आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण।

आक के पौधे को मदार के नाम से भी जाना जाता है। आक का वानस्पतिक नाम Calotropis Gigantea) एक औषधि हे। इसको मंदार, अर्क, आक और अकौआ भी कहते है।
हमारे देश में कई सारे पौधे ऐसे हे जिनको ज़हरीला समजा जाता है। आक का पौधा भी इनमें से एक है। यह मान्यता कुछ हद तक सही भी है। क्यों की इन वनस्पतयों को जानवर भी नहीं खाते । जैसी की आक, नागमणि, धतूरा आदि। मगर आयुर्वेद में इन वनस्पतियों को दिव्य औषधि के रूप में माना जाता है।
आप के मन में भी आक ( मदार ) की कुछ ऐसी ही तस्वीर होगी। इसलिए हमारे आज के विषय में हम आक का पेड़ के फायदे और पौधे के बारें में विस्तार से जाएंगें। इस लेख में हम आक के पौधे की जानकारी ,लाभ  उपयोग और औषधीय  गुण  के बारें में आपको जानकारी देंगे। तो चलिए आज का हमारा विषय आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण शुरू करते है।

आक(मदार) की पहचान :

आक(मदार) की पहचान : आक(मदार) एक औषधीय पौधा हे। इसे मदार, मंदार, आक और अर्क के नाम से भी जानते है। इसका वृक्ष छोटा और छत्तादार दिखाई देता है। इसके पत्ते बरगद के पत्तों के समान होते है।  यह हरे सफेदी लिए पत्ते पकने पर पेले रंग के हो जाते है। इसके फूल छोटे और गुच्छों में लगते है। आक(मदार) की पहचान इन पर नीलें रंग के फूल की चित्तियाँ से होती है। सफ़ेद आक के फूल पूरी तरफ सफ़ेद होते है। आक के फूल खाने के फायदे भी होते है।
आक के फल आम के समान मगर आकार में छोटे होते है। इन के अंदर रुई होती है। आक के पौधे की हर शाखाओं से दूध निकलता है। यह दूध विषैला होता  है। क्यों की यह विष जैसा काम करता है। अन्य भाषाओं में आक अलग – अलग नाम से जाना जाता है।  जैसे की…

आक(मदार) का अन्य भाषा में नाम :

संस्कृत : अर्क, तूल फल, क्षीर पर्णी, आस्फोट 
हिंदी : आक, आकद, मदार, सफेदक, अकौवा 
कन्नड़ : विली, काकाड़ा 
उर्दू : आक
गुजरती: नैनो, आंकडो
मराठी : मंदार
बंगाली : अकांड
तेपाली : सेंतुआ
पजलुगु : नल्लड़ी, लेलेदु
नेबी : आंक
अरबी : ओकर
नीले आक(मदार) के  फूल :
आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण।
सफ़ेद आक(मदार)  के फूल :
आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण।

आक(मदार) की जानकारी :

आक(मदार) की जानकारी : आक का पौधा सड़को के किनारे, बंजर भूमि, नदि – नालों के किनारे पर आसानी से देखा जाता है। इसकी २ से अधिक प्रजाति पायी जाती है। इसकी २ प्रजातियों को ही  लोग जानते है। नीले  रंग वाली और सफ़ेद रंग वाली प्रजाति। इन दोनों के फायदें और गुण समान होते है मगर सफेद आक के फायदे और गुण  अधिक माने जाते  है। सफ़ेद फूल वाली प्रजाति को श्वेतार्क भी कहा जाता है।
सफ़ेद फूल वाली प्रजाति नीले फूल वाली प्रजाति के मुकाबले दुर्लभ होती है।  यह प्रजाति कम देखने को मिलती है। किन किन – किन  क्षेत्रों में यह सफ़ेद फूल वाली प्रजाति जिसको श्वतार्क कहते है इनमें अधिक पायी जाती है।
नीले रंग की फूल वाली प्रजाति में दूध, सफ़ेद फूल वाली प्रजाति के मुकाबले काफी कम मात्रा में पाया जाता है। नीले रंग की फूल वाली प्रजाति फूल ऊपर से सफ़ेद और अंदर से कुछ कुछ बैंगनी रंग के दीखते है। मगर सफेद फूल वाली प्रजाति के फूल पूरी तरफ से सफ़ेद होते है।  इस कारण से इस दोनों की पहचान आसान हो जाती है।
आक के पत्ते हरे रंग के होते है और यह बरगद के पत्तों के समान दीखते है। आक की दोनों ही रंग की प्रजाति में पत्ते सामान होते है। सिर्फ इनके फूलों के  रंग के  फर्क से इन दोनों  प्रजातियों को पहचाना जाता है। आक के पौधे का पत्ता, तना और फूल कहीं से भी तोड़ने पर इसमें से दूध निकलता है। जिसे ज़हरीला माना जाता है।
आक के फूल हमेशा गुच्छों में लगते है। इसके फूल के सूखने पर फल बनते है, जो सूखने पर अपने आप चटक कर गिर जाते है। और इन आक नामक पौधा और उसका फल में से सफ़ेद रंग का रुई जैसा पदार्थ निकलता है जो काफी हल्का होता है। यह इतना हल्का होता है, जो हलकी सी हवा चलने पर भी उड़ने लगता है।
आक के पौधे उम्र बढ़ने पर काफी बड़े हो जाते है। बड़े होने पर यह १० से १२ फिट तक ऊँचे हो जाते है। यह पौधे गर्मियों में अधिक फूलते – फलते है और गर्मियों में यह अधिकतम मात्रा में  फुल प्रदान करते है। बारिश और ठंड में यह फूल सूखने लगते है।
आक का सेवन अधिक मात्रा में कर लिया जाये तब दस्त, उलटी होकर मनुष्य मर भी सकता है। इससे विपरीत यदि आक का सेवन वैद्य की निहरानी में किया जाये तब मनुष्य में होने वाले अनेक रोगों को ठीक करने में इसका उपयोग किया जा सकता है। सफेद आक के पौधे के गुण इसका हर अंग औषधि हे, हर भाग उपयोगी है।
(आक) मदार वृक्ष के औषधीय गुण के साथ -साथ  तांत्रिक प्रयोग में भी उपयोग किया जाता है। ख़ास कर सफ़ेद आक के पौधे को तांत्रिक प्रयोग में इस्तमाल किया जाता है।
आक  के आयुर्वेदिक औषधि वाले पौधे में विभिन्न प्रकार के पोषक तत्त्व ( Nutrients ) मौजूद है। जिसके कारण आक के पौधे का उपयोग कुछ आयुर्वेदिक औषधि बनाने में किया जाता है। इसमें पाए जाने वाले पोषक तत्वों में A अमीरीन, सायिनीडीन – ३ – रमोगोग्लुकोसाइड (Cyanidin – 3 –  Rhamnoglucoside ),  प्रोसेस्टरोल prosestrol, बी -साइरोस्टेरोल ( B – Sitosterol ), कैलेक्टिन ( Calactin ), कैटोक्सिन  ( Caotoxin ), कैलोप्रोपैजेनिन ( Calotropagenin ), कैलोप्रोपिन ( Calotropin ), कैलोप्रोपेन ( Calotropain ), प्रोसेरोसाइड ( Proceroside ), प्रोसेरर्जेनिन ( Proceragenin ), इत्यादि शामिल है। इसलिए इस दिव्य वनस्पतिका औषधि रुप  में उपयोग किया जाता है।
आक(मदार)  के फूल और पत्ते :
आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण।
आक(मदार)  के फल :
आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण।
आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण।

आयुर्वेद में आक(मदार)  का उपयोग :

आक के पौधे अरुचि, बवासीर, और श्वास रोग आदि में आक का औषधीय उपयोग किया जाता है। आईये जानते  हे आक के कुछ औषधीय और गुणकारी उपयोग के बारें में। इसके उपयोग से आप विभिन्न रोगों को दूर कर सकते है। आईये देखते है हमारे रोगों की परेशानी में नीले और सफेद आक के फायदे और उपयोग हम कैसे कर सकते है।

आक(मदार)  के उपयोग :नीले और सफेद आक के फायदे।

दमा और श्वास रोग में आक(मदार)  का उपयोग :

आक के पके हुवे पिले पत्तों में इसके कोमल फूलों और थोड़ा सेंधा नमक को बराबर मात्रा में लेकर किसी मटकी में डालकर अच्छी तरह बंद कर लें। अब इस मटकी को किसी उपले पर रखकर इन की भस्म बनाकर एक चने के बराबर मात्रा में शहद मिलाकर सेवन करें और आधे घंटे तक कुछ न खाएं।इस तरह मदार के पेड़ का प्रयोग करने से पुरानी से पुरानी सांस और दमे की बामारी ठीक हो जाती है।
आक के फूल ५० ग्राम और काली मिर्च  ६ ग्राम दोनों को मिलाकर बारीक़ पीस लें और चने से छोटी छोटी गोली बनाकर रोजाना सेवन करें। इस प्रयोग से भी पुरानी  खांसी, दमा, सांस जैसे रोग ठीक हो जाते है। 
पीलिये में आक(मदार)  का उपयोग :
पीलिये की बीमारी में आक का पौधा का उपाय रामबाण इलाज का काम करता है। यह प्रयोग सूर्योदय से पहले करें। इस प्रयोग को करने के  लिए ६ से ७ आक के फूल की कली आधे पान के पत्तें  में रखकर सुबह में खाली पेट सूर्योदय से पहले सेवन करें।  यह प्रयोग ३ से ४ दिन तक लगातार करें। इस प्रयोग से किसी भी प्रकार का पीलिया पूरी तरह से ठीक होता है। यह प्रयोग पीलिये के रोग में बहोत फायदा देता है। अधिकतर लोग इस प्रयोग को जानते भी है और करते भी है।

सर के रोगों में आक(मदार)  का उपयोग :

यदि सिर में किसी भी प्रकार के इंफेकशन में या फोड़े फुंसी होने पर आक से निकलने वाले दूध को सिर पर लगाने से लाभ मिलता है। इस प्रयोग से  सिर की परेशानी समाप्त हो जाती है।
कान के रोगों में आक(मदार)  के उपयोग ;
कान में  के दर्द के लिए, कान में पस पड़ना, कान चटकना, या कान में किसी भी प्रकार का इंफेकशन हो तो आक के पत्तों  को घी में सेक कर और फिर पीस कर रस निकले लें। इस रस को कुछ दिन तक कान में डालने से कान के सभी प्रकार के रोग ठीक हो जाते है।

दांतों में आक(मदार)  के उपयोग :

दांतों की सभी प्रकार की समस्यां को दूर करने के लिए आक के पौधे का दातुन करें। इस प्रयोग से दांत की परेशानी समाप्त होती है। इसका दूसरा प्रयोग करने के लिए इसका दूध और घी मिलाकर रुई में लपेटकर कीड़े लगे दांतों  में भी लगा सकते है। इस तरह (आक ) आंकड़ा की देसी दवा के प्रयोग से भी दांतों के कीड़े मर जाते है और फायदा होता है।
दांतों की परेशानी से छुटकारा पाने के लिए आप इसका मंजन के रूप में भी इस्तमाल कर सकते है। इस मंजन को बनाने के लिए आक के ४ से ५ पत्ते, सेंधा नमक, हल्दी, फिटकरी, काली  मिर्च सभी को मिलाकर पाउडर बनाकर दांतों  में मंजन की तरह इस्तमाल करने से पायरिया और दाँतों के सभी रोग समाप्त होते है। 

जलोधर में आक(मदार)  का उपयोग :

 
पेट में पानी भरने की समस्या को जलोधर कहते है।  इस रोग में आक का उपयोग करने के लिए १० से १२ पके हुवे आक के पत्ते और सेंधा नमक को पीसकर मिटटी के बर्तन में डाल कर इसकी भस्म बना लें। इस भस्म को २० से २५ मिली ग्राम की मात्रा को छाछ – मट्ठे में डाल कर रोजाना सुबह- दोपहर – शाम सेवन करने से जलोधर की समस्या ख़त्म हो जाती है। 

मलेरिया में आक(मदार)  का उयपोग :

 
इस  प्रयोग को करने से पहले अपने वैध की सलाह ज़रूर लें। मलेरिया में आक का प्रयोग करने के लिए आक के २ कोमल छोटे पत्तों को चबाकर खा लें इस से मलेरिया ठीक होता है। इस प्रयोग को एक दिन  ही  करें, ज़रूरत पड़ने पर ही दूसरे दिन इस पयोग को करना चाहिए। 

अंडकोष की सूजन में आक(मदार)  का उपयोग :

अंडकोष की परेशानी दूर करने के लिए आक के पत्ते और तिल का तेल साथ में पीसकर पेस्ट बनालें इस पेस्ट को अंडकोष पर लेप करें और इस पर कपडा बांध लें। इस प्रयोग को करने से अंडकोष की सूजन उतर जाती है  और रोग ठीक होता है। 
 
वनस्पति तंत्र में भी आक(मदार)  का बहोत उत्तम प्रयोग बताया गया है।

वनस्पति तंत्र में भी आक(मदार)  का उपयोग :

हाथी पैरों की सनस्यान  में आक(मदार)  का उपयोग :

 
हममें हाथी पैरो की समस्यां होने पर वनस्पती तंत्र में बताया गया है, के हाथी पैरो के प्रयोग में  आक का पौधा होना चाहिए। रविवार को  पुष्प नक्षत्र के दिन आक के पौधे की छोटी से जड़ का हिस्सा काटकर ले आएं। उस जड़ को लाल रंग के सूती धागे में लपेट कर उस पेड़ पर बांध आएं। ऐसा करने से हाथी पैर का रोग धीरे धीरे ठीक होने लगता है। 

नज़र उतरने में आक(मदार)  का उपयोग :

 
सफ़ेद आक की जड़ को माला बनाकर गले में  पहने और दूसरे दिन इसे उतार कर दूसरी माला पहने यह  प्रयोग २ से ३ दिन तक करें। इस प्रयोग को करने से बुरी नज़र लगती नहीं या फिर लगी हो तब उतर जाती है। 
आक के पौधे कई प्रकार से लाभ लिए जाते है। आईये जानते है आक  के अद्भुत लाभों के बारें में :

आक( मदार ) के लाभ :

आक के पत्ते से शुगर का इलाज।

  • आक के पौधे की पत्ती को उल्टा करके इसके खुरदरे भाग की तरफ से अपने पैर के तलवे पर लगाकर मोज़ा पहनकर पूरा दिन रहने दें और रातमें सोते समय निकाल दें।  ऐसा करने से एक ही हफ्ते में शुगर लेवल कम होता है। इससे मधु मेह की बिमारी में लाभ होता है। साथ में  बहार निकला हुवा पेट भी कम होता है। इस तरह आक के पत्ते से शुगर का इलाज होता है।
  • आक  के पत्तों को कड़वे तेल में जलाकर गर्मी के घाव पर लगाने से घाव जल्दी अच्छा होता है।
  • आक  के कोमल पत्तों के धुवें से बवासीर ठीक हो जाती है।
  • आक  के पत्तों को गरम करके चोंट पर  बाँधने से चोट  जल्दी ठीक होती है। और सूजन दूर हो जाती है।
  • आक की जड़ को चूर्ण बनाकर उसमें काली मिर्च मिला कर छोटी छोटी गोली खाने से खांसी ठीक होती है।
  • आक  की जड़ की राख में कडुवा तेल मिलाकर लगाने से खुजली ठीक हो जाती है।
  • आक  की जड़ का चूर्ण गरम पानी के साथ सेवन करने से गर्मी रोग अच्छा होता है।
  • आक  की जड़ को पानी में घिसकर लगाने से नाख़ून के रोग में बहोत फायदा करते है।
  • आक  का दूध पाँव के अंगूठे पर लगाने से दुखती हुवी आँख अच्छी हो जाती है। इसे बवासीर के मस्से  पर लगाने से मस्से चले जाते है। चोट पर लगानेस इ चोट शांत हो जाती  है।
  • बाल चले गए हो उस जगह पर आक के पौधे का दूध लगाने से बाल फिर से आते है। मगर ध्यान रहें इसका दूध आँखों में नहीं जाना चाहिए। वरना इस दूध से आँखे खराब हो जाती है।
 

आक(मदार)  के नुक्सान :

  • आक का अधिक मात्रा में सेवन उलटी, दस्त, धीमी ह्रदय गति और मृत्यु तक का कारण बन  सकता है।
  • आक के धुएं में सांस लें सुरक्षित हे या नहीं ये पूरी तरह से पता नहीं।
  • गर्भावस्था के दौरान आकका सेवन नुकसानदेह हो सकता है।
  • किसी भी बड़ी बीमारी में आक के पौधे का सेवन करने से पहले डॉक्टर की सलाह ज़रूर लेनी चाहिए।
 
आक के पौधे के जितने फायदें हे उसमें से कुछ नुक्सान भी है। नीले और सफेद आक के विषय में
 
मुझे उम्मीद हे आपको मेरा आक(मदार) के चमत्करिक लाभ, उपयोग, औषधीय गुण लेख अच्छा लगा होगा। इस लेख को पढ़ने के बाद आप आक ( मदार ) के बारें में काफी कुछ जान गए होंगे। मेरी यह कोशिश होती हे के आपको मेरी  लिखी हुवी पोस्ट में पूरी तरह से जानकारी मिलें।
इस लेख को पढने के बाद आपके मन में कुछ सवाल हो या सुझाव हो तब निचे कमैंट्स में मुझसे पूछ सकते हे। में अवश्य ही आपके सवाल का जवाब देने की कोशीश करूँगा।
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