गुण समेटे हुवे है इन्हीं औषधीय गुणों वाले पेड़ों  में से एक वृक्ष है अर्जुन का पेड़।
अर्जुन का पेड़ भारत में बड़ी ही आसानी से मिलने वाला पेड़ है। यह पेड़ जंगल में और नदी नालों के पास खास पाया जाता है।
अर्जुन के बारे में  या इसके आयुर्वेद में महत्व पूर्ण  लाभ के बारें में और इससे जुडी कई उपयोगी जानकारी के बारें में हम सभी सब कुछ नहीं जानते।
तो आज के इस विषय में हम अर्जुन से जुडी कई सारि ऐसी जानकारी प्राप्त करेंगे जो हमारे लिए कभी न कभी उपयोगी साबित होगी और इससे हम थोड़े बहोत लाभ भी उठा सकेंगे।  तो चलिए आज हमारे इस लिख में हम अर्जुन पेड़ की जानकारी औषधीय लाभ – नुकसान के बारें में विषय शुरू करते है।
 
अन्य भाषाओँ में अर्जुन के पेड़ के नाम : Arjuna tree names in other languages:
लैटिन : Terninalia Arjuna
English : Arjuna
संस्कृत : अर्जुन , धवल
हिंदी अर्जुन, काहू
मराठी : अर्जुन, सदुरु
बंगाली : अर्जुन, गाछ
तेलगु : धर्रमछी
गुजरती  : घोलो, सादड़ो
अर्जुन पेड़ के फूल : Arjuna tree flowers
 
अर्जुन पेड़ की जानकारी औषधीय लाभ - नुकसान । Arjun Tree
 
अर्जुन पेड़ के पत्ते और फल : Leaves & Fruits of Arjuna tree
अर्जुन पेड़ की जानकारी औषधीय लाभ - नुकसान । Arjun Tree

Table of Contents

अर्जुन के पेड़ की जानकारी :Information about Arjuna tree in Hindi

अर्जुन के पेड़ की बात करें तो यह दिखने में अमरुद के पेड़ की तरह होता है। इसकी ऊंचाई ८० से १०० फिट तक होती है और इसकी गोलाई  १५ से २० फिट तक  होती है।
यह बहोत ही विशाल सुन्दर और मझबूत पेड़  है। १ साल तक अर्जुन के पेड़ अमरुद के पेड़  सामान ही मालूम पडत्ता है मगर और ज्यादा बड़ा होने पर लगभग ४ से ५ साल  बाद यह सीधा बढ़ता है।   इससे इसे पहचानने में आसानी होती है।
अर्जुन के पत्तों की अगर बात की जाए तो इसके पत्ते भी अमरुद के पत्तों के सामान ही दीखते है। अर्जुन और अमरुद के पेड़ की असामनता यह हे के अमरुद का पेड़ बड़ा होने पर  किसी  छत्री की तरह फैलता है, मगर अर्जुन का पेड़ बड़ा होने पर कसी सिपाही की तरह खड़ा दिखाई देता है। अर्जुन के पेड़ का  फल आसानीसे पहचाना जा सकता है।
अर्जुन के वृक्ष के अगर तने की बात कि जाये तो अमरुद और अर्जुन के पेड़ के तने भी एक जैसे ही दीखते है। इन दोनों के पेड़  के तने से छाल निकलती  है, अगर रंग की बात की जाए तो अर्जुन के पेड़ की  छाल कुछ कुछ लाल रंग की होती है।
इस छाल का पाउडर लाल रंग का होता है।अगर देखा जाएँ  तो इन दोनों ही पेड़ की समानता एक जैसी ही होती है।

अर्जुन के पेड़ के आयुर्वेदिक फायदे : Ayurvedic benefits of Arjuna tree in Hindi

अर्जुन का वृक्ष रक्त पित्त नाशक है। अर्जुन के पेड़ के आयुर्वेदिक फायदें की बात की जाए, तो अर्जुन का पेड़ हार्ट के लिए  हृदय के लिए बहोत ही अच्छा होता है। हृदय की मांसपेशिया और हृदय  की हेल्थ के लिए यह बहोत अच्छा होता है।
अर्जुन का पेड़ हमारे शरीर के लिए बहोत ही फायदेमंद है।  हमारे शरीर की मरम्मत करने में यह बहोत ही उपयोगी होता है। अर्जुन का पेड़ हमारे शरीर की नस नाड़ियों को हमारी त्वचा को,  हड्डियों को और हमारे मांसपेशियों को ताकत देने वाला वृक्ष है।
ख़ास कर यह हमारे शरीर की नाड़ियों को बहोत शक्ति प्रदान करता है। नाड़ियां हमारे शरीर के अंदर पूरी तरह से फैली हुवी होती है, और यह हमारे शरीर के अंदर की हर नाड़ियों को बल देने में बहोत मदद करता है।
 इसके मुख्य गुण की बात की जाए तो ख़ास कर यह हमारे दिल के लिए बहोत फायदेमंद है। दिल की बिमारियों को ठीक करने में यह बहोत कारगर है।
मानसिक परेशानियों में गभराहट के लिए छोटी छोटी बातों में जिनको तनाव होता है उनके लिए भी यह बहोत उपयोगी वृक्ष है। इसके फायदे इसकी छाल में है।  नियमित रुप से इसकी छाल का सेवन करने से मानसिक रोगों में बहोत फायदा होता है।
अर्जुन के पत्तों का रस कान के अंदर डालने से कान के  रोगों में फायदा होता है।
अर्जुन का पेड़ हमारे हृदय का सबसे उपयोगी समाधान है। इस पेड़ के बहोत सारे औषधीय गुणों का उपयोग करके हम हमारे हृदय को रोगमुक्त और तंदुरुस्त रख सकते है।
संक्षेप में कहे तो अर्जुन हमारे हृदय का डॉक्टर स्वरुप है। ह्रदय रोगों में अर्जुन का रामबाण उपयोग  होता है।

ह्रदय रोगों में अर्जुन का उपयोग:

  • अर्जुन के पेड़ की १० से १५ ग्राम ताज़ी छाल ३०० ग्राम पानी में उबालें जब यह पानी आधा रह  जायें तब इसे छानकर इसमें थोड़ा दूध मिलाकर सुबह में सेवन करने से ह्रदय की समस्या दूर होगी,  इसके साथ साथ Angina Pain और ह्रदय की धड़कन में भी बहोत लाभ होगा
  • अर्जुन की सुखी छाल का प्रयोग करने के लिए इसकी सुखी छाल का ५ ग्राम तक पाउडर २ ग्लास तक पानी में उबालकर १ ग्लास तक कम रह जाए तब दूध मिलाकर सेवन करने से हमारे ह्रदय की कार्यक्षमता बढ़ती है। वही लाभ हरे छाल से मिलता है वही लाभ आप  सुखी छाल से भी उठा सकतें है।
  • यदि आप बिना दूध मिलाये भी इस काढ़े का सेवन करना चाहते हो तो भी कर सकते हो। तो भी यह  उतना ही लाभ देने में मदद करेगा। हमारी भोत सारि  ह्रदय की परेशानी  होने पर कई औषधि उतना फायदा नहीं पहुंचा सकती मगर अर्जुन की छाल एक ऐसी रामबाण औषधि हे जो हर हाल में उसके असाधारण  लाभ हमें प्रदान करती है। इसमें रो राय नहीं है।
  • ह्रदय की परेशानी दूर करके अपने ह्रदय को और भी कार्य सक्षम बनाने के लिए धीरे धीरे प्राणायाम करके इसके काढ़े का सेवन करके  ह्रदय की कार्यक्षमता बढ़ाने में बहोत लाभ मिलता है। ध्यान रखें के ह्रदय रोगिओं को धीरे धीरे प्राणायाम करना है।

 अर्जुन की छाल का दांतों के समस्याँ में उपयोग :

  • मसूड़ों में सड़न हुवी हो, मुँह में अगर फोले पड़े हो, मसूड़ों की परेशानी हो तो  अर्जुन की  छाल  का उपयोग बहोत ही लाभ देता है। इस परेशानी से छुटकारा पाने के लिए इस की छाल को कूटकर काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से मुँह की समस्याएं ख़त्म होगी मुँह भी ठीक होगा और मुँह के संक्रमण से भी पूरी तरह से हमेशा के लिए छुटकारा मिलेगा।

 अर्जुन का कानों की  परेशानी में उपयोग :

  • कान की परेशानी में, कान की पीड़ा में भी यह बहोत सकारात्मक प्रभाव देता है कान की पीड़ा  को समाप्त करने के लिए कान की तकलीफ से छुटकारा पाने के लिए, अर्जुन के पेड़ के  ४ से ५ पत्तों का रस निकाल लें, और ४ बूंदें कान में डालें यह बहोत ही उत्तम औषधि है। इससे कानों से जुडी सभी समस्याओं में लाभ मिलता है।

 अर्जुन का चहेरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए उपयोग :

  • चहेरे की सुंदरता निखारने के लिए भी यह उत्तम है। इसका लाभ उठाने के लिए अर्जुन की छाल को चंदन की लकड़ी की तरह पत्थर पर घिसकर लेप के रूप में  चहेरे पर लगाएं, इस प्रयोग को करने से चहेरे  पर  बनी  झुर्रियां, खील, मुहांसे, दाग सभी में लाभ मिलता है ,और चहेरे की सुंदरता में निखार आता है। बाजार में मिलने वाले महंगे महंगे आधुनिक कॉस्मेटिक साधन हमारे चहेरे को जो लाभ नहीं दे सकते वह सौंदर्य अर्जुन की छाल से हमें मिलता है। अर्जुन की छाल का यह दिव्य प्रयोग है।

अर्जुन घबराहट और बेचैनी में का उपयोग :

  • रातको नींद न आती हो बार बार घभराहट और बेचैनी रहती हो रात को कई बार नींद टूट जाती हो उन सभी को अर्जुन की छाल का ५ ग्राम चूर्ण हररोज़ चाय की तरह पिने से घबराहट दूर होगी, बेचैनी भी  ख़त्म होगी साथ- साथ मस्तिष्क और मांसपेशियों को ताकत मिलेगी।

 अर्जुन का ब्लडप्रेशर में उपयोग :

  • उच्च रक्तचाप ( High Blood Pressure ) की समस्यां में ख़ास कर जो लोग ह्रदय रोग से पीड़ित  हे उनके लिए अर्जुन एक दिव्य औषधि है। इस प्रयोग को करने के लिए अर्जुन की छाल को ५ ग्राम  पानी में उबालें  जब पानी ५० ग्राम रह जाएँ तब इसे छान करके सेवन करें।  इस प्रयोग से high b p  उच्च रक्तचाप की वजह से होने वाले सिरदर्द में लाभ होगा , Hypertension के साथ ही जिनका Stress Level बढ़ा हुवा हो, तनाव की स्थिति हो उनके लिए भी यह दिव्य औषधि का काम करती है। 
  • जिन महिलाओं को प्रदर का रोग है, जिन पुरुषों को प्रमेह की शिकायत हे व पित्तजन्य प्रमेह होता है। वह २ चम्मच अर्जुन के पाउडर को रात में पानी में भिगोकर सुबह में उठते ही उस पानी को पि जाएँ।  इससे प्रदर व प्रमेह में  लाभ होगा और ज्यादा परेशानी होने पर इसका काढ़ा बनाकर नियमित सेवन करें बहोठी लाभ होगा और परेशानी दूर होगी। यह प्रयोग स्त्री रोग प्रदर में और पुरुषों के धातु रोग से जुडी परेशानिओं को ख़त्म कर देगा।

 अर्जुन के हड्डी के रोगों के लिए उपयोग :

  • असतीभंग, यानि के हड्डी के टूट जाने पर अर्जुन की छाल का उपयोग बहोत लाभकारी है। जिनकी हड्डी टूटी हो या हड्डी से जुडी यदि कोई समस्या हो  वह  अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर नियमित रुप  सेवन करते है। उनकी हड्डी की समस्या ख़त्म हो जाती है साथ- साथ उनकी हड्डी भी बहोत जल्दी जुड़ जाती है।  यह  एक कारगर  उपाय है। इससे दिमाग को भी ताकत मिलेगी।

 अर्जुन का हड्डियों के मज़बूत के लिए उपयोग :

  • अर्जुन की छाल के चूर्ण को शहद के साथ लेने से हड्डियों को तकाल मिलती है और हड्डियां मज़बूत होती है।

 अर्जुन का कोलोस्ट्रोल में उपयोग :

  • यदि कोलोस्ट्रोल बढ़ा हुवा है तो कोलेस्ट्रॉल कम करने में अर्जुन बहोत ही उपयोगी है।  इसका उपयोग करने के लिए अर्जुन की छाल के ३ ग्राम चूर्ण को २ गिलास पानी आधा होने तक उबालें फिर ठंडा करके छान लें सुबह शाम पिने से ब्लॉक हुवी धमनिया खुल जाती है, और कोलेस्ट्रॉल कम होने लगता है।

अर्जुन का रक्त दोष में   उपयोग :

  • रक्त सम्बन्धी रोग व रक्त सम्बन्धी  समस्या होने पर अर्जुन की औषधि लाभ देती है।  मगर इस औषधि में आवंले और नीम की छाल का उपयोग  होता है।  इस प्रयोग को करने के लिए अर्जुन, नीम और आंवलें छाल को पानी में उबाल कर उस उबले हुवे पानी से त्वचा को धोएं इस से त्वचा सम्बन्धी सभी परेशानी से छुटकारा मिलेगा।  

अर्जुन का बुखार में उपयोग :

  • यदि बार बार बुखार की समस्यां हो बुखार उतर नहीं रहा हो  पुराना बुखार हो, तो अर्जुन के साथ साथ तुलसी और नीम के २ से ३ पत्तों का काढ़ा बनाकर पिने से कितना भी पुराना बुखार होने पर बहोत लाभ मिलता है।  इस प्रयोग से सर्दी, जुकाम, (Sinusitis ) साइनोसाइटिस, कफ, खांसी जैसी समस्याएं व इनसे आने वाले बुखार में लाभ होगा।

 अर्जुन का पेट की समस्यां में उपयोग :

  • पेट की व पेट सम्बन्धी, आंव की समस्या  तथा  (Amibiasis ) अमीबायोसिस होने पर अर्जुन की छाल का काढ़ा बनाकर पियें इससे पेट से जुडी सभी समस्यां में आराम मिलेगा और  परेशानी दूर होगी।

 अर्जुन का श्वेतकुष्ठ में उपयोग :

  • श्वेतकुष्ठ (Leucoderma ) में अर्जुन की छाल  का उपयोग बहोत ही प्रभावकारी है। श्वेतकुष्ठ और त्वचा सम्बन्धी समस्या होने पर पुनर्नवा की जड़, बावची और अर्जुन की छाल को पिसलर पेस्ट बनाकर श्वेतकुष्ठ वाली जगा पर लग्गते है तो कुछ ही दिनों में श्वेतकुष्ठ ठीक होने लगेगा।

 अर्जुन का बालों में उपयोग  :

  • छोटी उम्र में बालों का सफ़ेद होना आम बीमारी है, इसके लिए महेंदी के अंदर अर्जुन की छाल का पाउडर मिला कर बालों में लगाने से सफ़ेद बालों की समस्या दूर होकर बाल काले और घने होने लगेंगे।
  • आयुर्वेदिक औषधियों का उपयोग हमरे शरीर की  कई बिमारियों को ठीक करने में एक जैसी ही औषधियों का उपयोग होता है।  इन औषधियों का उपयोग  करने से हमारे शरीर की कई ऐसी परेशानियां भी ठीक हो जाती है, जिनके बारें में हम नहीं जानते।
  • आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग की जानकारी हमें हमारे पुराने  पुस्तकों और ऋषि – मुनियों द्वारा मिली है। इसलिए हमारे इन प्राचीन औषधियों के उपयोग की थोड़ी बहोत जानकारी हम सभी को होनी ही चाहिए। इससे हम छोटी – छोटी बिमारियों के बरं बार डॉक्टर के पास न जाकर अपना इलाज खुद से ही कर सके। इस की खासियत यह हे के आयुर्वेदिक औषधियों के उपयोग से  हमें कुछ नुकसान नहीं होता।

अर्जुन के पेड़ के नुकसान :

वैसे तो अर्जुन का पेड़ कोई नुकसान नहीं करता परन्तु किसी – किसी परिस्थिति में इसका उपयोग नहीं करना चाहिए। और थोड़ी सावधानियां रखनी चाहिए। जैसे की…
अर्जुन रक्त संचार को बढ़ाता है, इसलिए अगर आप किसी गंभीर बीमारी से  पीड़ित है या, कोई नयी सेर्जेरी हुवी हो तो  डॉक्टर्स की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करना चाहिए।
४ से ५ साल तक की उम्र के छोटे बच्चों को भी इसका सेवन न कराये तो अच्छा होगा।
गर्भवती महिलाओं को भी इसका उपयोग करने से  पहले अपने वैद्य और डॉक्टर की सलाह लेकर ही इसका उपयोग करना चाहिए।
मेंने इस अर्जुन पेड़ की जानकारी औषधीय लाभ – नुकसान । Arjun Tree के बारें में आपको  पूरी तरह से जानकारी देने का प्रयास किया है।  मुझे उम्मीद हे यह  लेख आपको अच्छा लगा होगा और उपयोगी साबित होगा  इसके साथ आपके मन के कुछ सवालों के जवाब भी  मिले होंगे। इस लेख से जुड़ा आपका कोई सवाल या सुझाव हो तो आप निचे कमैंट्स में हमसे पूछ सकते है अवश्य ही उन सवाल का जवाब देने की हम कोशिश करेंगे।
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